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बिहार :: आजाद भारत के प्रथम शिक्षा मन्त्री मौलाना अबुल कलाम आजाद की 129 वीं जयंती मनाई ।

वजीरगंज (गया )आजाद भारत के प्रथम शिक्षा मंत्री, स्वतंत्रता सेनानी, वैज्ञानिक, कवि, पत्रकार एवं भारत के शिक्षा प्रणाली में गुणात्मक परिवर्तक मौलाना अबुल कलाम आजाद की 129वीं जयंती के अवसर पर शनिवार को वजीरगंज प्रखंड के मध्य विद्यालय ,दखिगांव के प्रांगण में प्रधानाध्यापक कृष्ण कुमार के निर्देशन में इनकी जयंती राष्ट्रीय शिक्षा दिवस के रूप में मनाई गई ।इस मौके पर सभी शिक्षक व बच्चों ने इनकी तस्वीर पर माल्यार्पण कर इनके जीवन चरित्र पर चर्चा की एवं इनके बताये गये मार्गों पर चलने का आह्वान किया गया ।इस मौके पर विद्यालय के कक्षा 8 के बच्चों के बीच अबुल कलाम के जीवनवृन्त चित्रांकन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें अँसुली कुमारी ,सोनी कुमारी ,अनुप्रिया एवं ज्योति कुमारी को पुरस्कृत किया गया। समारोह के दौरान विद्यालय प्रधानाध्यापक कृष्ण कुमार ने बच्चों को मौलाना अबुल कलाम आजाद के जीवन चरित्र पर चर्चा करते हुए कहा कि मौलाना आजाद भारत देश की स्वतंत्रता को साम्प्रदायिक स्वतंत्रता से बढ़कर मानते थे ।उन्होंने धार्मिक सद्भाव के लिये काम किया और देश विभाजन के कट्टर प्रतिद्वंदी भी थे ।मौलाना आजाद ने लम्बे समय तक आजादी की लड़ाई लड़ी,साथ ही भारत पकिस्तान विभाजन के गवाह बने ।लेकिन एक सच्चे भारतीय होने के कारण उन्होंने स्वतन्त्रता के बाद भारत में रहकर इसके विकास में कार्यों किया और भारत के प्रथम शिक्षा मंत्री बन देश की शिक्षा पद्धति सुधारने का जिम्मा उठाया ।शिक्षा मंत्री बनने के बाद इन्होने 1958 में 14वर्ष से कम उम्र के सभी लोगों को शिक्षा अनिवार्य कर दिया साथ ही साथ वयस्क निरक्षरता ,माध्यमिक शिक्षा एवं गरीब तथा महिलाओं की शिक्षा पर बल दिया ।इस मौके पर शिक्षक आशा कुमारी ,सुनीता पाण्डेय ,मधु कुमारी ,ममता कुमारी, कुमारी सरिता सिन्हा टोला सेवक मनोज कुमार, सुनील कुमार, सरगून कुमार, कुमारी जयललिता, कुमारी पुष्पा सहित सभी बच्चे मौजूद थे ।

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