हिमाचल प्रदेश की राजनीति में सोमवार से हलचल तेज होने जा रही है। Himachal Pradesh Legislative Assembly का बजट सत्र दोपहर दो बजे राज्यपाल Shiv Pratap Shukla के अभिभाषण के साथ शुरू होगा। हालांकि औपचारिक शुरुआत अभिभाषण से होगी, लेकिन सत्र की असली गर्मी राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) के मुद्दे पर देखने को मिल सकती है।

केंद्र सरकार द्वारा आरडीजी बंद किए जाने के फैसले को लेकर प्रदेश की सियासत गरमा गई है। सत्तापक्ष ने पहले ही दिन नियम-102 के तहत इस विषय पर चर्चा कराने का प्रस्ताव दे दिया है, जिसे कार्यसूची में भी शामिल कर लिया गया है। सरकार की मंशा है कि सदन के भीतर इस मुद्दे पर स्पष्ट संदेश दिया जाए और केंद्र से अनुदान बहाली की जोरदार सिफारिश की जाए।
उद्योग एवं संसदीय कार्य मंत्री Harshwardhan Chauhan सदन में सरकारी संकल्प पेश करेंगे। प्रस्ताव में यह कहा जाएगा कि पांचवें से पंद्रहवें वित्त आयोग तक हिमाचल प्रदेश को संविधान के अनुच्छेद 275 और 280 के तहत राजस्व घाटा अनुदान मिलता रहा, लेकिन सोलहवें वित्त आयोग की सिफारिशों के आधार पर इसे आगामी वित्तीय वर्ष से बंद कर दिया गया है। सरकार का दावा है कि इससे राज्य की आर्थिक स्थिति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है और विकास योजनाएं प्रभावित हो सकती हैं।
सत्तापक्ष इस मुद्दे को प्रदेश के हितों से जोड़कर पेश करेगा, जबकि भाजपा सरकार के वित्तीय प्रबंधन पर सवाल उठा सकती है। विपक्ष का रुख आक्रामक रहने की संभावना है। दोनों दलों ने सत्र से पहले अपनी-अपनी रणनीति तय करने के लिए विधायक दलों की बैठकें बुलाई हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पहले ही दिन सदन में तीखी बहस देखने को मिल सकती है।
संभावित टकराव को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष Kuldeep Singh Pathania ने सत्र शुरू होने से पहले सर्वदलीय बैठक बुलाई है। इस बैठक में संसदीय कार्य मंत्री, नेता प्रतिपक्ष और दोनों दलों के मुख्य सचेतक शामिल होंगे। अध्यक्ष ने स्पष्ट किया है कि उनका प्रयास रहेगा कि सदन की कार्यवाही शालीन और सुचारु ढंग से चले।
यह चौदहवीं विधानसभा का ग्यारहवां सत्र और मौजूदा सरकार का चौथा बजट सत्र है। इस बार सत्र के पहले चरण में केवल तीन बैठकें—16, 17 और 18 फरवरी—निर्धारित की गई हैं। हालांकि जरूरत पड़ने पर इसकी अवधि बढ़ाई जा सकती है। कार्यसूची में बजट से जुड़े विषयों के साथ-साथ अन्य महत्वपूर्ण विधेयकों पर भी चर्चा प्रस्तावित है।
राज्यपाल के अभिभाषण के बाद पारंपरिक रूप से शोकोद्गार होगा। इसके बाद सरकार आरडीजी पर चर्चा लाने का प्रयास करेगी। विपक्ष संभव है कि पहले राज्यपाल के अभिभाषण पर विस्तृत चर्चा की मांग करे। ऐसे में कार्यवाही की प्राथमिकता को लेकर विवाद खड़ा हो सकता है और हंगामे की स्थिति बन सकती है।
सत्र में कुछ अहम विधायी प्रस्ताव भी लाए जाएंगे। तकनीकी शिक्षा मंत्री Rajesh Dharmani भू-संपदा (विनियमन और विकास) हिमाचल प्रदेश संशोधन विधेयक 2025 को पुनर्विचार के लिए प्रस्तुत करेंगे। इस संशोधन में रेरा अध्यक्ष की नियुक्ति प्रक्रिया में बदलाव का प्रावधान है, जिसमें चयन पैनल से मुख्य न्यायाधीश को हटाने का प्रस्ताव शामिल है। इस पर पहले भी विवाद हो चुका है और विपक्ष इसे लेकर सवाल उठा सकता है।
इसके अलावा हिमाचल प्रदेश नगर निगम (द्वितीय संशोधन) विधेयक 2025 भी चर्चा के लिए आएगा। इसमें महापौर और उप महापौर के कार्यकाल को बढ़ाकर पांच वर्ष करने का प्रावधान है। सरकार का तर्क है कि लंबा कार्यकाल विकास योजनाओं को निरंतरता देगा, जबकि विपक्ष इसे राजनीतिक लाभ से जोड़ सकता है।
विधानसभा सचिवालय को अब तक 125 प्रश्न प्राप्त हो चुके हैं। इनमें 111 तारांकित और 14 अतारांकित प्रश्न शामिल हैं। ये प्रश्न इंदिरा गांधी प्यारी बहना सुख सम्मान निधि, स्कूलों के विलय, सड़कों और पुलों के निर्माण, विभिन्न विभागों में रिक्त पदों की भर्ती, पर्यटन, पेयजल, नशा नियंत्रण, सौर ऊर्जा और परिवहन जैसी जनहित की योजनाओं से जुड़े हैं। नियम 62 और 101 के तहत दो सूचनाएं ऑनलाइन माध्यम से भी प्राप्त हुई हैं।
कुल मिलाकर, बजट सत्र केवल आर्थिक दस्तावेजों की प्रस्तुति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह केंद्र-राज्य संबंधों, वित्तीय प्रबंधन और नीतिगत प्राथमिकताओं पर व्यापक बहस का मंच बनेगा। राजस्व घाटा अनुदान का मुद्दा सत्र की दिशा तय कर सकता है। यदि पक्ष और विपक्ष के बीच सहमति बनी तो महत्वपूर्ण विधायी कार्य तेजी से पूरे हो सकते हैं, अन्यथा सदन में शोर-शराबा और स्थगन की स्थिति भी बन सकती है।
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