ओवेरियन कैंसर महिलाओं में होने वाले स्त्री-रोग संबंधी कैंसरों में सबसे घातक माना जाता है। इसकी सबसे बड़ी चुनौती यह है कि शुरुआती चरण में इसके लक्षण स्पष्ट नहीं होते, जिसके कारण अधिकतर मामलों में बीमारी का पता तब चलता है जब यह पेट की गुहा में फैल चुकी होती है। देर से पहचान होने के कारण उपचार कठिन हो जाता है और मृत्यु दर बढ़ जाती है

हाल ही में जापान की Nagoya University के वैज्ञानिकों ने इस कैंसर के तेजी से फैलने के पीछे छिपे जैविक तंत्र का महत्वपूर्ण खुलासा किया है। यह अध्ययन प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका Science Advances में प्रकाशित हुआ है।
कैंसर कोशिकाएं अकेली नहीं फैलतीं
अब तक यह माना जाता था कि ओवेरियन कैंसर कोशिकाएं पेट के तरल में स्वतंत्र रूप से तैरती हुई फैलती हैं। लेकिन नए शोध से पता चला है कि ये कोशिकाएं अक्सर अकेली नहीं होतीं। वे पेट की सुरक्षात्मक परत बनाने वाली मेसोथीलियल कोशिकाओं से जुड़कर ठोस “हाइब्रिड” समूह बना लेती हैं।
ये मिश्रित समूह गोलाकार संरचना में बदल जाते हैं और साधारण कैंसर कोशिकाओं की तुलना में अधिक संगठित और आक्रामक होते हैं। इसी वजह से वे शरीर के ऊतकों में तेजी से प्रवेश कर जाते हैं और उपचार का सामना भी अधिक मजबूती से करते हैं।
इनवाडोपोडिया: घुसपैठ का जैविक औजार
शोधकर्ताओं ने पाया कि जब कैंसर कोशिकाएं पेट की परत से झड़ चुकी मेसोथीलियल कोशिकाओं से जुड़ती हैं, तो ये संयुक्त समूह “हाइब्रिड स्फीयर्स” बना लेते हैं। इसके बाद मेसोथीलियल कोशिकाएं इनवाडोपोडिया नामक नुकीली संरचनाएं विकसित करती हैं।
ये संरचनाएं ड्रिल की तरह काम करती हैं और आसपास के ऊतकों में सूक्ष्म छेद बनाकर कैंसर को भीतर तक पहुंचने में मदद करती हैं। जब ये स्फीयर्स किसी अंग की सतह तक पहुंचते हैं, तो वे सामान्य कैंसर कोशिकाओं की तुलना में कहीं अधिक तेजी से ऊतक में प्रवेश करते हैं। यही कारण है कि ओवेरियन कैंसर बहुत जल्दी पेट के कई हिस्सों में फैल जाता है।
कीमोथेरेपी से बच निकलने की क्षमता
अध्ययन का एक महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह भी रहा कि मौजूदा कीमोथेरेपी दवाएं मुख्य रूप से कैंसर कोशिकाओं को निशाना बनाती हैं। लेकिन मेसोथीलियल कोशिकाएं उपचार से प्रभावित नहीं होतीं, जबकि वे कैंसर फैलाने में सक्रिय भूमिका निभाती हैं।
इस वजह से हाइब्रिड समूह उपचार के दौरान भी जीवित रह सकते हैं और बाद में फिर से बीमारी को बढ़ावा दे सकते हैं। यही कारण है कि कई मरीजों में उपचार के बाद भी कैंसर लौट आता है।
एक मरीज की कहानी से शुरू हुई खोज
शोधकर्ताओं के अनुसार, इस अध्ययन की प्रेरणा एक मरीज के अनुभव से मिली। एक महिला की स्क्रीनिंग रिपोर्ट कुछ ही महीनों पहले सामान्य आई थी, लेकिन थोड़े समय बाद उसमें उन्नत चरण का ओवेरियन कैंसर पाया गया। आधुनिक जांच तकनीकें समय रहते बीमारी पकड़ नहीं सकीं और उसकी जान नहीं बचाई जा सकी।
इस घटना ने वैज्ञानिकों को यह समझने के लिए प्रेरित किया कि आखिर यह कैंसर इतनी तेजी से कैसे फैलता है और क्यों पारंपरिक परीक्षण इसे शुरुआती अवस्था में पहचान नहीं पाते।
भविष्य के उपचार की नई दिशा
इस शोध से उम्मीद जगी है कि भविष्य में ऐसे उपचार विकसित किए जा सकते हैं जो सिर्फ कैंसर कोशिकाओं पर नहीं, बल्कि मेसोथीलियल कोशिकाओं और उनके साथ बनने वाले हाइब्रिड समूहों पर भी असर डालें।
यदि वैज्ञानिक इन प्रक्रियाओं को रोकने में सफल होते हैं, तो ओवेरियन कैंसर की पहचान जल्दी संभव हो सकती है और उपचार अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।
क्यों जरूरी है जागरूकता
विशेषज्ञों का मानना है कि महिलाओं को पेट में लगातार सूजन, जल्दी पेट भरना, बार-बार पेशाब लगना, या लंबे समय तक पेट दर्द जैसे लक्षणों को हल्के में नहीं लेना चाहिए। ये शुरुआती संकेत हो सकते हैं।
समय पर जांच और जागरूकता ही इस खतरनाक कैंसर से बचाव का सबसे बड़ा हथियार है।
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