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स्वास्थ्य केंद्र राजपुर में स्टाफ की कमी और आपसी मतभेद से मरीजों के स्वास्थ्य के साथ हो रहा खिलवाड़

डॉ.एस.बी.एस.चौहान।

चकरनगर,इटावा।विकासखंड के अंतर्गत सीएचसी /सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र राजपुर पर चलते स्टाफ की कमी और आपसी मतभेद मरीजों के स्वास्थ्य के साथ हो रहा खिलवाड़, तो वहीं दूसरी तरफ स्टाफ से जुड़े कर्मचारी बेहद परेशान। ज्ञातव्य हो कि विकासखंड चकरनगर कंपाउंड में स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र राजपुर जहां पर साफ सैय्या का अस्पताल निदेशक डॉक्टर रामबाबू तिवारी की महती कृपा के स्थापित किया गया था, लेकिन इस अस्पताल का संचालन मूलभूत सुविधाओं से विहीन है जहां पर ड्यूटी दे रहे अधिकारी और कर्मचारी अपना रोना रो रहे हैं तो वहीं दूसरी तरफ मरीज बहुत बड़ी आशा लेकर जाते हैं पर वहां उन्हें केवल निराशा ही हाथ लगती है। कहीं इक्के-दुक्के मरीजों पर भले ही सफलता कारगर हो जाती हो पर ज्यादातर रेफर या वैरंग ही वापिस जाते हैं।

