मस्तिष्क ज्वर, दिमागी बुखार एवं नवकी बीमारी पर कार्यशाला का आयोजन !

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दरभंगा। समाहरणालय अवस्थित बाबा साहेब डाॅ0 भीमराव अम्बेदकर सभागार में पी0एच0ई0डी0 विभाग के द्वारा मस्तिष्क ज्वर, दिमागी बुखार एवं नवकी बीमारी पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। सर्वप्रथम इन बीमारियों के लक्ष्य मे बारे में बताया गया। इन बीमारियों में तेज बुखार आना एवं लगातार बुखार का बने रहना, शरीर में चमकी होना, दाँत पर दाँत बैठना, पूरे शरीर या किसी खास अंग में ऐंठन होना, बच्चे का सुस्त होना, बच्चे का बेहोश होना, चिउॅटी काटने पर शरीर में कोई हरकत नहीं होना हो सकता है। तत्पश्चात बताया गया कि मास्तिष्क ज्वर, दिमागी बुखार, नवकी बीमारी के बच्चों की पहचान होने पर क्या करना चाहिए। इसमें तेज बुखार होने पर पूरे शरीर को ताजे पानी से पोंछें एवं पंखा से हवा करें ताकि बुखार 100 से कम हो सके, पारासिटामोल की गोली अथवा सीरप मरीज को चिकित्सीय सलाह पर दें, यदि बच्चा बेहोश नहीं है तब साफ एवं पानी योग्य पानी में ओ0आर0एस0 का घोल बनाकर पिलायें, बेहोश, मिर्गी की अवस्था में बच्चा को छायादार एवं हवादार जगह पर लिटाएँ, बच्चे के शरीर से कपड़े हटा लें एवं गर्दन सीधा रखें, बच्चे को कम्बल या गर्म कपड़ों में न लपेटें, बच्चे का नाक बंद नहीं करें, बेहोशी, मुर्गी की अवस्था में बच्चे के मुँह से कुछ भी न दें। चूंकि यह दैविक प्रकोप नहीं है बल्कि अत्याधिक गर्मी एवं नमी के कारण होने वाली बीमारी है। अतः बच्चे के ईलाज में ओझा-गुणी में समय नष्ट न करें। उक्त बैठक में सिविल सर्जन, कार्यपालक अभियंता पी0एच0ई0डी0 रामचन्द्र पाण्डेय, चिकित्सकगण, बाल विकास पदाधिकारी पदाधिकारी, जिला जन सम्पर्क पदाधिकारी कन्हैया कुमार व अन्य पदाधिकारीगण उपस्थित थे।