सौरभ शेखर श्रीवास्तव की ब्यूरो रिपोर्ट दरभंगा। दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में आगामी चुनाव को लेकर राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियां तेज होने लगी हैं। इसी क्रम में शिक्षाविद डॉ. धर्मांश रंजन उर्फ अंकुर ने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव मैदान में उतरने की घोषणा की है। डॉ. रंजन के चुनावी मैदान में उतरने की घोषणा के साथ ही स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में संभावित प्रत्याशियों और चुनावी मुद्दों को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।

- दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में चुनावी हलचल तेज, शिक्षाविद डॉ. धर्मांश रंजन ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में उतरने का किया ऐलान
- 15 वर्षों से होली मिशन ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के संचालक हैं डॉ धर्मांश रंजन ‘अंकुर’
- होली मिशन ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस करीब 40 वर्षों से शिक्षा के क्षेत्र में कार्य कर रहा है
डॉ. धर्मांश रंजन के अनुसार, उन्होंने चुनाव की तैयारी काफी पहले से शुरू कर दी थी। पिछले करीब दो वर्षों से वह दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के विभिन्न इलाकों में लगातार जनसंपर्क अभियान चला रहे हैं। इस दौरान उन्होंने दरभंगा के अलावा मधुबनी, समस्तीपुर और बेगूसराय के विभिन्न क्षेत्रों का दौरा कर स्नातक मतदाताओं, शिक्षकों, विद्यार्थियों और स्थानीय लोगों से संवाद किया है।

उनका कहना है कि चुनाव केवल राजनीतिक प्रतिनिधित्व का माध्यम नहीं बल्कि क्षेत्र के स्नातकों, शिक्षकों और विद्यार्थियों की समस्याओं को उचित मंच तक पहुंचाने का अवसर भी है। इसी उद्देश्य से उन्होंने क्षेत्र में लगातार संपर्क अभियान चलाकर शिक्षा और रोजगार समेत विभिन्न मुद्दों को समझने का प्रयास किया है।

शिक्षा क्षेत्र में अनुभव का दिया हवाला
चुनाव में उतरने की घोषणा करते हुए डॉ. धर्मांश रंजन ने शिक्षा के क्षेत्र में अपने अनुभव का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि होली मिशन ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस करीब 40 वर्षों से शिक्षा के क्षेत्र में कार्य कर रहा है।
डॉ. रंजन के अनुसार, वह स्वयं पिछले लगभग 15 वर्षों से संस्थाओं की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में लंबे समय तक कार्य करने के अनुभव को अपनी प्रमुख पृष्ठभूमि के तौर पर सामने रखा है।
उनका कहना है कि शिक्षा क्षेत्र में काम करने के दौरान उन्हें विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों की विभिन्न आवश्यकताओं को करीब से समझने का अवसर मिला है। इसी अनुभव के आधार पर वह स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से जुड़े शैक्षणिक मुद्दों को व्यापक स्तर पर उठाना चाहते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में किए गए कार्यों के लिए उन्हें देश-विदेश में विभिन्न सम्मान प्राप्त हुए हैं। हालांकि इन सम्मानों और उपलब्धियों का विस्तृत विवरण उन्होंने इस घोषणा के दौरान सार्वजनिक रूप से साझा नहीं किया।

उच्च शिक्षा को लेकर विशेष जोर
डॉ. धर्मांश रंजन ने अपने संभावित चुनावी एजेंडे में उच्च शिक्षा को प्रमुख मुद्दा बताया है। उनका कहना है कि स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से जुड़े विद्यार्थियों और युवाओं के लिए उच्च शिक्षा के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना आवश्यक है।
उन्होंने कॉलेजों में स्नातकोत्तर यानी PG की पढ़ाई के विस्तार और आवश्यक शैक्षणिक सुविधाओं को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया है। उनके अनुसार, कई विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए दूसरे शहरों की ओर जाना पड़ता है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा की व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में काम किए जाने की जरूरत है।
डॉ. रंजन ने कॉलेजों में पर्याप्त संख्या में शिक्षकों की नियुक्ति, बेहतर प्रयोगशालाओं की उपलब्धता और जरूरी शैक्षणिक संसाधनों को भी महत्वपूर्ण मुद्दा बताया है। उनका कहना है कि किसी भी शिक्षण संस्थान की गुणवत्ता केवल भवन या नाम से तय नहीं होती, बल्कि वहां उपलब्ध शिक्षकों, प्रयोगशालाओं, पुस्तकालयों, अध्ययन सामग्री और नियमित कक्षाओं की व्यवस्था से तय होती है।

