फरीदाबाद में ट्रैफिक जांच के दौरान एक चौंकाने वाला मामला सामने आया, जब खुद को हरियाणा पुलिस का एएसआई बताने वाला युवक पुलिस की पकड़ में आ गया। जांच में खुलासा हुआ कि वह न तो एएसआई था और न ही पुलिस विभाग से उसका कोई संबंध था। उसके पास मिला पहचान पत्र भी फर्जी निकला। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया, जहां से उसे एक दिन के रिमांड पर भेजा गया है।

यह घटना बडखल चौक की है, जहां नियमित वाहन चेकिंग अभियान चलाया जा रहा था। ट्रैफिक पुलिस की टीम ने एक ऑल्टो कार को रुकने का इशारा किया। चालक से गाड़ी के कागजात मांगे गए तो उसने आत्मविश्वास के साथ खुद को हरियाणा पुलिस का एएसआई बताया। शुरुआत में वह पुलिसकर्मियों पर रौब जमाने की कोशिश करता रहा, लेकिन जब उससे आधिकारिक पहचान पत्र दिखाने को कहा गया तो उसकी घबराहट साफ नजर आई।
आरोपी ने जो आई-कार्ड पेश किया, वह एएसआई का नहीं बल्कि सिपाही का था। कार्ड की गुणवत्ता और बनावट देखकर पुलिस को शक हुआ। जब कार्ड की बारीकी से जांच की गई, तो पता चला कि वह पूरी तरह से नकली है। इसके बाद युवक से सख्ती से पूछताछ की गई, जिसमें उसने संतोषजनक जवाब नहीं दिया।
आरोपी की पहचान दीपक निवासी गांव अंखीर, फरीदाबाद के रूप में हुई है। उसे पुलिस चौकी सेक्टर-19 की टीम ने मौके पर ही हिरासत में ले लिया। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि वह लंबे समय से खुद को पुलिस अधिकारी बताकर लोगों के सामने रौब दिखाता था। उसने अपनी कार पर आगे और पीछे पुलिस के स्टीकर भी लगा रखे थे, ताकि वह असली पुलिसकर्मी जैसा लगे।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, आरोपी ट्रैफिक चालान से बचने और लोगों पर प्रभाव जमाने के लिए इस फर्जी पहचान का इस्तेमाल करता था। यह भी आशंका जताई जा रही है कि उसने अन्य स्थानों पर भी इस तरह की हरकत की हो सकती है। इसलिए पुलिस अब उसके पिछले रिकॉर्ड और गतिविधियों की जांच कर रही है।
मामले में होमगार्ड की शिकायत पर थाना ओल्ड फरीदाबाद में मुकदमा दर्ज किया गया है। आरोपी को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे एक दिन के पुलिस रिमांड पर लिया गया। रिमांड के दौरान पुलिस यह जानने की कोशिश करेगी कि फर्जी आई-कार्ड किसने बनाया और क्या इस काम में कोई और व्यक्ति शामिल है।
इस घटना ने पुलिस विभाग की पहचान और प्रतीकों के दुरुपयोग को लेकर चिंता बढ़ा दी है। यदि समय रहते आरोपी पकड़ा नहीं जाता, तो वह आगे भी लोगों को गुमराह करता रहता। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि फर्जी पुलिसकर्मी आम लोगों के लिए खतरा बन सकते हैं, क्योंकि वे वर्दी और पहचान का इस्तेमाल कर विश्वास जीत लेते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि पुलिस पहचान पत्रों और आधिकारिक स्टीकर की सुरक्षा प्रणाली को और मजबूत किया जाना चाहिए। डिजिटल सत्यापन और क्यूआर कोड जैसी तकनीकों का उपयोग कर ऐसे मामलों को रोका जा सकता है।
पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि यदि कोई व्यक्ति खुद को पुलिस अधिकारी बताता है और संदेह की स्थिति हो, तो उसकी पहचान की पुष्टि करें। जरूरत पड़ने पर नजदीकी पुलिस स्टेशन से संपर्क किया जा सकता है।
फिलहाल आरोपी से पूछताछ जारी है और उसके मोबाइल फोन व अन्य दस्तावेजों की जांच की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि कहीं उसने किसी अन्य आपराधिक गतिविधि में तो इस फर्जी पहचान का इस्तेमाल नहीं किया।
यह मामला इस बात का उदाहरण है कि कानून का दुरुपयोग करने की कोशिश करने वाले कितनी चालाकी से काम करते हैं, लेकिन सतर्कता और नियमित जांच के चलते उनकी सच्चाई सामने आ जाती है। अब देखना यह है कि जांच में और क्या तथ्य सामने आते हैं और आरोपी पर आगे क्या कानूनी कार्रवाई होती है।
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