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कानूनी दबाव के बीच सेंट्रल मार्केट में बढ़ी दरार, व्यापारियों की असहमति से हालात जटिल

Meerut का सेंट्रल मार्केट इन दिनों दोहरी चुनौतियों का सामना कर रहा है। एक तरफ अदालत के आदेश के बाद प्रशासनिक सख्ती तेज हो गई है, तो दूसरी ओर व्यापारियों के बीच नेतृत्व और रणनीति को लेकर खुली असहमति सामने आ गई है। इन हालातों ने बाजार के भविष्य को लेकर असमंजस की स्थिति पैदा कर दी है।

अदालत के आदेश से बढ़ी चिंता

27 जनवरी को Supreme Court of India ने अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए छह सप्ताह के भीतर अवैध निर्माणों पर कार्रवाई के निर्देश दिए थे। आदेश के तहत कुल 1468 निर्माण चिन्हित किए गए हैं, जो मूल रूप से आवासीय भूखंड थे लेकिन वर्तमान में वहां व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं।

इसके बाद Awas Evam Vikas Parishad ने तेजी दिखाते हुए 1200 से अधिक भवन स्वामियों को नोटिस जारी कर दिए। नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि 15 दिनों के भीतर व्यावसायिक गतिविधियां बंद की जाएं, अन्यथा ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी। पिछले कुछ दिनों से बाजार क्षेत्र में लगातार नोटिस चस्पा किए जा रहे हैं, जिससे व्यापारियों में बेचैनी बढ़ गई है।

रणनीति पर बंटे व्यापारी

संकट से निपटने के लिए बुलाई गई आम सभा में एकजुटता की उम्मीद थी, लेकिन बैठक में ही मतभेद खुलकर सामने आ गए। मंच से अनिश्चितकालीन बंद का ऐलान कर दिया गया। साथ ही 21 और 22 फरवरी को शहर बंद रखने की घोषणा की गई, क्योंकि 22 फरवरी को प्रधानमंत्री Narendra Modi का मेरठ दौरा प्रस्तावित है।

हालांकि इस फैसले से सभी व्यापारी सहमत नहीं थे। संयुक्त व्यापार संघ के कुछ वरिष्ठ पदाधिकारियों ने बिना सर्वसम्मति के बंद के निर्णय पर नाराजगी जताई। उनका कहना था कि जल्दबाजी में लिया गया कदम बाजार के हित में नहीं होगा और इससे आम व्यापारियों को नुकसान उठाना पड़ेगा।

मंत्री से मुलाकात और बदला फैसला

उसी रात व्यापारियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने ऊर्जा राज्यमंत्री डॉ. सोमेंद्र तोमर से मुलाकात की। मंत्री ने मामले में सकारात्मक पहल का भरोसा दिलाया। इसके बाद बंद को चार दिन के लिए स्थगित करने का निर्णय लिया गया। लेकिन इस फैसले ने व्यापारियों के बीच और अधिक असंतोष पैदा कर दिया। कुछ लोगों का मानना है कि बार-बार निर्णय बदलने से आंदोलन की गंभीरता कमजोर पड़ती है।

धरना और कारोबार साथ-साथ

बाजार में विभाजन की स्थिति उस समय स्पष्ट दिखी जब एक ओर व्यापारी धरना दे रहे थे, जबकि सामने स्थित कॉम्प्लेक्स में कई दुकानें सामान्य रूप से खुली रहीं। इस विरोधाभासी स्थिति ने बाजार की एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए।

धरने पर बैठे व्यापारियों का तर्क था कि सामूहिक बंद ही प्रशासन पर दबाव बना सकता है। वहीं दुकानें खोलकर बैठे व्यापारी रोजमर्रा की आय का हवाला देते हुए पूर्ण बंद के खिलाफ नजर आए। इस खींचतान ने माहौल को और तनावपूर्ण बना दिया।

पहले भी पड़ चुका है असर

विशेषज्ञों का कहना है कि आंतरिक मतभेदों का असर पहले भी देखने को मिला है। 661/6 के ध्वस्तीकरण को कई लोग बाजार की कमजोर एकजुटता से जोड़कर देख रहे हैं। यदि इस बार भी व्यापारी एकमत नहीं हुए, तो व्यापक कार्रवाई का खतरा बना रहेगा।

प्रशासन का रुख

आवास एवं विकास परिषद का कहना है कि वह अदालत के आदेश का पालन करने के लिए बाध्य है। नोटिस और समय सीमा तय करना कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि तय अवधि के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

आगे की राह

सेंट्रल मार्केट हजारों लोगों की आजीविका का केंद्र है। ऐसे में यह जरूरी है कि व्यापारी भावनात्मक फैसलों के बजाय ठोस और कानूनी रणनीति अपनाएं। आपसी मतभेद छोड़कर सामूहिक रूप से समाधान तलाशना ही बाजार के हित में होगा।

फिलहाल बाजार में अनिश्चितता का माहौल है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि व्यापारी आपसी गुटबाजी को खत्म कर एकजुटता दिखाते हैं या मतभेदों के कारण संकट और गहरा जाता है।

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