उत्तर भारत समेत देश के कई हिस्सों में मौसम ने एक बार फिर करवट ले ली है। हिमालयी क्षेत्रों में सक्रिय हुए पश्चिमी विक्षोभ के कारण पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी और मैदानी क्षेत्रों में बारिश का दौर शुरू हो गया है। मौसम विभाग के अनुसार 18 से 20 मार्च के बीच उत्तर-पश्चिम भारत के कई राज्यों में गरज के साथ बारिश, तेज हवाएं और कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि की संभावना बनी हुई है। इस मौसम बदलाव से तापमान में भी गिरावट दर्ज की जा रही है, जिससे लोगों को फिर से हल्की ठंड का एहसास होने लगा है।

भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में सक्रिय हुए नए पश्चिमी विक्षोभ का असर जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के साथ-साथ पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक देखने को मिल रहा है। पिछले 24 घंटों के दौरान कई राज्यों में कहीं हल्की तो कहीं मध्यम बारिश दर्ज की गई है, जबकि कुछ क्षेत्रों में ओलावृष्टि भी हुई है।
मौसम विभाग के सोमवार सुबह 8:30 बजे तक के आंकड़ों के अनुसार हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, झारखंड और पूर्वोत्तर के कई राज्यों में अलग-अलग स्थानों पर बारिश और ओलावृष्टि देखने को मिली। इस दौरान कई जगहों पर तेज हवाएं भी चलीं, जिससे मौसम अचानक ठंडा हो गया।
पूर्वोत्तर भारत के कई हिस्सों में भारी बारिश दर्ज की गई है। उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम, असम और मेघालय में कुछ स्थानों पर 7 से 20 सेंटीमीटर तक बारिश हुई है। वहीं अरुणाचल प्रदेश और मिजोरम में भी 7 से 11 सेंटीमीटर तक वर्षा दर्ज की गई है। पश्चिम बंगाल के कोलकाता और मालदा जिलों में तेज हवाएं चलीं, जिनकी रफ्तार 50 से 65 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच गई।
हिमाचल प्रदेश में बर्फबारी के कारण कई स्थानों पर जनजीवन प्रभावित हुआ है। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में लगातार बर्फ गिरने से सड़कें बंद हो गईं और तापमान में काफी गिरावट दर्ज की गई। मनाली-लेह मार्ग पर भारी बर्फबारी के कारण करीब 1,500 वाहनों में फंसे लगभग 10 हजार पर्यटकों और स्थानीय लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। प्रशासन और राहत टीमों ने रोहतांग टनल के रास्ते सभी लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया।
बताया जा रहा है कि रविवार रात इन लोगों को कड़ाके की ठंड में गाड़ियों के अंदर ही रात गुजारनी पड़ी। हालांकि प्रशासन और स्थानीय टीमों ने लगातार राहत और बचाव कार्य चलाकर सभी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
जम्मू-कश्मीर में भी मौसम का असर साफ तौर पर दिखाई दिया। किश्तवाड़ जिले के सिंथन टॉप इलाके में रविवार रात भारी बर्फबारी के कारण कई वाहन और यात्री फंस गए थे। भारतीय सेना के जवानों ने राहत अभियान चलाकर करीब 235 लोगों और 38 वाहनों को सुरक्षित बाहर निकाला। सेना की व्हाइट नाइट कोर की टीम ने लोगों को गर्म भोजन, पीने का पानी और अस्थायी ठहरने की सुविधा भी उपलब्ध कराई।
इसी बीच जम्मू-कश्मीर के डांगदुरु क्षेत्र में भूस्खलन की घटना भी सामने आई है। इस घटना के बाद एक व्यक्ति लापता हो गया, जिसकी तलाश के लिए बचाव दल लगातार अभियान चला रहे हैं। हालांकि सोमवार तक उसका कोई सुराग नहीं मिल पाया है।
उत्तराखंड में भी मौसम ने अचानक करवट ली है। राज्य के सीमांत जिलों में रविवार रात से मौसम में बदलाव देखा गया। ऊंचाई वाले इलाकों में भारी हिमपात हुआ, जबकि निचले क्षेत्रों में गरज के साथ तेज बारिश हुई। इस कारण तापमान में गिरावट आई और ठंड का असर फिर से महसूस होने लगा।
मुनस्यारी क्षेत्र के खलिया टॉप, पंचाचूली, हंसलिंग, नाग्निधुरा और छिपलाकेदार की पहाड़ियां बर्फ की सफेद चादर से ढक गई हैं। बर्फबारी के कारण यहां के प्राकृतिक दृश्य बेहद खूबसूरत हो गए हैं, लेकिन स्थानीय लोगों को ठंड और रास्तों की कठिनाइयों का सामना भी करना पड़ रहा है।
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से अगले कुछ दिनों तक उत्तर भारत के कई हिस्सों में मौसम अस्थिर बना रह सकता है। इस दौरान बादल छाए रहने, गरज के साथ बारिश होने और तेज हवाएं चलने की संभावना बनी रहेगी। कुछ स्थानों पर ओले गिरने की भी आशंका है, जिससे किसानों को नुकसान हो सकता है।
विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि वे मौसम की स्थिति को ध्यान में रखते हुए अपनी फसलों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाएं। खासकर जिन क्षेत्रों में गेहूं और सरसों की फसल तैयार हो रही है, वहां ओलावृष्टि और तेज हवाएं नुकसान पहुंचा सकती हैं।
मौसम विभाग के अनुसार इस पश्चिमी विक्षोभ का असर 20 मार्च तक बना रह सकता है। इसके बाद मौसम धीरे-धीरे सामान्य होने की संभावना है। हालांकि इस बीच उत्तर भारत के कई इलाकों में तापमान सामान्य से कुछ कम रह सकता है।
मौसम में आए इस बदलाव के कारण जहां पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी ने पर्यटकों को आकर्षित किया है, वहीं दूसरी ओर कई जगहों पर जनजीवन भी प्रभावित हुआ है। प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर राहत एवं बचाव कार्य भी जारी रखे जा रहे हैं।
कुल मिलाकर कहा जाए तो पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से देश के कई हिस्सों में मौसम ने अचानक करवट ले ली है। आने वाले दो से तीन दिनों तक बारिश, तेज हवाएं और ओलावृष्टि का दौर जारी रहने की संभावना है, जिससे लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है।
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