हरियाणा के करनाल के बसंत विहार क्षेत्र में उस समय शोक की लहर दौड़ गई, जब विदेश में मौत का शिकार हुए युवक देव पुंडीर का पार्थिव शरीर कई दिनों बाद उसके घर पहुंचा। जिस बेटे को परिवार ने उज्ज्वल भविष्य की उम्मीदों के साथ रूस भेजा था, वही अब ताबूत में बंद होकर लौटा। इस घटना ने न केवल एक परिवार को तोड़ दिया, बल्कि पूरे इलाके को गहरे सदमे में डाल दिया।

देव पुंडीर एक मध्यमवर्गीय परिवार से था और अपने माता-पिता की उम्मीदों का सहारा भी। वह अपने घर की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए 16 मार्च को पर्यटक वीजा पर रूस गया था। परिवार को उससे काफी उम्मीदें थीं। जाते समय उसने अपने माता-पिता को भरोसा दिलाया था कि वह मेहनत करेगा और जल्द ही घर की हालत बेहतर बनाएगा।
परिजनों के अनुसार, देव से उनकी आखिरी बातचीत करीब 16 दिन पहले हुई थी। उस समय उसने फोन पर बताया था कि वह सुरक्षित है और वहां सब कुछ ठीक चल रहा है। उसकी बातों से परिवार को राहत मिली थी। लेकिन कुछ ही दिनों बाद अचानक आई एक खबर ने सब कुछ बदल दिया।
बताया जाता है कि देव की मौत की सूचना परिजनों को रात के समय एक व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए मिली। यह खबर सुनते ही परिवार के पैरों तले जमीन खिसक गई। किसी को भी इस बात पर यकीन नहीं हो रहा था कि उनका बेटा अब इस दुनिया में नहीं रहा। घर में चीख-पुकार मच गई और पूरे इलाके में शोक की लहर फैल गई।
मौत के कारण को लेकर भी कई सवाल खड़े हो रहे हैं। बताया जा रहा है कि देव की मौत बिल्डिंग से गिरने के कारण हुई, लेकिन परिजन इस बात को स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि यह केवल एक हादसा नहीं हो सकता और इसके पीछे कुछ और सच्चाई छिपी हो सकती है। परिवार ने इस मामले की गहराई से जांच की मांग की है, ताकि सच सामने आ सके।
देव के माता-पिता ने अपने बेटे को विदेश भेजने के लिए काफी संघर्ष किया था। उसके पिता इलेक्ट्रॉनिक का काम करते हैं, जबकि मां सिलाई करके घर चलाने में सहयोग करती हैं। उन्होंने करीब 5 लाख रुपये खर्च कर बेटे को विदेश भेजा था। यह उनके लिए एक बड़ा निवेश था, जो उन्होंने अपने बेटे के भविष्य को बेहतर बनाने के लिए किया था। लेकिन अब वही सपना एक दर्दनाक हकीकत में बदल गया है।
जब देव की मौत की खबर सामने आई, तो कॉलोनी के लोगों ने भी परिवार के साथ खड़े होकर हर संभव मदद करने की कोशिश की। स्थानीय निवासी सुभाष ने बताया कि उन्होंने दूतावास को ई-मेल भेजा और अधिकारियों से संपर्क किया, ताकि देव का शव भारत लाया जा सके।
इसके अलावा केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर के प्रतिनिधि कविंद्र राणा, विधायक जगमोहन आनंद और प्रशासन से भी मदद ली गई। इन सभी प्रयासों के बाद आखिरकार देव का पार्थिव शरीर भारत लाया जा सका।
जैसे ही शव करनाल पहुंचा, परिवार में कोहराम मच गया। मां का रो-रोकर बुरा हाल था, वह बार-बार अपने बेटे को पुकार रही थी। पिता भी गहरे सदमे में थे और कुछ बोलने की स्थिति में नहीं थे। रिश्तेदार और पड़ोसी उन्हें ढांढस बंधाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन इस दुख को कम करना आसान नहीं था।
शनिवार को देव का अंतिम संस्कार पूरे विधि-विधान के साथ किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। हर किसी की आंखें नम थीं और माहौल बेहद भावुक था। लोगों ने देव को अंतिम विदाई दी और परिवार के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं।
इस घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। लोग अब अपने बच्चों को विदेश भेजने से पहले कई बार सोचने लगे हैं। यह मामला इस बात की ओर भी इशारा करता है कि विदेशों में रह रहे युवाओं की सुरक्षा को लेकर और अधिक सतर्कता बरतने की जरूरत है।
फिलहाल, देव का परिवार न्याय की उम्मीद लगाए बैठा है। वे चाहते हैं कि उनके बेटे की मौत के पीछे की असली वजह सामने आए और अगर इसमें किसी तरह की लापरवाही या साजिश है, तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
देव पुंडीर की यह कहानी एक ऐसे सपने की कहानी है, जो अधूरा रह गया। यह केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं है, बल्कि समाज के लिए भी एक बड़ा संदेश है कि जीवन कितना अनिश्चित है और कभी-कभी सपनों की कीमत बहुत भारी पड़ जाती है।
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