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राज्यकर्मी का दर्जा देने की मांग पर दरभंगा में डाटा एंट्री ऑपरेटरों का रोड मार्च, सरकार को दी आंदोलन की चेतावनी

सौरभ शेखर श्रीवास्तव की ब्यूरो रिपोर्ट दरभंगा। बिहार राज्य डाटा एंट्री ऑपरेटर संयुक्त मोर्चा के आह्वान पर रविवार, 1 नवंबर 2026 को दरभंगा में डाटा एंट्री ऑपरेटरों एवं अन्य संविदा कर्मियों ने अपनी एक प्रमुख मांग को लेकर जोरदार रोड मार्च निकाला। बेल्ट्रॉन के माध्यम से राज्य के विभिन्न सरकारी विभागों एवं कार्यालयों में कार्यरत डाटा एंट्री ऑपरेटर, प्रोग्रामर, स्टेनोग्राफर तथा आईटी ब्वॉयज एवं गर्ल्स को राज्यकर्मी का दर्जा देने की मांग को लेकर आयोजित इस मार्च में बड़ी संख्या में कर्मियों ने हिस्सा लिया।

  • दरभंगा जिला इकाई के जिलाध्यक्ष जय प्रकाश मेहता एवं सचिव सुनील कुमार के नेतृत्व में निकाला गया रोड मार्च
  • 25 वर्षों से सरकारी विभागों में सेवा दे रहे बेल्ट्रॉन कर्मियों ने उठाई आवाज
  • मुख्यमंत्री और सूचना प्रावैधिकी मंत्री के नाम डीएम को सौंपा ज्ञापन

दरभंगा जिला इकाई के जिलाध्यक्ष जय प्रकाश मेहता एवं सचिव सुनील कुमार के नेतृत्व में निकाला गया रोड मार्च पोलो मैदान स्थित धरना स्थल से शुरू हुआ। इसके बाद प्रदर्शनकारी समाहरणालय होते हुए लहेरियासराय टावर और लोहिया चौक तक पहुंचे। इस दौरान कर्मियों ने अपनी मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद की और राज्य सरकार से वर्षों से लंबित मांग पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की।

 

रोड मार्च के माध्यम से कर्मियों ने स्पष्ट संदेश दिया कि लंबे समय से सरकारी विभागों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों का निर्वहन करने के बावजूद उन्हें अब तक राज्यकर्मी का दर्जा नहीं मिल पाया है। संयुक्त मोर्चा ने इसे कर्मियों के भविष्य, सेवा सुरक्षा और सम्मान से जुड़ा विषय बताते हुए सरकार से इस दिशा में ठोस पहल करने की मांग की।

25 वर्षों से सरकारी विभागों में दे रहे हैं अपनी सेवाएं

रोड मार्च को संबोधित करते हुए जिलाध्यक्ष जय प्रकाश मेहता ने कहा कि बेल्ट्रॉन के माध्यम से पिछले लगभग 25 वर्षों से बिहार के विभिन्न सरकारी विभागों एवं कार्यालयों में करीब 20 हजार डाटा एंट्री ऑपरेटर और अन्य कर्मी अपनी सेवाएं दे रहे हैं। ये सभी कर्मी सरकारी कार्यालयों के दैनिक कामकाज को सुचारू रूप से संचालित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

 

उन्होंने कहा कि डाटा एंट्री ऑपरेटरों के जिम्मे केवल कंप्यूटर पर डाटा एंट्री का कार्य ही नहीं है, बल्कि विभागीय टंकण, लिपिकीय कार्यों, ऑनलाइन सेवाओं, आईटी से संबंधित कार्यों और विभिन्न सरकारी योजनाओं से जुड़े तकनीकी कार्यों का निष्पादन भी है।

 

विभिन्न सरकारी कार्यालयों में इन कर्मियों की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है। सरकारी कामकाज के डिजिटल होने के साथ ही इनकी जिम्मेदारियों और कार्यक्षेत्र में भी विस्तार हुआ है। इसके बावजूद वर्षों से सेवा दे रहे इन कर्मियों को स्थायी सेवा सुरक्षा एवं राज्यकर्मी का दर्जा नहीं मिलना चिंता का विषय है।

 

स्थायी प्रकृति के कार्यों का कर रहे हैं निष्पादन

जिलाध्यक्ष ने कहा कि पूर्व में टंकण शाखा के अंतर्गत संचालित कई पद अब समाप्तप्राय हो चुके हैं। उन पदों से संबंधित कार्यों का दायित्व भी वर्तमान में डाटा एंट्री ऑपरेटरों द्वारा ही निभाया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि सरकारी विभागों में टंकण, लिपिकीय और आईटी से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्य इन कर्मियों के माध्यम से नियमित रूप से कराए जा रहे हैं। इससे स्पष्ट है कि इनकी सेवाएं अस्थायी या सीमित प्रकृति की नहीं, बल्कि सरकारी व्यवस्था के नियमित संचालन के लिए आवश्यक हो चुकी हैं।

