रंगों और उल्लास के पर्व होली के दिन जहां लोग एक-दूसरे को गले लगाकर खुशियां बांट रहे थे, वहीं मथुरा-आगरा मार्ग पर एक दर्दनाक सड़क हादसे ने दो परिवारों के घरों के चिराग बुझा दिए। तेज रफ्तार और असंतुलित बाइक सड़क किनारे रखे ईंटों के ढेर में जा घुसी, जिससे दो युवकों की मौत हो गई, जबकि तीसरा दोस्त गंभीर रूप से घायल होकर अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहा है।

यह हृदयविदारक दुर्घटना फरह थाना क्षेत्र में महुअन टोल प्लाजा के पास स्थित शेरे पंजाब होटल के सामने हुई। बताया जा रहा है कि थाना जमनापार क्षेत्र के गांव लौहवन निवासी तीन दोस्त—गोविंद, संकी और अनिकेत—एक ही बाइक पर सवार होकर मथुरा से आगरा की ओर जा रहे थे। होली के मौके पर वे किसी काम या घूमने के उद्देश्य से निकले थे। किसी को अंदाजा नहीं था कि यह सफर उनकी जिंदगी का आखिरी सफर साबित होगा।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बाइक की रफ्तार तेज थी। महुअन टोल के पास सड़क किनारे निर्माण कार्य के लिए ईंटों का एक बड़ा ढेर रखा हुआ था। अचानक बाइक अनियंत्रित हो गई और सीधे ईंटों के चट्टे में जा घुसी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि तीनों युवक उछलकर सड़क पर गिर पड़े। आसपास मौजूद लोग तेज आवाज सुनकर दौड़े और घायल युवकों को संभालने की कोशिश की।
घटना की सूचना मिलते ही टोल चौकी प्रभारी अभिलाख मौके पर पहुंचे। उन्होंने तत्काल एंबुलेंस बुलवाई और तीनों घायलों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) फरह भिजवाया। अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने गोविंद और संकी की हालत बेहद गंभीर देखते हुए उन्हें आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। वहां इलाज के दौरान दोनों ने दम तोड़ दिया।
तीसरा युवक अनिकेत गंभीर रूप से घायल है और उसका इलाज जारी है। डॉक्टरों के अनुसार उसकी हालत नाजुक बनी हुई है। परिवार और मित्र अस्पताल के बाहर उसकी सलामती की दुआ कर रहे हैं।
इस हादसे की खबर जैसे ही गांव लौहवन पहुंची, वहां मातम छा गया। होली के दिन जहां घरों में रंग और पकवानों की तैयारी हो रही थी, वहीं दो परिवारों में चीख-पुकार मच गई। गोविंद और संकी की असमय मौत ने पूरे गांव को झकझोर कर रख दिया। परिजन विश्वास ही नहीं कर पा रहे कि कुछ घंटे पहले तक जो बेटे हंसते-खेलते घर से निकले थे, अब वे कभी लौटकर नहीं आएंगे।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क किनारे इस तरह ईंटों का ढेर खुले में रखना खतरनाक है। यदि वहां चेतावनी संकेत या बैरिकेडिंग होती, तो शायद यह हादसा टल सकता था। कई लोगों ने प्रशासन से सवाल किया है कि मुख्य मार्ग पर निर्माण सामग्री रखने की अनुमति कैसे दी गई और सुरक्षा के इंतजाम क्यों नहीं थे।
पुलिस ने दोनों मृतकों के शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। सीओ रिफाइनरी अनिल कपरवान ने बताया कि दुर्घटना के कारणों की जांच की जा रही है। प्रारंभिक रूप से मामला तेज रफ्तार और बाइक के अनियंत्रित होने का प्रतीत हो रहा है, लेकिन सभी पहलुओं की पड़ताल की जाएगी। यह भी देखा जाएगा कि सड़क किनारे रखी ईंटों के ढेर के संबंध में नियमों का पालन हुआ था या नहीं।
सड़क हादसों के विशेषज्ञों का मानना है कि त्योहारों के दौरान दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ जाती है। लोग जल्दबाजी में या उत्साह में तेज रफ्तार से वाहन चलाते हैं। कई बार हेलमेट न पहनना, तीन लोगों का एक बाइक पर सवार होना और सड़क की स्थिति का सही आकलन न करना भी हादसों की वजह बनता है। हालांकि इस मामले में यह स्पष्ट नहीं है कि तीनों ने हेलमेट पहना था या नहीं।
होली जैसे त्योहार पर हुई इस त्रासदी ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा के मुद्दे को सामने ला खड़ा किया है। नियमों की अनदेखी और लापरवाही कई बार जानलेवा साबित होती है। प्रशासन और नागरिकों, दोनों की जिम्मेदारी है कि ऐसे हादसों को रोकने के लिए सतर्कता बरती जाए।
गांव में शोक का माहौल है। दोनों युवकों के अंतिम संस्कार की तैयारी के बीच लोगों की आंखें नम हैं। हर कोई यही कह रहा है कि काश उस दिन वे घर से न निकले होते, या थोड़ी सावधानी बरती गई होती। लेकिन अब पछतावे के सिवा कुछ शेष नहीं है।
यह हादसा न केवल दो परिवारों के लिए अपूरणीय क्षति है, बल्कि समाज के लिए भी एक चेतावनी है। सड़क पर जरा सी असावधानी या व्यवस्थागत कमी कितनी बड़ी त्रासदी में बदल सकती है, इसका यह दर्दनाक उदाहरण है। प्रशासन ने जांच का आश्वासन दिया है, लेकिन असली जरूरत इस बात की है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
होली के रंग इस बार दो घरों के लिए सदा के लिए फीके पड़ गए। एक घायल युवक अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहा है, जबकि दो दोस्तों की यादें ही अब उनके परिवारों का सहारा हैं। यह घटना सभी को यह सोचने पर मजबूर करती है कि सड़क पर हर कदम संभलकर रखना कितना जरूरी है।
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