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कबाड़ी से अवैध वसूली का आरोप: संभल में एसओजी टीम पर गिरी गाज, प्रभारी समेत आठ पुलिसकर्मी निलंबित

उत्तर प्रदेश में पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करने वाली एक घटना सामने आई है। उत्तर प्रदेश पुलिस के संभल जिले में कबाड़ी से कथित वसूली और दबाव बनाने के आरोप में स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) की पूरी टीम को निलंबित कर दिया गया है। कार्रवाई में टीम प्रभारी सहित आठ पुलिसकर्मी शामिल हैं।

 

यह कार्रवाई तब हुई जब शिकायत की जांच में आरोप सही पाए गए। जिला पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार बिश्नोई ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दिए थे। जांच की जिम्मेदारी क्षेत्राधिकारी आलोक कुमार भाटी को सौंपी गई थी, जिनकी रिपोर्ट के आधार पर रविवार को निलंबन की कार्रवाई की गई।

बाइक रोककर चौकी ले गई थी टीम

मामले के अनुसार, मुरादाबाद के बिलारी निवासी कबाड़ी जफरूद्दीन अपने बेटे आस मोहम्मद के साथ 2 फरवरी की रात कबाड़ लेकर संभल जा रहे थे। बताया गया कि वे मोबाइल प्लेट से संबंधित धातु का सामान लेकर संभल के लाडम सराय क्षेत्र की ओर बढ़ रहे थे।

रास्ते में एसओजी टीम ने उनकी बाइक रोक ली और उन्हें चौधरी सराय पुलिस चौकी ले जाया गया। आरोप है कि वहां दोनों को काफी देर तक रोके रखा गया और बीच-बचाव के बाद उन्हें छोड़ने के लिए 30 हजार रुपये की मांग की गई।

बताया जाता है कि पिता-पुत्र को जाने दिया गया, लेकिन उनके पास मौजूद मोबाइल प्लेट से निकली धातु टीम ने अपने पास रख ली।

धातु लौटाने के बदले भी मांगी रकम

पीड़ितों का आरोप है कि अगले दिन जब उन्होंने टीम से संपर्क कर धातु वापस करने की बात कही, तो पुलिसकर्मियों ने कट्टे में भरी धातु लौटाने के बदले 40 हजार रुपये की अतिरिक्त मांग कर दी। बताया गया कि कट्टे में मौजूद धातु की कीमत भी लगभग इतनी ही थी।

इसके बाद मामला पुलिस अधीक्षक तक पहुंचा। जांच में शिकायत को सही पाया गया, जिसके बाद संबंधित टीम पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई।

प्रभारी समेत आठ कर्मियों पर कार्रवाई

निलंबित किए गए पुलिसकर्मियों में एसओजी प्रभारी उपनिरीक्षक मोहित चौधरी, हेड कांस्टेबल कुलवंत और अरशद के अलावा कांस्टेबल अजनबी, आयुष, विवेक, बृजेश और हिरेश शामिल हैं।

एसपी ने स्पष्ट किया कि प्रारंभिक जांच में ही आरोपों की पुष्टि हो गई थी, इसलिए तुरंत निलंबन का निर्णय लिया गया। साथ ही एसओजी का नया प्रभारी बोबिंद्र शर्मा को नियुक्त किया गया है, ताकि टीम की कार्यप्रणाली में सुधार लाया जा सके।

पहले भी कई मामलों में रही थी नाकामी

जानकारी के अनुसार, निलंबित एसओजी टीम पहले भी कई महत्वपूर्ण मामलों में अपेक्षित परिणाम नहीं दे सकी थी। जुनावई थाना क्षेत्र में भाजपा नेता गुलफाम सिंह की हत्या के मुख्य आरोपी को टीम पकड़ नहीं सकी थी और उसने बाद में कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया था।

इसी तरह धनारी क्षेत्र में दो भाइयों की हत्या का आरोपी लंबे समय तक फरार रहा और अंततः अदालत में पेश हुआ। कैलादेवी थाना क्षेत्र में सात वर्ष की बच्ची के लापता होने के मामले में भी टीम कोई ठोस सुराग नहीं जुटा सकी थी।

स्थानीय पुलिस अधिकारियों का कहना है कि एसओजी का काम गंभीर मामलों में जांच को गति देना और अपराधियों की गिरफ्तारी सुनिश्चित करना होता है। लेकिन लगातार असफलता और अब वसूली के आरोपों ने टीम की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

पुलिस की साख बचाने की कोशिश

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई पुलिस की साख बनाए रखने के लिए जरूरी होती है। संभल पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई यह संकेत देती है कि विभाग भ्रष्टाचार या अनुशासनहीनता को लेकर सख्त रुख अपना रहा है।

पुलिस अधीक्षक ने कहा है कि विभाग में पारदर्शिता बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी कर्मचारी को गलत आचरण की छूट नहीं दी जाएगी।

आगे की जांच जारी

सूत्रों के अनुसार, निलंबन के बाद विभागीय जांच भी शुरू की जा सकती है, जिसमें यह देखा जाएगा कि वसूली के आरोप किस स्तर तक सही हैं और क्या अन्य लोग भी इसमें शामिल थे।

इस कार्रवाई ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि कानून का पालन कराने वाली एजेंसियों के लिए भी कानून से ऊपर कोई नहीं है।

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