 

संयुक्त मोर्चा का कहना है कि जब कर्मियों से वर्षों से स्थायी प्रकृति के कार्य लिए जा रहे हैं और वे विभागों की आवश्यकताओं के अनुरूप अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे हैं, तो उन्हें राज्यकर्मी का दर्जा प्रदान किया जाना न्यायसंगत है।

 

दक्षता परीक्षा और प्रशिक्षण का भी दिया हवाला

जय प्रकाश मेहता ने कहा कि बेल्ट्रॉन के माध्यम से कार्यरत कर्मियों की दक्षता परीक्षा भी ली जा चुकी है। इसके अतिरिक्त बिपार्ड के माध्यम से उन्हें आवासीय संस्थागत प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद सभी संबंधित कर्मियों को प्रमाण-पत्र भी उपलब्ध कराया गया है।

 

उन्होंने सवाल उठाया कि जब कर्मियों की दक्षता का मूल्यांकन किया जा चुका है, उन्हें विधिवत प्रशिक्षण दिया गया है और वे लंबे समय से सरकारी विभागों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, तो फिर उन्हें राज्यकर्मी का दर्जा देने में देरी क्यों हो रही है?

 

उन्होंने सरकार से मांग की कि इन सभी पहलुओं पर गंभीरता से विचार करते हुए कर्मियों के हित में शीघ्र निर्णय लिया जाए।

राज्यकर्मी का दर्जा देने से अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ने का दावा

संयुक्त मोर्चा ने अपनी मांग के समर्थन में आर्थिक पहलू को भी सामने रखा। जिलाध्यक्ष ने कहा कि वर्तमान व्यवस्था में कर्मियों के मासिक पारिश्रमिक के अतिरिक्त सेवा शुल्क और जीएसटी मद में भी राशि का भुगतान किया जा रहा है।

उनका दावा है कि यदि बेल्ट्रॉन के माध्यम से कार्यरत कर्मियों को राज्यकर्मी का दर्जा प्रदान किया जाता है, तो सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान भुगतान व्यवस्था और सेवा प्रदाता के माध्यम से होने वाले खर्च का समुचित आकलन कर सरकार इस मांग पर सकारात्मक निर्णय ले सकती है।

संयुक्त मोर्चा का मानना है कि इससे एक ओर कर्मियों को सम्मानजनक सेवा सुरक्षा मिलेगी, वहीं दूसरी ओर सरकारी कार्यालयों में कार्यरत अनुभवी और प्रशिक्षित मानव संसाधन का बेहतर उपयोग भी संभव होगा।

 

सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों का दिया हवाला

रोड मार्च के दौरान संयुक्त मोर्चा के नेताओं ने सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न आदेशों का हवाला देते हुए लंबे समय से बाह्य सेवा प्रदाता के माध्यम से कार्यरत कर्मियों की सेवा के समायोजन की मांग भी उठाई।

 

उन्होंने कहा कि वर्षों से सरकारी विभागों में लगातार काम कर रहे कर्मियों के भविष्य को लेकर सरकार को संवेदनशील होना चाहिए। लंबे समय तक सेवा देने वाले कर्मियों को उचित सेवा सुरक्षा और सम्मान मिलना आवश्यक है।

 

मोर्चा ने इस मामले में कानूनी पहलुओं पर भी गंभीरता से विचार करते हुए कर्मियों के हित में नीतिगत निर्णय लेने की मांग की।

 

मुख्यमंत्री और सूचना प्रावैधिकी मंत्री के नाम डीएम को सौंपा ज्ञापन

रोड मार्च समाप्त होने के बाद बिहार राज्य डाटा एंट्री ऑपरेटर संयुक्त मोर्चा के जिलाध्यक्ष जय प्रकाश मेहता, सचिव सुनील कुमार एवं अन्य प्रतिनिधियों ने जिला पदाधिकारी, दरभंगा को ज्ञापन सौंपा।

 

यह ज्ञापन बिहार के मुख्यमंत्री एवं सूचना प्रावैधिकी विभाग के मंत्री के नाम संबोधित था। ज्ञापन के माध्यम से राज्य सरकार तक कर्मियों की मांगों और समस्याओं को पहुंचाते हुए शीघ्र समाधान की अपील की गई।

 

ज्ञापन में प्रमुख रूप से बेल्ट्रॉन के माध्यम से नियुक्त एवं विभिन्न सरकारी विभागों में कार्यरत डाटा एंट्री ऑपरेटर, प्रोग्रामर, स्टेनोग्राफर तथा आईटी ब्वॉयज एवं गर्ल्स को राज्यकर्मी का दर्जा प्रदान करने की मांग की गई।

