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बिहार :: अभेदानन्द आश्रम बारो में 82वां चार दिवासीय कार्यक्रम का हुआ शुभारंभ

  • आर्य महासम्मेलन, वैदिक महायज्ञ व प्रांतीय कार्यकर्ता गोष्ठी में उमड़ी भीड़
  • देश के कई हिस्से से जुटे आर्य जगत के विद्वान व श्रद्धालुगढ़हरा/बरौनी (बेगूसराय)/संवाददाता: बिहार राज्य आर्य प्रतिनिधि सभा पटना के मार्गदर्शन में जिला आर्य सभा बेगूसराय की ओर से अभेदानन्द आश्रम बारो में आर्य समाज बारो का 82वां चार दिवासीय आर्य महासम्मेलन, वैदिक महायज्ञ एवं प्रांतीय आर्य कार्यकर्ता सेमिनार रविवार को देव यज्ञ से शुभारम्भ हुआ। इसके बाद वैदिक ध्वज पताका फहराया गया। राष्ट्रधर्म से जुड़े संगठन प्रार्थना किया गया। मुख्य अतिथि के रूप में टांडा से आनंद कुमार आर्य, प्रदेश महासभा पटना से रमेश गुप्ता आर्य, बच्चू लाल आर्य, वीरेंद्र आर्य, डा. यूएस प्रसाद, प्रो. रामनारायण शास्त्री आदि थे। आगत अतिथियों का स्वागत डा. अशोक कुमार गुप्ता, जिला अध्यक्ष शिवजी आर्य व जिला मंत्री सुरेंद्र पोद्दार ने किया। मंत्री रविन्द्र नाथ आर्य, कोषाध्यक्ष ओम प्रकाश आर्य, संतोष आर्य, कैलाश आर्य, भुपेंद्र आर्य, शेखर आर्य, पवन पोद्दार, राजन आर्य, राजेन्द्र आर्य, अशोक प्रसाद, सुशील आर्य, नंदकिशोर आर्य, भूदेव आर्य आदि थे। बिहार राज्य आर्य प्रतिनिधि सभा पटना के मंत्री सह वैदिक भजनोपदेशक आचार्य संजय सत्यार्थी ने कहा कि वेद ईश्वर का दिया हुआ ज्ञान है। इसलिए वेद की समस्त शिक्षाएं व्यवहारिक, वैज्ञानिक एवं सृष्टि नियमों के अनुकूल है। 19वीं शताब्दी के मानवतावादी महापुरुष महर्षि दयानंद सरस्वती वेद विद्या के अनुपम जानकार थे। वे विश्व कल्याण की भावना से 1975 में मुंबई महानगर में आर्य समाज की स्थापना की। आर्य समाज अपने जन्मकाल से ही समाज सुधार के सभी क्षेत्रों में क्रांतिकारी कार्य करता रहा है। राजनीतिक पराधीनता, धार्मिक अंधविश्वासों और सभी प्रकार की सामाजिक बुराईयों के विरुद्ध आर्य समाज ने बहुत बड़े स्तर पर काम किया है। उन्होंने कहा कि छुआछूत के भेदभाव को मिटाने और स्त्री शिक्षा से लेकर दलितों को सामाजिक व धार्मिक अधिकार दिलाने के लिए आर्य समाज के कार्यकर्ताओं ने अमानवीय यातनाएं सहन की। समाज में व्याप्त ऐसी कुप्रथाएं कभी भी समाप्त नहीं होती। सत्य, धर्म और वेद विद्या के प्रचार-प्रसार की आवश्यकता हर युग में बनी ही रहती है। समाज हित की भावना से विचारशील सज्जन ऐसे घातक दोषों व दुराचारों के विरुद्ध संघर्ष करते ही रहते हैं। आचार्य सत्यार्थी ने कहा कि अविद्या का नाश और विद्या की वृद्धि करने, सत्य को स्वीकार करने-कराने और असत्य को छोड़ने-छुड़वाने का संकल्प लेकर आर्य समाज आज भी धार्मिक अंधविश्वास व सामाजिक बुराईयों के विरुद्ध अपनी प्रबल आवाज उठाता रहता है। आर्य समाज मूलभूत मान्यताओं व व्यवहारिक शिक्षाओं को लेकर समाज सुधार के कार्य कर रहा है। आर्य समाज अपने विश्व कल्याण के मानवीय अभियान में आपका सक्रिय सहयोग और समर्थन चाहता है। हरियाणा से आए भजनोपदेशिका कुमारी अजंलि आर्या ने कहा कि महर्षि दयानंद की ही देन है कि समाज में नारी को समान अधिकार मिला है अन्यथा इन्हें घर से बाहर निकलना ही मना था। यज्ञ में बैठने व शिक्षा ग्रहण करने का अधिकार दयानंद ने ही दिया है। अजंलि आर्या ने अपने भजनों से श्रद्धालुओं को मुग्ध कर दिया। मंच संचालन आचार्य अरुण प्रकाश आर्य ने किया।

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