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खादी मेले में कारीगरों को मिला नया सहारा, 206 मशीनें बांटी गईं

ग्रामीण उद्योग और स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने की दिशा में एक अहम पहल करते हुए खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग ने सेक्टर-12 में संयुक्त राज्य स्तरीय खादी मार्केटिंग व पीएमईजीपी प्रदर्शनी का आयोजन किया। इस अवसर पर 206 मशीनें और विभिन्न टूलकिट कारीगरों को वितरित की गईं। कार्यक्रम का उद्देश्य कारीगरों को आधुनिक संसाधनों से जोड़ना और उनकी आजीविका को सशक्त बनाना रहा।

इस प्रदर्शनी का आयोजन खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) द्वारा सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्यम मंत्रालय के सहयोग से किया गया। उद्घाटन समारोह में केवीआईसी के अध्यक्ष मनोज कुमार और शहर की मेयर रेन बाला गुप्ता मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। 22 फरवरी तक चलने वाली इस प्रदर्शनी में कुल 79 स्टॉल लगाए गए हैं, जहां खादी वस्त्र, हस्तनिर्मित उत्पाद और पर्यावरण अनुकूल सामग्री से बनी वस्तुएं प्रदर्शित की जा रही हैं।

आधुनिक उपकरणों से बढ़ेगी उत्पादन क्षमता

ग्रामोद्योग विकास योजना के तहत कुल 206 मशीनों और टूलकिट का वितरण किया गया। इनमें 146 लेदर टूलकिट, 20 विद्युत चालित चाक, 20 इलेक्ट्रिशियन टूलकिट और 20 वेस्ट वुड टूलकिट शामिल हैं। इसके साथ ही प्रशिक्षण प्राप्त कारीगरों को प्रमाणपत्र भी सौंपे गए, ताकि वे औपचारिक रूप से अपने कौशल को आगे बढ़ा सकें।

अध्यक्ष मनोज कुमार ने कहा कि इन उपकरणों के माध्यम से कारीगरों की उत्पादन क्षमता में वृद्धि होगी। आधुनिक मशीनें न केवल समय की बचत करेंगी बल्कि उत्पादों की गुणवत्ता भी बेहतर बनाएंगी। इससे बाजार में प्रतिस्पर्धा की क्षमता बढ़ेगी और आय में भी सुधार होगा।

स्वदेशी उत्पादों पर विशेष जोर

प्रदर्शनी में उपलब्ध सभी उत्पाद स्वदेशी और पर्यावरण के अनुकूल हैं। आयोजकों ने बताया कि खादी अब केवल कपड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक ग्रामोद्योग आंदोलन का हिस्सा बन चुकी है। प्राकृतिक रंगों, हस्तनिर्मित तकनीकों और स्थानीय कच्चे माल से बने उत्पादों को ग्राहकों की अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है।

11 वर्षों में खादी क्षेत्र की उल्लेखनीय प्रगति

मनोज कुमार ने जानकारी दी कि पिछले 11 वर्षों में खादी और ग्रामोद्योग क्षेत्र का कारोबार 1.70 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है। इस दौरान 2 करोड़ से ज्यादा लोगों को रोजगार मिला है। यह वृद्धि दर्शाती है कि ग्रामीण उद्योगों को बढ़ावा देने की नीतियां सकारात्मक परिणाम दे रही हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि अंबाला स्थित राज्य कार्यालय के अंतर्गत खादी और ग्रामोद्योग क्षेत्र में उल्लेखनीय विकास हुआ है। वर्तमान में 96 खादी संस्थाएं सक्रिय हैं, जिनके माध्यम से लगभग 59,796 कारीगरों को प्रत्यक्ष रोजगार प्राप्त हो रहा है।

हजारों उपकरणों का वितरण

ग्रामोद्योग विकास योजना के तहत अब तक 6 हजार से अधिक मशीनें, उपकरण और टूलकिट वितरित किए जा चुके हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में सूक्ष्म उद्यमों को नई दिशा मिली है। छोटे स्तर पर कार्य कर रहे कारीगर अब आधुनिक संसाधनों की मदद से अपने व्यवसाय को आगे बढ़ा पा रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और विपणन सहयोग का संयोजन ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बना सकता है। इस तरह के आयोजन कारीगरों को न केवल आर्थिक सहयोग देते हैं, बल्कि उन्हें बाजार से सीधे जोड़ते हैं।

पीएमईजीपी लाभार्थियों की भागीदारी

कार्यक्रम में प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) के लाभार्थी भी उपस्थित रहे। यह योजना युवाओं और उद्यमियों को स्वरोजगार के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करती है। प्रदर्शनी में शामिल लाभार्थियों ने अपने अनुभव साझा किए और बताया कि सरकारी योजनाओं की मदद से उन्होंने अपने छोटे व्यवसाय को सफल बनाया।

इस अवसर पर खादी संस्थाओं के प्रतिनिधि, खादी कार्यकर्ता, पंजाब और हरियाणा सरकार के अधिकारी तथा केवीआईसी के कर्मचारी मौजूद रहे। इससे स्पष्ट है कि केंद्र और राज्य स्तर पर समन्वित प्रयास किए जा रहे हैं ताकि योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचे।

आत्मनिर्भर ग्रामीण भारत की ओर

यह आयोजन केवल उपकरण वितरण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आत्मनिर्भरता के संदेश को भी मजबूत करता है। ग्रामीण कारीगरों को आधुनिक संसाधनों से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर दिया जा रहा है। इससे न केवल उनकी आय बढ़ेगी बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।

कुल मिलाकर, यह प्रदर्शनी खादी और ग्रामोद्योग क्षेत्र के सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है। आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षण और विपणन सहयोग के साथ कारीगर अब नए उत्साह और विश्वास के साथ आगे बढ़ रहे हैं। आने वाले समय में ऐसे प्रयास ग्रामीण अर्थव्यवस्था को और मजबूती देने में सहायक होंगे।

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