डेस्क : एक तरफ़ देश को डिजिटल इंडिया बनाने की बात कही जा रही है तो दूसरी तरफ़ बिहार में सरकारी विद्यालय से कंप्यूटर शिक्षक को हटाया जा रहा हैं। प्रश्न यह उठता है कि जब सरकार को हटाना ही था तो पांच वर्ष पहले बहाली ही क्यों किया गया ? अपनी बर्ख़ास्तगी को लेकर शनिवार को बिहार कंप्यूटर शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा धरना किया गया। जिसमें ict@school project के अंतर्गत आनेवाले विद्यालय समन्वयकों (कंप्यूटर शिक्षकों ) ने भाग लिया। एसोसिएशन की एक सूत्री मांग है कि उन्हें स्थायी किया जाए ताकि वो सभी कंप्यूटर शिक्षक सड़क पर न आ पाए।
गौरतलब हो कि इन समन्वय शिक्षकों की नियुक्ति सितम्बर 2012 में की गई थी जिसे अब 5 साल बाद बर्खास्त किया जा रहा है। बर्ख़ास्तगी की सूचना से आहत शिक्षकों का कहना है कि हम सभी शिक्षकों ने अपने जीवन के महत्वपूर्ण पांच वर्ष बिहार सरकार के विद्यालय को समर्पित कर दिया लेकिन बदले में हमलोगों को क्या मिल रहा है- बर्ख़ास्तगी ? हमलोगों को विद्यालय से निकाल कर सरकारी विद्यालयों में अगर ऐसा हुआ तो भारत सरकार और बिहार सरकार का ‘डिजिटल बिहार’ बनाने का सपना हमेशा-हमेशा के लिए दूर हो जाएगा। हम शिक्षकों की मांग है कि हमें वेलट्रॉन से बदलकर आउटसोर्सिंग के तहत कर्मचारियों को सेवा विस्तार कर 60 वर्ष कर दिया जाए। जब तक हमलोगों की मांगे पूरी नहीं हो जाती धरना जारी रहेगा।
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