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बिहार :: मानव तन बहुत ही दुर्लभ है -अमृता भारती !

वजीरगंज (गया ) मनुष्य तन बहुत ही दुर्लभ है, मनुष्य के रूप में पुनर्जन्म की पुनः प्राप्ति प्रभू की भक्ति से ही सम्भव है ।उक्त बाते वजीरगंज बाजार के माली गली स्थित एसबीआई के उत्तर साइड मैदान के प्रांगण में बुधवार को दिव्य ज्योति जागृति संस्थान ,दिल्ली के तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय श्री रामचरितमानस ज्ञान यज्ञ के प्रथम दिन के प्रवचन के दौरान आशुतोष जी महाराज के परम शिष्या साध्वी सुश्री अमृता भारती ने कही ।उन्होंने कहा कि आज मनुष्य इस वैज्ञानिक युग में विकास के बावजूद सुख एवं आनंद से वंचित है ।जितना विज्ञान विकास कर रहा है मनुष्य उतना ही अपने को दुखदायी महसूस कर रहा है ।उन्होंने कहा की इस आविष्कार एवं विकास से मनुष्य सिर्फ क्षणिक सुख प्राप्त कर पा रहा है ,पूर्ण आनंद नही ।जीवन में पूर्ण आनंद एवं सुखमय जीवन के लिये प्रभु की भक्ति जरूरी है ।प्रभु की भक्ति एवं सत्संग से जीवन की बुराई समाप्त होकर सही दिशा की प्रप्ति होती है।परम शिष्य स्वामी धननंजयानंद ने अपने प्रवचन के दौरान सत्संग की महिमा का बखान करते हुए उपस्थित महिला पुरुष श्रद्धालुओं को सम्बोधित करते हुए कहा कि सत्संग का वास्तविक अर्थ है सत्य के साथ साक्षातकार करना ।संस्थान के आशुतोष महाराज के निर्देशन में भारत के 24राज्यों के जेलों के अंदर कैदी बंधुओं को ब्रह्म ज्ञान देकर आंतरिक परिवर्तन किये है ।उन्हें मानव से महामानव बनाकर समाज के मुख्य जोड़ा गया है ।उन्होंने कहा कि जिस प्रकार भगवान बुद्ध ने अँगुलीमाल डाकू को सत्य का संग कराकर डाकू से बौद्ध भिच्छू बना दिया था ।इसलिये आज हर मनुष्य को सत्य का संग करके आंतरिक बुराई को त्यागकर अच्छा गुण ग्रहण करनी चाहिए ।इस दौरान भक्ति गीत ,संगीत एवं भजन से सैकडों श्रोता झूमते रहे ।इस कार्यक्रम के सफल संचालन में संस्थान के पवन जी ,ममता भारती जी ,खुशबू भारती जी ,श्याम जी की भूमिका सराहनीय रही ।

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