संवाददाता ने बीते दिवस डॉक्टर वरुणा चौधरी से परमिशन लेकर अस्पताल के अंदर जाकर व्यवस्था देखी जहां पर 98 आशा कार्यकत्रियों का प्रशिक्षण चल रहा था जिसमें डॉ आर पी कुशवाहा व बीपीएम की अनुमति के बाद आशा कार्यकत्रियों से रूबरू हुआ जहां पर कुछ कार्यकत्रियां अनुपस्थित थीं तो कुछ इधर उधर घूम रही थीं लेकिन मीडिया कर्मियों को जानकर वह सभी रूम में एकत्रित हो गई जहां पर उन्होंने अस्पताल प्रशासन की तरफ दबी जुबान में इशारा करते हुए बताया कि हम लोगों को वैसे कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन कुछ कार्यक्रम स्टाफ के सहयोग बिना अधूरे आभासित होते हैं। जब कार्यकत्रियों से पूछा गया कि क्या यहां का स्टाफ आपको परेशान करता है? तो उन्होंने दबी जुबान में यह बताया कि परेशान क्या करेगा जहां कार्य के सहयोग की बात की जाती है वह निराशा हाथ लगती है उसकी वजह यह कि स्टाफ यह कहकर कि अमुक आशा कार्य करने के योग्य नहीं है जब हम लोगों में से जो व्यक्ति कार्य करने के योग्य नहीं था तो उसका चयन क्यों किया गया, पढ़े लिखे कम है शिक्षित कम है ज्ञान कम है तो चयन क्यों हुआ? जब चयन हुआ है तो हर कार्य में सहयोग होना चाहिए और सहभागिता भी होनी चाहिए। इसके संबंध में एक महिला ने तो जोरदार शब्दों में इस बात पर भी जिक्र किया कि यदि अपनी जबान खोल दूं तो शायद निकाल कर बाहर कर दिया जाएगा इस पर दोबारा पूंछे जाने पर कार्यकत्री अपनी जुबान को दबा गई शायद लग रहा था कि उसके दिमाग में यह प्रतीत हो रहा था कि यह खबर अधिकारियों के पास जाएगी तो अधिकारी निलंबन का आदेश न दे दें। डॉ वरुण चौधरी से इस संबंध में पूछा गया तो उन्होंने यह बताते हुए कि हमारे यहां स्टाफ बहुत ही सब कुशल तरीके से जनता की सेवा कर रहा है कहीं भी किसी प्रकार की कोई लचक नहीं आने दी जा रही है। जब अधीक्षक डॉक्टर संदीप के बारे में पूछा गया तो बताया गया कि वह इटावा मीटिंग में गए हुए हैं अब हम यहां पर कुछ मरीजों से मिलकर जानकारी हासिल की है उससे प्रतीत होता है कि अस्पताल में यह चल रही पंगु व्यवस्था से मरीज बेहद परेशान हैं जो भी मरीज दवा के लिए जाता है उसे या तो बैठ कर इंतजार करना पड़ता है या फिर उसे दवा के नाम पर सिर्फ रोने की दवा दे दी जाती है। आशाराम 30 वर्षीय बताते हैं यहां पर स्टाफ जो भी मौके पर है अक्सर अधीक्षक के ऑफिस में बैठकर मटरगश्ती लेता है मरीजों की और मरीज वालों की नहीं सुनता है। विद्याराम 28 वर्ष बताते हैं कि इस अस्पताल का तो यह आलम है कि जिसे महंत योगी आदित्यनाथ किया मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम भी अवार्ड लें तब भी यहां की दशा को सुधारा नहीं जा सकता क्योंकि यहां का तो स्टॉप आपस में एक दूसरों को नीचा कराने की योजनाएं बनाते रहते हैं। सरला देवी 20 वर्ष बतातीं हैं कि मैं अस्पताल पर दवा के लिए गई तो मुझे डॉक्टर साहब ने दवा बहुत सुंदर दी और मुझे उस से काफी आराम मिला वहीं रामकली 70 वर्षीय बतातीं हैं कि अस्पताल के नाम पर यहां केवल बददुआ है। जो मरीज 4-6 किलोमीटर से दूर पैदल चलकर आता है कहीं डॉक्टर नहीं मिलता तो कहीं अन्य स्टाफ का व्यक्ति नहीं मिलता केवल फार्मासिस्ट प्रियंका सिंह जो अस्पताल के दवा वितरण कक्ष में बैठीं दिखाई देतीं है बाकी के लोग मौज मस्ती लेते हुए अधीक्षक के रूम में बैठे बतियाते रहते हैं और नहीं तो नाना प्रकार की योजनाएं जो गैर विभागीय हैं बनाते दिखाई देते हैं। यहां के स्टाफ का रोना यह है की जो भी स्टाफ यहां पर मौजूद है उसमें लगभग आधे से अधिक का स्टाफ जो संविदा के तौर पर कार्य कर रहा है यह संविदा के तौर पर काम करने वाले लोगों के अंदर सबसे बड़ी मायूसी इस बात की है उन्हें जो भी 10 या ₹5000 मेहनताने के दे दिए जाते हैं इससे उनका खर्चा वाहन नहीं होता है और अंतरात्मा में कष्ट महसूस करते हुए बेहद परेशान और दुखी हैं। इन कर्मचारियों का यह भी मानना है कि यदि सरकार स्थाई नियुक्ति न करें तो वेतन इतना तो दे कि जिससे चून की दो रोटियों का इंतजाम बखूबी किया जा सके। अस्पताल पर जो दवाई आती हैं उसके बारे में यह बात सत्य है कि अच्छी दवाएं यहां का स्टाफ निकाल कर लूट ले जाता है या उनकी सेलिंग प्राइवेट डॉक्टरों और मेडिकल स्टोर पर कर दी जाती है। याकि अपनी नाभि में समाहित कर लेने के लिए उपाय खोज लिया जाता है। जिलाधिकारी श्रीमती सेल्वा कुमारी जे से ग्रामीणों ने मांग करते हुए अनुरोध किया है उन्होंने अस्पताल का निरीक्षण ब्लॉक में बारम्बार आने के बाद भी कभी नहीं किया। क्या जिलाधिकारी महोदया यहां के स्वास्थ्य विभाग पर स्पेशल टीम भेजकर यहां का स्टॉक रजिस्टर और यहां पर उपलब्ध दवाओं की उपलब्धता के बारे में जानकारी करने के लिए अपना अमूल्य समय देंगी?

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