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रिव्यू :: गैंग्स ऑफ वासेपुर टाइप की फिल्म है बाबूमोशाय बंदूकबाज, दर्शकों को खूब भाया

डेस्क : गैंग और गैंगस्टर की कहानियों से बॉलीवुड का पुराना लगाव है. ‘बाबूमोशाय बन्दूकबाज़’ उसी जॉनर की फिल्म है. कहानी का बैकड्रॉप देशी हैं और किरदार भी हिंदी बेल्ट से हैं लेकिन यहाँ भी गैंगस्टर का अंदाज़ स्टाइलिश है. फिल्म की शुरुआत किशोर कुमार के गानों से होती है जहाँ अपनी तो जैसे तैसे कुछ तो लोग कहेंगे गीतों के ज़रिये बाबू (नवाज़ुद्दीन) के किरदार को बखूबी बयां कर दिया गया है. बाबू बिहारी (नवाजुद्दीन) और बांके बिहारी (जतिन), दोनों यूपी के कॉन्ट्रैक्ट किलर्स हैं। फिल्म में दिलचस्प मोड़ तब आता है जब दोनों के टारगेट एक हो जाते हैं। यानी दोनों को किसी खास शख्स की हत्या की सुपारी मिल जाती है। दोनों यह तय करते हैं कि जो ज्यादा लोगों को मारेगा वही नंबर वन किलर कहा जाएगा। हालांकि दोनों इस बात से अनजान रहते हैं कि उनकी प्रतिस्पर्धा के बीच एक खेल और खेला जा रहा है। फिल्म में जहां गोलियों की आवाज का शोर है वहीं सेक्स सीन्स भी जमकर परोसे गए हैं।

  • फिल्म: बाबूमोशाय बन्दूकबाज़ 
    निर्माता: कुशान नंदी ,किरण श्याम श्रॉफ ,अश्मित कुंदर 
    निर्देशक: कुशान नंदी 
    कलाकार: नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी, बिदिता बाग़, जतिन गोस्वामी, ,दिव्या दत्ता और अन्य 
    रेटिंग: साढ़ेे तीन

रिव्यू: यह गैंग्स ऑफ वासेपुर टाइप की फिल्म है। यह बात मन में बैठाकर थियेटर जाइए। बाबू 10 साल की उम्र से ही हत्याएं करने का काम कर रहा है। पहली हत्या उसने खाने के लिए की थी। बांके बाबू का फैन है और वह सुपारी किलर बनने का सपना देखता है। बांके की गर्लफ्रेंड यास्मीन (श्रद्धा) बॉलिवुड रीमिक्स पर डांस करती है और उसके लिए कॉन्ट्रैक्ट लाती है। बाबू की गर्लफ्रेंड फुलवा (बिदिता) उसे खत्म कर देने के लिए कहती है। पूरी फिल्म में आपको गोलियों की आवाज सुनाई देगी।

फिल्म में दो और किरदार हैं, सुमित्रा ( दिव्या) और दुबे (अनिल)। दोनों नेता की भूमिका में हैं और अपने फायदे के लिए इन दोनों बंदूकबाजों का इस्तेमाल करते हैं। इस खेल में स्थानीय पुलिस भी शामिल हो जाती है। बाबू अपनी गर्लफ्रेंड फुलवा के साथ मजे में रह रहा होता है लेकिन बांके की उस पर नजर पड़ती है और वह भी फुलवा की तरफ आकर्षित हो जाता है। 

स्क्रीनप्ले थोड़ी और टाइट करने की गुंजाइश थी। इसके बावजूद कुशन नंदी ने अच्छी फिल्म बनाई है। नवाजुद्दीन का एक खतरनाक किलर से प्रेमी में ट्रांसफॉर्म होना भी देखते ही बनता है। जतिन ने भी प्रभावित किया है और उनकी आवाज स्क्रीन अपील को बढ़ाती है। यह कहा जाए कि बॉलिवुड ने इस फिल्म के जरिए बिदिता की खोज की है तो अतिश्योक्ति नहीं होगी। वह कामोत्तेजक सीन्स में तो दमदार नजर आईं ही हैं, कुछ इमोशनल फ्रेम में भी बेजोड़ दिख रही हैं। हाय रे हाय मेरा घुंघटा में घुंघराले बालों वाली श्रद्धा ने पूरा बवाल काटा है। लोकल बहनजी के रोल में दिव्या दत्ता ने भी ठीक ठाक काम किया है।

फिल्म में पुलिस अफसर की भूमिका में भगवान तिवारी एक अलग ही रंग जमाते हैं. उनके फ़ोन की कॉलर ट्यून हो या लोगों के नाम शेव करने का अंदाज़ फ़िल्म के मूड को हल्का करता है. फिल्म के संवाद इसके प्लस पॉइंट हैं जो इस रस्टिक गैंगस्टर फिल्म के मूड को एंगेजिंग बनाता है. फिल्म का गीत संगीत कहानी के अनुरूप हैं.

https://youtu.be/8Bakp3UKa3c

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