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ऐतिहासिक फैसला :: सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक को बताया असंवैधानिक, कहा – केन्द्र बनाये कानून

डेस्क : सुप्रीम कोर्ट ने एक साथ तीन तलाक को खत्म कर दिया है. उच्चतम न्यायालय मंगलवार को इस विवादित मुद्दे पर ऐतिहासिक फैसला सुनाया कि मुस्लिम समुदाय में ‘तीन तलाक’ की परंपरा धर्म की मौलिकता में शामिल है या नहीं. तीन तलाक के मुद्दे पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाया. कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि केंद्र सरकार 6 महीने के अंदर संसद में इसको लेकर कानून बनाए. सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायधीश जे.एस. खेहर के नेतृत्व में 5 जजों की पीठ ने अपना फैसला सुनाया. कोर्ट में तीन जज तीन तलाक को अंसवैधानिक घोषित करने के पक्ष में थे, वहीं 2 दो जज इसके पक्ष में नहीं थे. 

लाइव अपडेट्स:

11:00 am: जस्टिस नरीमन, ललित और कुरियन ने तीन तलाक को असंवैधानिक बताया, चीफ जस्टिस खेहर और नजीर ने कहा संवैधानिक

10:49 am: चीफ जस्टिस जेएस खेहर ने कहा, तलाक असंवैधानिक नहीं। यह सविंधान के 14, 15, 21 और 25 के खिलाफ नहीं।

10:42 am: 6 महीने तक तीन तलाक पर रोक, संसद बनाए कानून- सुप्रीम कोर्ट

10:40 am: संसद तीन तलाक पर कानून बनाए- सुप्रीम कोर्ट

10:37 am: जस्टिस जेएस खेहर के बाद बारी-बारी से चार जज सुनाएंगे फैसला

10:35 am: सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस खेहर ने फैसला पढ़ना शुरू किया।

10:30 am: सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस खेहर समेत सभी 5 जज कोर्ट पहुंचे।

10:17 am: पूर्व अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी बोले, यह एक बड़ा दिन है, देखते हैं कि फैसला क्या आता है।

09:50 am: तीन तलाक की पीडि़ता और याचिकाकर्ता सायरा बानो ने कहा, ‘मुझे लगता है कि फैसला मेरे पक्ष में आएगा। समय बदल गया है और कानून जरूर बनाया जाएगा।

09:40 am: चीफ जस्टिस जे.एस खेहर की अध्यक्षता में 5 जजों की पीठ सुनाएगी फैसला। इस पीठ में खेहर के अलावा, न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ, न्यायमूर्ति आर एफ नरीमन, न्यायमूर्ति यू यू ललित और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर शामिल हैं।

09:30 am: सुप्रीम कोर्ट तीन तलाक के मुद्दे पर सुबह 10:30 बजे फैसला सुनाएगा।

सुनवाई के दौरान, शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया था कि वह संभवत: बहुविवाह के मुद्दे पर विचार नहीं करेगी और कहा कि वह केवल इस विषय पर गौर करेगी कि तीन तलाक मुस्लिमों द्वारा ‘लागू किये जाने लायक’ धर्म के मौलिक अधिकार का हिस्सा है या नहीं।

खेहर के अलावा, पीठ में न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ, न्यायमूर्ति आर एफ नरीमन, न्यायमूर्ति यू यू ललित और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर शामिल हैं। पीठ ने तीन तलाक की परंपरा को चुनौती देने वाली मुस्लिम महिलाओं की अलग अलग पांच याचिकाओं सहित सात याचिकाओं पर सुनवाई की थी। 

याचिकाकर्ताओं की दलील

1. तीन तलाक महिलाओं के साथ भेदभाव है।
2. महिलाओं को तलाक लेने के लिए कोर्ट जाना पड़ता है, जबकि पुरुषों को मनमाना हक है।
3. कुरान में तीन तलाक का जिक्र नहीं है।
4. ये गैर कानूनी और असंवैधानिक है।

मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड और जमीयत की दलील

1.  ये अवांछित है, लेकिन वैध
2.  ये पर्सनल ला का हिस्सा है कोर्ट दखल नहीं दे सकता
3. 1400 साल से चल रही प्रथा है ये आस्था का विषय है, संवैधानिक नैतिकता और बराबरी का सिद्धांत इस पर लागू नहीं होगा
4.  पर्सनल ला को मौलिक अधिकारों की कसौटी पर नहीं परखा जा सकता

 सरकार की दलील

1. ये महिलाओं को संविधान मे मिले बराबरी और गरिमा से जीवनजीने के हक का हनन है
2. ये धर्म का अभिन्न हिस्सा नहीं है इसलिए इसे धार्मिक आजादी के तहत संरक्षण नहीं मिल सकता।
3. पाकिस्तान सहित 22 मुस्लिम देश इसे खत्म कर चुके हैं
4. धार्मिक आजादी का अधिकार बराबरी और सम्मान से जीवन जीने के अधिकार के आधीन है
5. अगर कोर्ट ने हर तरह का तलाक खत्म कर दिया तो सरकार नया कानून लाएगी।

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