 

इसके साथ ही सूचना प्रावैधिकी विभाग, बिहार को इस पूरी व्यवस्था के लिए नोडल विभाग घोषित करने की मांग भी रखी गई, ताकि कर्मियों से संबंधित नीतिगत निर्णय, सेवा व्यवस्था और अन्य आवश्यक प्रक्रियाओं का संचालन एक निर्धारित विभाग के माध्यम से हो सके।

 

मांग पूरी नहीं हुई तो चरणबद्ध आंदोलन की चेतावनी

संयुक्त मोर्चा के सचिव सुनील कुमार ने राज्य सरकार से कर्मियों की मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय लेने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन किसी व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं, बल्कि वर्षों से सरकारी व्यवस्था में अपनी सेवाएं दे रहे हजारों कर्मियों के भविष्य और सम्मान से जुड़ा है।

 

उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार उनकी एकमात्र प्रमुख मांग को गंभीरता से नहीं लेती है और शीघ्र समाधान की दिशा में पहल नहीं करती है, तो संयुक्त मोर्चा आने वाले दिनों में चरणबद्ध आंदोलन करने को बाध्य होगा।

 

इस आंदोलन के तहत महाधरना, काला बिल्ला लगाकर विरोध प्रदर्शन और हड़ताल जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि आंदोलन के कारण सरकारी कार्यालयों के कार्य प्रभावित होने की आशंका है, जिसकी जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी।

 

सचिव ने कहा कि कर्मी शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग सरकार के समक्ष रख रहे हैं। सरकार को चाहिए कि उनकी समस्याओं को समझते हुए जल्द से जल्द उचित निर्णय ले, ताकि कर्मियों को आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर न होना पड़े।

 

बड़ी संख्या में कर्मियों ने लिया हिस्सा

दरभंगा में आयोजित इस रोड मार्च में बिहार राज्य डाटा एंट्री ऑपरेटर संयुक्त मोर्चा के जिला एवं विभिन्न कार्यालयों में कार्यरत कर्मियों की बड़ी भागीदारी रही।

इस अवसर पर संयुक्त मोर्चा के सचिव सुनील कुमार मेहता, जिलाध्यक्ष जय प्रकाश मेहता, मीडिया प्रभारी मनीष आनंद, अजय कुमार यादव, वृन्द कुमार झा, रेशाद अहमद कादरी, संतोष कुमार देव, चंद्रशेखर कुमार, खगेंद्र यादव, मृत्युंजय कुमार पूर्वे, विशाल कुमार, सुरेश कुमार शर्मा, अरविंद कुमार, बमबम कुमार, राजेश कुमार, अशोक कुमार, प्रवीण राज, पिंकू कुमार, रंजीत कुमार ठाकुर, रोहित कुमार सिंह, दयाशंकर प्रसाद, गुड्डू कुमार पासवान, अभय कुमार, सुनील कुमार सिंह, जय जय राम कुमार ठाकुर, अतुल कुमार शर्मा, दीपक कुमार, दशरथ कुमार यादव, मनोज कुमार यादव, राजीव कुमार, प्रीति भारती, आयुषी प्रियदर्शी, पूनम कुमारी, प्रियंका कुमारी, संगीता कुमारी, अर्पिता मिश्रा, विकेश कुमार, ललन झा, कुमार विशाल, अमित कुमार, दर्शन कुमार दास, विनोद गिरि, अब्दुल रहमान, इरशाद अली, राधा कुमारी, सूर्य कामत सहित सैकड़ों कर्मी उपस्थित थे।

सरकार के फैसले पर टिकी हजारों कर्मियों की निगाहें

दरभंगा में निकाले गए इस रोड मार्च के माध्यम से डाटा एंट्री ऑपरेटरों ने एक बार फिर अपनी मांग को राज्य सरकार के सामने मजबूती से रखा है। लगभग 25 वर्षों से सरकारी विभागों में सेवाएं दे रहे करीब 20 हजार कर्मियों को राज्यकर्मी का दर्जा देने की मांग अब एक बड़े कर्मचारी आंदोलन का रूप लेती दिखाई दे रही है।

संयुक्त मोर्चा ने फिलहाल ज्ञापन सौंपकर सरकार से सकारात्मक पहल की अपेक्षा जताई है। हालांकि, मांग पूरी नहीं होने की स्थिति में आंदोलन को और व्यापक बनाने की चेतावनी भी दी गई है।

अब देखना होगा कि राज्य सरकार इन कर्मियों की मांग पर क्या रुख अपनाती है और वर्षों से लंबित इस मुद्दे के समाधान की दिशा में कब तक कोई ठोस निर्णय लिया जाता है।

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