उत्तर प्रदेश के तराई क्षेत्र में जंगली हाथियों का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। ताजा घटना बहराइच जिले के जंगल क्षेत्र से सामने आई है, जहां रविवार देर रात हाथियों के झुंड ने एक कुटिया में घुसकर वहां रह रहे बुजुर्ग पुजारी को कुचल दिया। इस दुखद घटना के बाद आसपास के गांवों में भय और असुरक्षा का माहौल बन गया है।

यह घटना कतर्नियाघाट वन्यजीव अभयारण्य के कोर जोन में स्थित कटियारा बीट क्षेत्र की है। यहां भारत-नेपाल सीमा के निकट घने जंगलों के बीच एक छोटी कुटिया में लगभग 70 वर्षीय पुजारी रहते थे। वे वहीं पूजा-पाठ करते थे और जंगल के बीच एकांत जीवन बिताते थे।
वन विभाग के अनुसार, रविवार रात करीब नौ बजे हाथियों का एक झुंड कुटिया के पास पहुंच गया। पहले हाथियों ने आसपास के क्षेत्र में तोड़फोड़ की, फिर सीधे कुटिया को निशाना बनाया। भारी शरीर वाले जंगली हाथियों ने कुटिया को पलभर में तहस-नहस कर दिया। इसी दौरान अंदर मौजूद पुजारी पर हमला हुआ और उन्हें कुचल दिया गया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
घटना के समय पास ही वन चौकी पर कुछ वनकर्मी मौजूद थे। कुटिया की दिशा से चीख-पुकार और हाथियों की चिंघाड़ सुनकर वे मौके की ओर बढ़े, लेकिन हाथियों के आक्रामक व्यवहार को देखते हुए उन्हें पीछे हटना पड़ा। अधिकारियों का कहना है कि उस समय हाथियों का झुंड अत्यधिक उग्र था और किसी भी तरह का हस्तक्षेप कर्मचारियों की जान को जोखिम में डाल सकता था, इसलिए उन्हें पीछे हटकर सुरक्षित स्थान लेना पड़ा।
जैसे ही घटना की खबर आसपास के गांवों में पहुंची, लोगों में दहशत फैल गई। बर्दिया और आसपास के कई गांवों के ग्रामीण रात भर घरों से बाहर निकलने से डरते रहे। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कुछ समय से हाथियों का झुंड लगातार आबादी के पास आ रहा है, जिससे खेती, घरों और जान-माल को खतरा बढ़ गया है।
वन क्षेत्राधिकारी आशीष गौंड ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम को सक्रिय कर दिया गया है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि रात में घने जंगल और हाथियों की मौजूदगी के कारण तुरंत मौके तक पहुंचना कठिन हो जाता है। सुरक्षा कारणों से टीम हाथियों के दूसरे क्षेत्र में हटने का इंतजार कर रही थी, ताकि बिना जोखिम के घटनास्थल तक पहुंचा जा सके।
अधिकारियों के अनुसार, तराई क्षेत्र में हाथियों की आवाजाही सामान्य है, लेकिन हाल के वर्षों में उनका मानव बस्तियों की ओर बढ़ना चिंता का विषय बन गया है। जंगलों के सिमटने, भोजन की कमी और आवासीय विस्तार के कारण हाथी अक्सर गांवों की ओर रुख कर लेते हैं। इससे मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं बढ़ रही हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि वन विभाग को हाथियों की गतिविधियों पर निगरानी बढ़ानी चाहिए और समय रहते चेतावनी प्रणाली विकसित करनी चाहिए, ताकि ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। ग्रामीणों ने रात में गश्त बढ़ाने, सौर बाड़ लगाने और हाथियों को आबादी से दूर रखने के उपाय करने की मांग की है।
वन विभाग ने आश्वासन दिया है कि क्षेत्र में निगरानी तेज की जाएगी और हाथियों की मूवमेंट पर लगातार नजर रखी जाएगी। साथ ही ग्रामीणों को सतर्क रहने और रात में जंगल की ओर न जाने की सलाह दी गई है।
यह घटना एक बार फिर इस बात का संकेत देती है कि मानव और वन्यजीवों के बीच संतुलन बनाए रखना कितना जरूरी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जंगलों का संरक्षण और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास सुरक्षित नहीं किए गए, तो ऐसे संघर्ष भविष्य में और बढ़ सकते हैं।
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