राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में तेज, आधुनिक और विश्वस्तरीय क्षेत्रीय परिवहन व्यवस्था की दिशा में बड़ा कदम उठने जा रहा है। रविवार 22 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिल्ली–मेरठ नमो भारत कॉरिडोर का उद्घाटन करेंगे। इस कॉरिडोर पर चलने वाली तेज रफ्तार ट्रेनें लगभग 82 किलोमीटर की दूरी को महज 55 मिनट में पूरा करने में सक्षम होंगी।
सराय काले खां से मोदीपुरम तक फैला यह रैपिड ट्रांजिट कॉरिडोर न केवल यात्रियों की यात्रा को तेज और सुविधाजनक बनाएगा, बल्कि पूरे एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के आर्थिक तथा शहरी विकास को भी नई गति देगा।
🚄 देश का पहला पूर्ण लंबाई वाला नमो भारत कॉरिडोर
उद्घाटन के साथ ही यह देश का पहला ऐसा नमो भारत कॉरिडोर बन जाएगा, जो अपनी पूरी लंबाई में एक छोर से दूसरे छोर तक संचालित होगा। इस परियोजना को नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन ने विकसित किया है, जो क्षेत्रीय रैपिड ट्रांजिट सिस्टम लागू करने की प्रमुख एजेंसी है।
इस कॉरिडोर के शुरू होने से राजधानी दिल्ली और मेरठ के बीच यात्रा समय में भारी कमी आएगी। साथ ही, औद्योगिक, शैक्षिक और व्यापारिक गतिविधियों को भी नया प्रोत्साहन मिलेगा।
🛤️ चरणबद्ध तरीके से तैयार हुआ प्रोजेक्ट
इस महत्वाकांक्षी परियोजना की आधारशिला मार्च 2019 में रखी गई थी। कोविड जैसी चुनौतियों के बावजूद काम जारी रहा और अक्टूबर 2023 में पहले सेक्शन का संचालन शुरू किया गया। इसके बाद क्रमशः विभिन्न हिस्सों को जोड़ते हुए अब पूरा 82 किलोमीटर लंबा कॉरिडोर संचालन के लिए तैयार हो गया है।
नए खंड शुरू होने के साथ दिल्ली से लेकर मेरठ के मोदीपुरम तक पूरी लाइन एक साथ चालू हो जाएगी, जिससे यात्रियों को निर्बाध यात्रा सुविधा मिलेगी।
💰 30 हजार करोड़ से अधिक की लागत
इस परियोजना पर लगभग 30 हजार करोड़ रुपये से अधिक का निवेश हुआ है। कुल लंबाई में से करीब 70 किलोमीटर एलिवेटेड और लगभग 12 किलोमीटर भूमिगत ट्रैक है।
परियोजना के वित्तपोषण में एडीबी, एनडीबी और एआईआईबी जैसे अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों का सहयोग मिला है, जबकि केंद्र और संबंधित राज्य सरकारों ने भी इसमें योगदान दिया है।
🏢 आधुनिक स्टेशनों और सुविधाओं से लैस
पूरे कॉरिडोर पर 16 अत्याधुनिक स्टेशन विकसित किए गए हैं, जिनमें प्रमुख शहर जैसे गाजियाबाद और आनंद विहार जैसे मल्टी-मॉडल हब शामिल हैं।
यात्रियों की सुविधा के लिए स्टेशनों पर एयरपोर्ट जैसी व्यवस्थाएं दी गई हैं—
प्लेटफॉर्म स्क्रीन डोर
सीसीटीवी निगरानी
फायर सेफ्टी सिस्टम
मोबाइल चार्जिंग पॉइंट
प्रीमियम कोच सुविधा
चयनात्मक डोर ओपनिंग तकनीक
इन सुविधाओं से यात्रा अधिक सुरक्षित, आरामदायक और आधुनिक बनेगी।
🔗 मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी पर जोर
इस परियोजना का बड़ा उद्देश्य विभिन्न परिवहन माध्यमों को एक साथ जोड़ना है। नमो भारत स्टेशनों को मेट्रो, रेलवे स्टेशन, बस टर्मिनल और स्थानीय परिवहन नेटवर्क से जोड़ा जा रहा है।
एकीकृत क्यूआर टिकटिंग और एनसीएमसी कार्ड जैसी सुविधाएं यात्रियों को “वन नेशन, वन कार्ड” की दिशा में सरल यात्रा अनुभव देंगी।
🌱 पर्यावरण के लिहाज से भी अहम
यह कॉरिडोर पर्यावरण के अनुकूल परिवहन प्रणाली का उदाहरण भी माना जा रहा है।
सोलर पैनल का उपयोग
रीजेनरेटिव ब्रेकिंग तकनीक
वर्षा जल संचयन प्रणाली
इन पहलों से कार्बन उत्सर्जन कम होगा और सार्वजनिक परिवहन की हिस्सेदारी बढ़ेगी। अनुमान है कि क्षेत्र में सार्वजनिक परिवहन उपयोग 37 प्रतिशत से बढ़कर 63 प्रतिशत तक पहुंच सकता है।
📈 विकास का नया इंजन बनेगा कॉरिडोर
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कॉरिडोर केवल एक रेल परियोजना नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के विकास का इंजन साबित होगा। तेज कनेक्टिविटी से रोजगार, व्यापार, रियल एस्टेट और औद्योगिक निवेश को बढ़ावा मिलेगा।
इसे प्रस्तावित आरआरटीएस नेटवर्क की पहली महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है। भविष्य में दिल्ली–अलवर और दिल्ली–पानीपत जैसे अन्य कॉरिडोर भी विकसित किए जाने की योजना है, जिससे एनसीआर में क्षेत्रीय परिवहन की तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है।
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