नियमित पढ़ाई और शैक्षणिक संसाधनों पर जोर
डॉ. रंजन के अनुसार, कॉलेजों में नियमित पढ़ाई सुनिश्चित करना भी उनकी प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को समय पर कक्षाएं, गुणवत्तापूर्ण शिक्षण और आवश्यक अध्ययन सामग्री मिलना उनकी शैक्षणिक प्रगति के लिए जरूरी है।
उन्होंने कॉलेजों में प्रयोगशालाओं को आधुनिक बनाने, विद्यार्थियों को आवश्यक उपकरण और संसाधन उपलब्ध कराने तथा शैक्षणिक वातावरण को बेहतर बनाने की बात कही है। साथ ही खेल सुविधाओं के विकास को भी उन्होंने आवश्यक बताया।
उनका कहना है कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए केवल पाठ्यक्रम आधारित शिक्षा पर्याप्त नहीं है। खेल, सांस्कृतिक गतिविधियां, व्यक्तित्व विकास और अन्य सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों के लिए भी संस्थानों में पर्याप्त अवसर उपलब्ध होने चाहिए।
विद्यार्थियों के लिए लाइब्रेरी और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी
डॉ. धर्मांश रंजन ने छात्रों के लिए बेहतर लाइब्रेरी व्यवस्था को भी प्रमुख मुद्दों में शामिल किया है। उनका कहना है कि कॉलेजों और उच्च शिक्षण संस्थानों में ऐसी लाइब्रेरी होनी चाहिए जहां विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम की पुस्तकों के साथ-साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी से संबंधित अध्ययन सामग्री भी उपलब्ध हो।
उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों के लिए बेहतर शैक्षणिक वातावरण और मार्गदर्शन की आवश्यकता बताई। उनके अनुसार, बड़ी संख्या में युवा सरकारी एवं अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, लेकिन उन्हें गुणवत्तापूर्ण अध्ययन सामग्री, मार्गदर्शन और संसाधनों के लिए बड़े शहरों का रुख करना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर पुस्तकालय, अध्ययन केंद्र, डिजिटल संसाधन और मार्गदर्शन की व्यवस्था को मजबूत किया जाए तो विद्यार्थियों को काफी मदद मिल सकती है।
रोजगार और कौशल विकास भी एजेंडे में
शिक्षा के साथ रोजगार और कौशल विकास को भी डॉ. रंजन ने महत्वपूर्ण मुद्दा बताया है। उनके अनुसार, आज के समय में केवल डिग्री हासिल करना पर्याप्त नहीं है। विद्यार्थियों और युवाओं को रोजगार की बदलती जरूरतों के अनुरूप कौशल प्रदान करना भी जरूरी है।
उन्होंने युवाओं के लिए कौशल विकास, रोजगार के अवसर और करियर मार्गदर्शन को मजबूत करने की बात कही। उनका कहना है कि उच्च शिक्षा के साथ-साथ विद्यार्थियों को यह जानकारी भी मिलनी चाहिए कि उनके लिए विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार और स्वरोजगार के कौन-कौन से अवसर उपलब्ध हैं।
डॉ. रंजन के अनुसार, शिक्षा और रोजगार को अलग-अलग विषयों के रूप में देखने के बजाय दोनों को एक-दूसरे से जोड़कर देखना आवश्यक है। शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थियों को उनके भविष्य के करियर के लिए तैयार करने की दिशा में भी प्रयास किए जाने चाहिए।

