चकरनगर(इटावा)रिपोर्टर:डाँ0एस.बी.एस.चौहान।
मौसम विभाग के आंकड़े जो प्रस्तुत किए जाते हैं उनमें अधिकांश रुप से कोई ना कोई बदलाव सामने आता दिखाई देता है मौसम विभाग जो बताता है उससे कभी-कभी आंकड़े सटीक नहीं बैठते हैं इससे कई बार नुकसान भी होते देखे गए हैं जिससे मौसम विभाग का पूर्वानुमान किसी-किसी पैमाने पर फेल होता दिखाई देता है। मौसम विभाग की रिपोर्ट और पूर्वानुमान के चलते बहुत सारे कार्यक्रम सरकारी गैर सरकारी चलाए जाते हैं लेकिन जब मौसम विभाग की रिपोर्ट पूर्वानुमान से मेल नहीं खाती है तो उससे होने वाली काफी कमियों का सामना भी करना पड़ता है। इससे संबंधित कुछ जानकारियां संकलित की गई है जिसके आधार पर हम कह सकते हैं कि भारतीय मौसम विभाग ने देशभर में चीनी उपकरणों का इस्तेमाल अभी तक लगातार किया है जिसके चलते मौसम विभाग की पूर्वानुमान रिपोर्ट की खामियों पर मौसम विभागीय अधिकारी विशेष चिंतित थे और उन्होंने उस कमी को खोज निकाला कि आखिर पूर्वानुमान बदल क्यों जाते हैं इस वजह को लेकर अधिकारियों ने यह निष्कर्ष निकाला कि जो सेटेलाइट से जुड़े हमारे उपकरण है वह चाइनीज है जिसके चलते पूर्वानुमान का आंकडा ठीक से काम नहीं करता है अब मौसम विभाग के अधिकारियों ने चाइना के बने उपकरणों को बंद करने का निर्णय लेते हुए बंद कर दिया है। भारतीय मौसम विभाग ने देशभर में चीनी उपकरणों का इस्तेमाल अब बंद कर दिया है। इसकी जगह दक्षिण कोरिया के उपकरणों को इस्तेमाल करने पर नजर है। विशेषज्ञों का तर्क है कि चीनी उपकरण सटीक नतीजे नहीं दे रहे थे– प्रशांत गुप्ता, मौसम विभाग रायपुर।
मौसम विभाग ने दो साल पहले ऊपरी हवा के दाब, गति, दिशा, तापमान, आद्रर्ता इत्यादि के आंकड़ों पर आधारित मौसम की सटीक जानकारी देने के लिए चीन से ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम-रेडियो साउंड (जीपीएस-आरएस) उपकरण खरीदे थे। इन उपकरणों की सप्लाई सभी मौसम केंद्रों में हुई थी। लेकिन अब इनका इस्तेमाल पूरी तरह से बंद कर दिया गया है।
विभाग ने देश के सभी मौसम केंद्रों को निर्देश दिया है कि जिन केंद्रों में ये उपकरण हैं, वे तत्काल इनका इस्तेमाल बंद कर दें। रायपुर मौसम विज्ञान केंद्र लालपुर में भी इन उपकरणों का इस्तेमाल बंद कर दिया गया है। मौसम विभाग के अधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार जीपीएस-आरएस उपकरण को रोजाना सुबह गुब्बारे (बैलून) में लगाकर मौसम केंद्र से आसमान में छोड़ा जाता था।ये उपकरण मौसम में बदलाव के जरूरी आंकड़े जुटा सैटेलाइट के माध्यम से केंद्र को भेजते थे। एक उपकरण का इस्तेमाल केवल एक बार ही किया जा सकता था। दूसरे दिन फिर नया उपकरण गुब्बारे के जरिए आसमान में छोड़ा जाता था। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक ठंड में भले ही इन उपकरणों का ज्यादा इस्तेमाल नहीं होता, लेकिन गर्मी और बरसात में इनका सर्वाधिक उपयोगिता सिद्ध होती है।गर्मी में ऊपरी हवा में आंधी-तूफान की स्थिति ज्यादा बनती है। अगर सही जानकारी नहीं मिल पाई तो यह स्थिति विमानों के संचालन में बाधा डाल सकती है।रायपुर केंद्र ने एक दी सूचना में बताया कि विभाग ने जीपीएस-आरएस उपकरण के लिए टेंडर जारी कर दिया है। फरवरी-मार्च में सभी केंद्रों को नए उपकरण मिल सकते हैं। जानकारों का मानना है कि चीन में बने उपकरणों के अलावा अन्य देशों में बने उपकरण भी भारत में इस्तेमाल किए जाते रहे हैं। अब चीनी उपकरणों के इस्तेमाल पर सरकार ने रोक लगा दी है।नए उपकरण दक्षिण कोरिया से लिए जाऐंगे यह केंद्र सरकार का पॉलिसी मैटर है। इस पर हम कुछ नहीं बोल सकते हैं, लेकिन अब हम चीन के उपकरणों का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं। ऐसी जानकारी है कि दक्षिण कोरिया से उपकरणों की सप्लाई फरवरी-मार्च तक हो जाएगी।
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