नरेश अग्रवाल के बारे में कहा जाता है कि वे राजनीति की हवा का रुख पहचानने में माहिर हैं. 1988-89 में जब यूपी में कांग्रेस कमजोर पड़ रही थी,तब नरेश अग्रवाल ने उसका साथ छोड़ दिया
लखनऊ,ब्यूरो: राज प्रताप सिंह।
लखनऊ।उत्तर प्रदेश की राजनीति में नरेश अग्रवाल एक बड़ा चेहरा हैं।लेकिन उनकी छवि एक बड़े दलबदलू नेता के रूप में भी बनी हुई है।सोमवार को बीजेपी का दमन थामने के बाद नरेश अग्रवाल अब प्रदेश की सभी बड़े दल को अपनी सेवाएं दे चुके हैं।कांग्रेस पार्टी से अपने राजनैतिक जीवन की शुरुआत करने वाले नरेश अग्रवाल सपा,बसपा के बाद बीजेपी में शामिल हो चुके हैं।इतना ही नहीं 1980 से सरकार चाहे किसी भी पार्टी की रही हो वे या उनके बेटे मंत्री भी जरुर बने।
नरेश अग्रवाल के बारे में कहा जाता है कि वे राजनीति की हवा का रुख पहचानने में माहिर हैं।1988-89 में जब यूपी में कांग्रेस कमजोर पड़ रही थी,तब नरेश अग्रवाल ने उसका साथ छोड़ दिया।1989 में कांग्रेस छोड़ने के बाद नरेश अग्रवाल ने 1997 अखिल भारतीय लोकतांत्रिक कांग्रेस का गठन किया और कल्याण सिंह, रामप्रकाश गुप्ता और राजनाथ सिंह सरकार में मंत्री भी बनें।
1998 में मुलायम सिंह की सरकार में भी नरेश अग्रवाल मंत्री बनें।हालांकि 2007 में बसपा की सरकार बनने के बाद वे सपा छोड़कर मायावती के संग हो लिए।नरेश अग्रवाल ने 2008 में बहुजन समाज पार्टी ज्वाइन की।हालांकि बसपा के साथ उनकी दोस्ती तीन साल ही चल सकी।2012 के यूपी विधानसभा चुनावों से पहले उन्होंने बसपा छोड़कर सपा का दामन थाम लिया।2011 में सपा में शामिल होने वाले नरेश अग्रवाल उस समय भी राज्यसभा सांसद थे।उन्होंने बेटे नितिन अग्रवाल को टिकट न मिलने पर बसपा छोड़ी थी।
1951 में यूपी के हरदोई जिले में जन्मे नरेश अग्रवाल ने लखनऊ उन्वेर्सिटी से लॉ और साइंस में ग्रेजुएशन की डिग्री ली।वे हरदोई से सात बार विधायक भी रहे।हरदोई सदर से उनके बेटे नितिन अग्रवाल तीन बार से विधायक हैं।कहा जाता है कि हरदोई की आठ विधानसभा क्षेत्रों में उनकी मजबूत पकड़ है।
नरेश अग्रवाल के बारे में यह भी कहा जाता है कि 1980 के बाद से प्रदेश की कोई भी सरकार रही हो वे उसके साथ जरुर हो जाते हैं। उनके राजनैतिक सफ़र को देखें तो यह सही भी मालूम पड़ती है।
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