दो वर्षों से क्षेत्र में जनसंपर्क का दावा
डॉ. धर्मांश रंजन के मुताबिक, चुनाव की तैयारी अचानक शुरू नहीं की गई है। उन्होंने बताया कि पिछले करीब दो वर्षों से वह क्षेत्र में लगातार जनसंपर्क कर रहे हैं।
इस दौरान दरभंगा, मधुबनी, समस्तीपुर और बेगूसराय के विभिन्न क्षेत्रों में जाकर स्नातक मतदाताओं, शिक्षकों, विद्यार्थियों और स्थानीय लोगों से संवाद किया गया। उनका कहना है कि इस संपर्क अभियान के दौरान उन्हें क्षेत्र की शिक्षा व्यवस्था, रोजगार और युवाओं से जुड़े विभिन्न विषयों को समझने का अवसर मिला।
डॉ. रंजन ने कहा कि चुनाव के दौरान केवल वादे करने के बजाय क्षेत्र के लोगों से संवाद करना और उनकी प्राथमिकताओं को समझना आवश्यक है। इसी सोच के साथ उन्होंने लंबे समय से लोगों के बीच जाकर संपर्क बनाए रखने की बात कही है।
समाज के लिए काम करने की बात
डॉ. धर्मांश रंजन ने कहा कि समाज के लिए जो भी बेहतर कार्य संभव होगा, उसके लिए वह पूरी तरह तैयार हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा, रोजगार, शिक्षक और समाज की शैक्षणिक जरूरतों से जुड़े विषयों पर वह गंभीरता से काम करना चाहते हैं।

उन्होंने कहा कि यदि उन्हें अवसर मिलता है तो वह शिक्षा और सामाजिक विकास से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता के साथ उठाएंगे तथा क्षेत्र के लोगों के साथ कदम से कदम मिलाकर काम करेंगे।
उनके अनुसार, जनप्रतिनिधि की भूमिका केवल चुनाव जीतने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि क्षेत्र के लोगों की समस्याओं को लगातार संबंधित मंचों तक पहुंचाने और उनके समाधान के लिए प्रयास करने की होनी चाहिए।

अक्टूबर के पहले सप्ताह में नामांकन की तैयारी
डॉ. धर्मांश रंजन ने बताया कि वह अक्टूबर के पहले सप्ताह में अपना नामांकन दाखिल करने की तैयारी कर रहे हैं। नामांकन के बाद उनके चुनावी अभियान की औपचारिक गतिविधियां और तेज होने की संभावना है।
निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव मैदान में उतरने की घोषणा के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि चुनावी मैदान में अन्य कौन-कौन से प्रत्याशी सामने आते हैं। राजनीतिक दलों और अन्य संभावित उम्मीदवारों की स्थिति स्पष्ट होने के बाद चुनावी मुकाबले की तस्वीर भी अधिक स्पष्ट होगी।

दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव मुख्य रूप से स्नातक मतदाताओं से जुड़ा होने के कारण शिक्षा, रोजगार, विश्वविद्यालय एवं कॉलेजों से संबंधित समस्याएं स्वाभाविक रूप से चर्चा के केंद्र में रहती हैं। ऐसे में डॉ. धर्मांश रंजन ने जिन मुद्दों को सामने रखा है, उनमें उच्च शिक्षा, PG की पढ़ाई, शिक्षकों की नियुक्ति, प्रयोगशाला, पुस्तकालय, खेल सुविधाएं, नियमित कक्षाएं, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, रोजगार और कौशल विकास जैसे विषय शामिल हैं।
आने वाले दिनों में विभिन्न प्रत्याशियों के सामने आने और उनके मुद्दों के सार्वजनिक होने के साथ ही यह भी स्पष्ट होगा कि चुनावी विमर्श किन प्रमुख विषयों के इर्द-गिर्द आगे बढ़ता है। फिलहाल डॉ. धर्मांश रंजन ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में उतरने की घोषणा कर अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत का संकेत दे दिया है।
अब नजर अक्टूबर के पहले सप्ताह में होने वाले संभावित नामांकन और उसके बाद शुरू होने वाले चुनावी अभियान पर रहेगी। नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रत्याशियों की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी और स्नातक मतदाताओं के बीच शिक्षा, रोजगार तथा क्षेत्रीय शैक्षणिक विकास से जुड़े मुद्दों पर चर्चा और तेज होने की संभावना है।

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