राजधानी दिल्ली के राजनीतिक केंद्र कहे जाने वाले जंतर‑मंतर पर रविवार को आयोजित रैली में देश की सियासत एक बार फिर गरमा गई। इस मंच से अरविंद केजरीवाल ने केंद्र की भारतीय जनता पार्टी सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए दावा किया कि देश में बदलाव की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है। उनके निशाने पर सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार की नीतियां रहीं।

रैली का आयोजन आम आदमी पार्टी ने किया था, जिसमें बड़ी संख्या में समर्थक, कार्यकर्ता और पार्टी नेता शामिल हुए। केजरीवाल ने अपने भाषण की शुरुआत ऐतिहासिक संदर्भ से करते हुए कहा कि इसी स्थान से वर्ष 2011 में भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठी थी, जिसने देश की राजनीति की दिशा बदल दी थी। उन्होंने दावा किया कि जिस तरह उस आंदोलन के बाद सत्ता परिवर्तन हुआ था, उसी तरह अब भाजपा के खिलाफ जनमत बनने लगा है।
अपने संबोधन में केजरीवाल ने कहा कि 2014 में जनता ने बड़ी उम्मीदों के साथ नरेंद्र मोदी को पूर्ण बहुमत दिया था। लोगों को विश्वास था कि देश की बुनियादी समस्याओं का समाधान होगा और विकास की नई कहानी लिखी जाएगी। लेकिन उनके अनुसार, वर्षों बीत जाने के बाद भी आम नागरिक की जिंदगी में अपेक्षित बदलाव नहीं आया। उन्होंने कहा कि देश के कई हिस्सों में आज भी लोगों को साफ पानी, बेहतर सड़कें और स्थिर बिजली जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।
दिल्ली के संदर्भ में उन्होंने भाजपा सरकार पर सीधा हमला करते हुए कहा कि राजधानी की हालत पिछले एक वर्ष में बिगड़ गई है। उनके अनुसार सड़कों पर गड्ढे बढ़े हैं, सफाई व्यवस्था कमजोर हुई है और पानी की समस्या फिर से उभर आई है। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली में जो व्यवस्थाएं पहले बेहतर थीं, अब वे धीरे-धीरे ढह रही हैं।
केजरीवाल ने अपनी सरकार के कार्यकाल का जिक्र करते हुए कहा कि उस दौरान दिल्ली में 24 घंटे बिजली, सरकारी स्कूलों में सुधार और मोहल्ला क्लीनिक जैसी स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार हुआ था। उनका कहना था कि इन योजनाओं ने आम लोगों के जीवन में वास्तविक परिवर्तन लाया। उन्होंने दावा किया कि वर्तमान शासन में इन योजनाओं की गति धीमी पड़ गई है और कई जगह उन्हें बंद या कमजोर कर दिया गया है।
रैली में रोजगार और परिवहन का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। केजरीवाल ने कहा कि हजारों बस मार्शलों, डीटीसी कर्मचारियों और अन्य संविदा कर्मियों को हटाया गया, जिससे कई परिवारों की रोजी-रोटी प्रभावित हुई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि महिलाओं को आर्थिक सहायता देने का वादा अभी तक पूरा नहीं किया गया।
अपने भाषण में उन्होंने वैश्विक तुलना का सहारा लेते हुए कहा कि दुनिया के कई विकसित देशों में बुनियादी ढांचे का स्तर ऊंचा है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि विदेशों में सड़कों पर तेज गति से वाहन चल सकते हैं, जबकि भारत के कई हिस्सों में छोटी दूरी तय करने में भी लंबा समय लग जाता है। उनका कहना था कि देश को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए बुनियादी ढांचे में व्यापक सुधार की जरूरत है।
प्रदूषण का मुद्दा उठाते हुए केजरीवाल ने कहा कि उत्तर भारत में हवा की गुणवत्ता चिंताजनक बनी हुई है। उन्होंने दावा किया कि कई देशों ने सख्त नीतियों के जरिए प्रदूषण पर नियंत्रण पाया है, लेकिन भारत में अभी भी यह चुनौती बनी हुई है। उनके अनुसार पर्यावरण से जुड़ी नीतियों में ठोस और दीर्घकालिक कदम उठाने की जरूरत है।
रैली में उन्होंने अपने खिलाफ चले कथित शराब नीति विवाद का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक उन पर आरोप लगाए गए, लेकिन अदालत में कोई ठोस सबूत सामने नहीं आया। उन्होंने इसे राजनीतिक प्रताड़ना बताते हुए कहा कि जनता अब सच समझ रही है और इसी कारण राजनीतिक माहौल बदल रहा है।
केजरीवाल ने यह भी दावा किया कि यदि वर्तमान समय में चुनाव कराए जाएं तो भाजपा को बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि जनता महंगाई, बेरोजगारी और बुनियादी सुविधाओं की कमी से परेशान है और इसका असर चुनावी नतीजों में दिखेगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के बयान केवल चुनावी रणनीति का हिस्सा नहीं बल्कि आने वाले राजनीतिक समीकरणों की झलक भी देते हैं। दिल्ली और राष्ट्रीय राजनीति में आम आदमी पार्टी खुद को वैकल्पिक ताकत के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रही है, जबकि भाजपा राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखना चाहती है। ऐसे में दोनों दलों के बीच टकराव और तीखा होना तय माना जा रहा है।
रैली का संदेश स्पष्ट था कि आम आदमी पार्टी आने वाले समय में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी राजनीतिक भूमिका बढ़ाने का प्रयास करेगी। केजरीवाल ने अपने समर्थकों से अपील की कि वे बदलाव की इस मुहिम को गांव-गांव और शहर-शहर तक पहुंचाएं।
राजनीतिक दृष्टि से यह रैली केवल एक भाषण कार्यक्रम नहीं बल्कि आने वाले चुनावी माहौल की भूमिका भी मानी जा रही है। इससे यह संकेत मिलता है कि देश में राजनीतिक विमर्श फिर से तेज होने वाला है और विपक्षी दल सरकार को घेरने की तैयारी में जुट चुके हैं।
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