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कार्रवाई :: गर्भवती बबिता को दो मंजिलें छत से नीचे फेंकने के मामले में पति रमण ठाकुर गिरफ्तार

दरभंगा : गर्भवती बबिता को दो मंजिलें छत से नीचे फेंकने के मामले में पति रमन ठाकुर को पूछताछ के बाद दोषी मानते हुए पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया.

गौरतलब है कि दो दिन पूर्व जिले के मझोरा गांव में एक शर्मनाक वारदात हुई। पीड़ित बबिता देवी अपने किसी परिजन से बात करने के लिए अपने पति रमन ठाकुर से मोबाइल मांगी रमन ने भी मोबाइल कुछ बकझक कर अपनी पत्नी को दिया लेकिन पत्नी जबतक कही मोबाइल से बात करती उससे पहले ही रमन ने पत्नी से मोबाइल ले भी लिया इसी बात को लेकर विवाद शुरु हो गया विवाद इतना बढ़ा कि मामला मारपीट तक पहुंच गया पीड़िता और उनके परिजन की बात मानें तो बबिता की हत्या की नीयत से उसके पति और परिवार के लोगों ने बबिता को अपनी घर के दूसरी मंजिल छत से नीचे फेंक दिया , जिससे बबिता गंभीर रूप से न सिर्फ घायल हो गयी बल्कि उसके दोनों पैर टूट गए बल्कि बबिता के गर्भ में पल रहे सात माह के बच्चे की भी मौत उसके पेट में हो गयी । डाक्टर की मानें तो आपरेशन कर बबिता के पेट से मृत बच्चे को निकाला जाएगा लेकिन बबिता की हालत अगले तीन चार दिन तक ठीक रही तभी उसे बचाना मुमकिन होगा |

रमन और बबिता की शादी तक़रीबन पांच वर्ष पहले हुई ।पर मैथिल रीति रिवाज के अनुसार बबिता तीन साल बाद अपने ससुराल में पाँव रखी लेकिन पति बेरोज़गार होने के कारण ससुराल वाले हमेशा दहेज़ के लिए दबाव बनाते जिस कारण पति पत्नी और परिवार के बीच रिश्तों में खटास पैदा हो गया हांलाकि इस बीच बबिता ने दो बच्चो को जन्म भी दिया और तीसरा बच्चा पेट में पल  रहा था जिसकी घटना के बाद मौत हो गयी |

इधर आरोपित पति रमन ठाकुर अपने ऊपर लगे सारे आरोप को झूठा करार देते हुए बताया था कि बबिता खुद ही छत से कूद गयी इसमें उनका और उनके घर वालों का कोई हाथ नहीं । रमन की मानें तो बबिता छत से कूदने से पहले अपने दोनों नन्हे बेटे को भी जान से मारने के ख्याल से पहले छत से फेंका उसके बाद खुद भी छत से कूद गयी लेकिन यह बातें किसी को हज़म नहीं हो रही क्यूँकि छत से कूदने के बाद जहां बबिता अस्पताल के बिस्तर पर जिंदगी और मौत से जूझ रही है वहीं उसके दोनों नन्हे बेटे भले चंगे अस्पताल में खेल कूद रहे हैं हालांकि कुदरत के करिश्में के सामने कुछ भी संभव है लेकिन लोग इसे विश्वाश नहीं कर रहे |

इधर पुलिस को शिकायत मिलते ही एएसपी दिलनवाज़ अहमद ने मामले की गंभीरता को देखते प्राथमिकी दर्ज़ कर पीड़ित का बयान भी दर्ज़ कर लिया था।

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