हरियाणा के बहादुरगढ़ में शुक्रवार सुबह एक बेहद दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर दिया। गांव जाखौदा में गंदे पानी की निकासी के लिए डाली गई खुली पाइपलाइन में गिरने से पांच वर्षीय मासूम की जान चली गई। घटना के बाद परिवार में कोहराम मच गया और ग्रामीणों ने सुरक्षा व्यवस्था में लापरवाही का आरोप लगाते हुए जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

🕙 खेलते-खेलते हुआ हादसा
जानकारी के अनुसार, मृतक मयंक का परिवार मूल रूप से उत्तर प्रदेश के कासगंज का रहने वाला है और फिलहाल जाखौदा गांव में किराये के मकान में रह रहा था। उसके पिता सुल्तान सिंह औद्योगिक क्षेत्र स्थित एक कंपनी में कार्यरत हैं।
शुक्रवार सुबह करीब दस बजे मयंक घर के बाहर गली में अन्य बच्चों के साथ खेल रहा था। इसी दौरान वह गंदे पानी की निकासी के लिए बनाई गई पाइपलाइन में गिर गया। बताया जा रहा है कि पाइपलाइन लगभग साढ़े तीन फुट चौड़ी और चार से पांच फुट गहरी थी। आसपास मौजूद लोगों को घटना का तुरंत पता नहीं चल सका, जिससे बचाव में देरी हो गई।
🔎 तलाश के बाद खुला सच
कुछ देर बाद जब मयंक घर नहीं लौटा तो परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की। आसपास के लोगों के साथ मिलकर खोजबीन की गई, तब पता चला कि वह पाइपलाइन में गिर गया है। स्थानीय लोगों ने उसे निकालने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद दमकल विभाग और पुलिस को सूचना दी गई।
दमकल कर्मियों ने मौके पर पहुंचकर काफी मशक्कत के बाद बच्चे को पाइपलाइन से बाहर निकाला, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। बताया गया कि बच्चा जिस जगह गिरा था, वह उससे आगे बने चैंबर में फंसा मिला।
💔 इकलौते बेटे की मौत से टूटा परिवार
मयंक अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था। बेटे की मौत के बाद मां का रो-रोकर बुरा हाल है। अस्पताल में वह बार-बार अपने बच्चे को पुकारती रही। पिता भी गहरे सदमे में हैं। घटना के बाद पूरे गांव में शोक की लहर फैल गई।
⚠️ ग्रामीणों ने उठाए लापरवाही के सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि पाइपलाइन लंबे समय से खुली और असुरक्षित हालत में पड़ी थी। कई बार शिकायत करने के बावजूद इसे ढकने या चेतावनी संकेत लगाने जैसी व्यवस्था नहीं की गई। ग्रामीणों ने इसे गंभीर लापरवाही बताते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
🚓 पुलिस जांच में जुटी
पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। परिजनों के बयान लिए जा रहे हैं और शव को पोस्टमार्टम के लिए नागरिक अस्पताल भेजा गया है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद जिम्मेदारी तय कर उचित कार्रवाई की जाएगी।
📌 निष्कर्ष
यह हादसा केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा व्यवस्था पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है। खुली पाइपलाइन, अधूरी निर्माण साइटें और बिना सुरक्षा उपायों के छोड़े गए ढांचे अक्सर ऐसे हादसों की वजह बनते हैं।
यदि समय रहते सुरक्षा इंतजाम किए जाते, तो शायद यह मासूम आज जीवित होता। अब देखना यह होगा कि जांच के बाद प्रशासन क्या कदम उठाता है और क्या भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस व्यवस्था बनाई जाती है।
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