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बिहार :: राजगीर महोत्सव 25 नवंबर से तैयारियां की गयी शुरू

राजगीर। राजगीर महोत्सव का रंगारंग अगाज 25 नवंबर से होने जा रहा है। यह महोत्सव 25 नवंबर से शुरू होकर 27 नवंबर तक चलेगा। इस बीच लगातार तीन दिनों तक राजगीर की वादियां गीत नृत्य के साथ थिरकती रहेगी। जिला प्रशासन और पर्यटन विभाग ने महोत्सव की तैयारियां शुरू कर दी है। महोत्सव अजातशत्रु किला मैदान में आयोजित होगा। इसके लिए भव्य पंडाल का निर्माण कार्य शुरू हो गया है। वहीं कलाकारोें के चयन का काम पर्यटन विभाग के द्वारा किया जा रहा है। खजुराहो नृत्य महोत्सव के तर्ज पर राजगीर में महोत्सव का शुरूआत पर्यटन विभाग के द्वारा 4 मई 1986 में शुरू की गयी थी। इस महोत्सव को शुरू कराने में पूर्व शिक्षा राज्यमंत्री व राजगीर के पंडितपुर गांव निवासी स्व सुरेंद्र प्रसाद तरूण का अहम भूमिका थी। उन्हीं के प्रयास से राजगीर महोत्सव की शुरूआत पर्यटन विभाग ने कराया था। उस समय इस महोत्सव का नाम राजगीर नृत्य महोत्सव हुआ करता था। सर्वप्रथम इस महोत्सव का शुरूआत राजगीर जंगल के बीच प्राचीन व ऐतिहासिक स्थल स्वर्ण भण्डार परिसर में की गयी थी। उसके बाद दूसरे राजगीर नृत्य महोत्सव का 3 मई 1987 को तथा तीसरा नृत्य महोत्सव 25 से 27 फरवरी को आयोजित किया गया। वर्ष 1989 में यहां महोत्सव दो बार 10 मई से 12 मई और 3 से 5 नवम्बर तक मनाया गया। इसी वर्ष राजगीर नृत्य महोत्सव का नाम बदलकर राजगीर महोत्सव किया गया परन्तू इसके बाद वर्ष 1990 से 1994 तक कतिपय कारणों से महोत्सव का आयोजन नहीं किया जा सका पुनः 1995 में महोत्सव का आयोजन नये अंदाज में नये स्थल पर शुरू हुआ। यूथ होस्टल परिसर के मुक्ताकाश मंच पर राजगीर महोत्सव का आयोजन 24 से 26 तक किया गया तथा इस तिथि को आगे के वर्षाें के लिए भी निर्धारित कर दिया गया। महोत्सव को ऐतिसिक पूट देनें के उददेश्य से मुख्य द्वार का नाम मगध द्वार रखा गया एवं चाहरदिवारियों में अशोक स्तंभ का चित्रकारी कर प्राचीन मगध का याद ताजा की गयी। वर्ष 1998 में महोत्सव में नया आयाम जोडते हुये ग्राम श्री मेला का आयोजन किया गया। वर्ष 07 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने महोत्सव का तिथि बदलकर दिसम्बर माह का प्रथम शनिवार और रविवार को करते हुये इसे दो दिनों का कर दिया। वर्ष 2008 में एक नया आयाम जोडते हूये ग्राम श्री मेला के साथ हीं इसमें कृषि मेला का भी आयोजन किया गया। इसके बाद और कई आयाम इसमे जुड़ते चले गये जिसमेें टांगा दौड, दंगल प्रतियोगिता, पालकी साज सज्जा आदि को शामिल किया गया। वर्ष 2009 में इसका स्थान एक बार फिर परिवर्तित कर ऐतिहासिक अजातशत्रु किला मैदान परिसर किया गया तब यह महोत्सव लगातार अजातशत्रु किला मैदान मेें हीं होता आ रहा है। पिछले चार वर्षाें से महोत्सव का आयोजन नवम्बर माह के 25 से 27 तक किया जाता रहा है, इस बार भी महोत्सव तीन दिनों का हीं होगा। महोत्सव में अब तक प्रसिद्ध अभिनेत्री हेमामालिनी, नलिनी कमलिनी, बाॅसुरी वादक पंडित हरी प्रसाद चैरसिया, भजन सम्राट अनुप जलोटा, फिल्म अभिनेत्री अर्चना जोगलेकर, शहनाई वादक सुहैल अहमद, सुप्रसिद्व नृत्यांगना स्वपन सुंदरी, प्रसिद्ध संतुर वादक पंडित शिवकुमार शर्मा, प्रसिद्ध गायक भूपेन हजारिका, ग्रेमी आवार्ड विजेता मोहन, वीणा वादक पं विश्वमोहन भटट, सिने तारिका मीनाक्षी शोषाद्री, रविन्द्र जैन, सुश्री वसुन्धरा कोरा, सुविख्यात कत्थक नर्तक मधुकर आंनद, किरण चैहान, ओडीसी नृत्यांगना संयुक्ता पाणिग्रही, कत्थक नृत्यांगणा सोनल मानसिह जैसे प्रसिद्ध कलाकार महोत्सव के मंच से अपना कला का जौहर बिखेर चुके हैं। इस बार का महोत्सव को यादगार बनानें में जिला प्रशासन व पर्यटन विभाग अभी से हीं तैयारी शुरू कर दिया है। किला मैदान में 300 फीट लम्बा व 60 फीट चैडा भव्य जर्मन हैंगर पण्डाल का निर्माण कराया जा रहा है। पंडाल निर्माण पिरामिड फैक्काॅन के द्वारा किया जा रहा है। यह पंडाल पुरी तरह से वाटर प्रूफ जर्मन हैंगर तकनीक का होगा जिसकी उॅचाई 20 फीट रहेगा। जिला प्रशासन कि ओर से पदाधिकारी बराबर पंडाल निर्माण पर नजर बनाये हुये हैं। वहीं किला मैदान से लेकर सडक किनारें के झाडियों को नगर पंचायत राजगीर के द्वारा कटाई का काम भी युद्ध स्तर पर किया जा रहा है ।

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