उ.प्र. :: विधानसभा में मिला विस्फोटक, चालू सत्र के दौरान सदन में PETN से मचा हड़कंप

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डेस्क : यूपी विधानसभा के चालू सत्र के दौरान सदन में विस्फोटक मिला। विधानसभा के अंदर सफेद रंग का संदिग्ध पाउडर मिलने से हड़कंप मच गया। 150 ग्राम वजन के इस पाउडर को फरेंसिक लैब भेजा गया और गुरुवार को देर शाम आई FSL की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि संदिग्ध पाउडर PETN नाम का विस्फोटक है। क्या होता है यह PETN और कितना खतरनाक है? आइए जानें।

PETN(पेंटारिथ्राइटोल टेट्रानाइट्रेट) का 50 से100 ग्राम पाउडर एक कार या कमरे को उड़ाने के लिए काफी है। जानकार मानते हैं कि आतंकियों ने आरडीएक्स के अलावा पीईटीएन को पसंद करना इसलिए शुरू किया क्योंकि यह आसानी से पकड़ में नहीं आता। पीईटीएन विस्फोटों के मामलों में मेटल डिटेक्टर और जासूसी कुत्ते भी कई बार फेल हो जाते हैं। इसकी प्लास्टिक जैसी त्वचा इसे मेटल डिटेक्टर की कैचिंग पावर से परे कर देती है। इसके कुछ कणों का इस्तेमाल कुछ दवाइयों में भी होता रहा है, इसलिए बिना ज्यादा दिक्कत के यह मिल भी जाता है। सफेद रंग का यह चीनी जैसा दिखने वाला पाउडर पावर के मामले में बेहद खतरनाक है। दुनिया के चार-पांच सबसे खतरनाक विस्फोटकों में इसे शामिल किया जाता है।

यूपी असेंबली में बोलते हुए यूपी के मुख्यमंत्री ने कहा कि 500 ग्राम पीईटीएन से पूरी विधानसभा को उड़ाया जा सकता है। 1990-2000 और बाद के कुछ सालों में भी कुछ अफसर मानते थे कि यह पाउडर कई बार सिर्फ हीट से ही ब्लास्ट करा सकता है। यानी डेटोनेटर हो न हो, तो भी विस्फोट हो सकता है। हालांकि, इस दावे या सोच को लेकर विवाद रहे हैं पर है यह बेहद खतरनाक।

कब-कब सुनाई दी PETN की चर्चा
पीईटीएन का नाम पंजाब में आतंकवाद के दौर के समय पहली बार सुना गया था। पंजाब में सक्रिय खालिस्तानी उग्रवादी विस्फोटों के लिए वैसे तो आरडीएक्स का इस्तेमाल करते थे, लेकिन तब भी पीईटीएन का नाम अफसरों के बीच चर्चा का विषय रहता था। श्रीलंका में लिट्टे के लोगों और हमारे यहां पंजाब के उग्रवादियों द्वारा भी कुछ घटनाओं में इस विस्फोटक का यूज करने की चर्चा उन दिनों रही थी। यह ठीक से कहना मुश्किल है कि कितनी घटनाओं में यह सही में यूज किया गया?

दिल्ली में भी विस्फोटों का रेला एक समय रहता था। 1980 के उस दशक में खुफिया और पुलिस के अफसरों से कहा गया था कि वे पीईटीएन के बारे में जानें। फॉरेंसिक ट्रेनिंग और जानकारी लेने की बातें भी इस लिहाज से उस दौर में कई स्तरों पर हुई थीं। देश के कई स्थानों को हालांकि आरडीएक्स से किए गए विस्फोटों ने बुरी तरह हिलाया था लेकिन अफसरों के मन में पीईटीएन भी उस समय बराबर रहता था। बाद में अल कायदा, लश्कर-ए-तैयबा और हिजबुल द्वारा इस पाउडर का इस्तेमाल करने की चर्चा भी रही थी। कश्मीर में पट्टन की संभवत: 2003 की एक घटना में पीईटीएन यूज हुआ बताते हैं। दिल्ली हाई कोर्ट में 2011 में किए गए विस्फोट में भी पीईटीएन का यूज किए जाने की बात सामने आई है।