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रिलायंस जीओ में पनपा भ्रष्टाचार, बेरोजगारों का करते हैं शोषण !

उ०स०डेस्क :: रिलायंस जियो पिछले कुछ दिनों में शायद ही कोई शक्स हो जो इस नाम से वाकिफ न हो । हाल ही में रिलायंस जियो के प्रमुख मुकेश अंबानी ने 100 मिलियन ग्राहकों को जोड़ने की बड़ी उपलब्धि की घोषणा पर शेखी बघारते नजर आये । वहीं डिजिटल इंडिया की दुहाई देते हुये कई बार देश को डिजिटल बनाने और रोजगार देने की बात भी की जाती रही है । जहाँ रिलायंस जियो मुफ्त में सिम बाँटने की बात करता है वही कई जगहों पर सिम के बदले महँगी कीमत वसूलने की भी पुष्टि हुई है । रिलायंस जियो का दोहरा चरित्र यहीं खत्म नहीं होता हद तो तब हो गयी जब सरकारी महकमों में चर्चित भ्रष्टाचार को बहुत पीछे छोड़ ठगी का नया आयाम दिया गया । गलत तरीके से पैसे वसूलना ग्राहकों का दोहन करने के बाद रिलायंस ने फर्जी तरीके से बेरोजगार युवाओं को नौकरी का झांसा देकर दो-तीन महीने काम कराने के बाद अब बिना पैसे दिए नौकरी से निकालने की घटना सामने आयी है जो अतिअमानवीय, असंवैधानिक और शर्मशार कर देने वाली बात है ।

जानकारों की माने तो इन सारे घटनाक्रम में कंपनी के नीचे से ऊपर सभी कर्मचारीयों की मिलीभगत है। वही कंपनी में काम करने वाले एक कर्मचारी ने अपनी पहचान गुप्त रखने के शर्त पर बताया कि हमें ऊपर से ही ऐसे आदेश आते हैं । कर्मचारी ने यह भी बताया की कंपनी से मिलने वाला इन्सेंटिव लेने और टारगेट पुराने के लिए कई बेरोजगारों को झांसा देकर काम करवाया जाता है और फिर काम पूरा होने के बाद हटा दिया जाता है । ऐसी हीं एक घटना बिहार के दरभंगा जिले से प्रकाश में आयी है जहाँ कई बेरोजगारों को नए उत्पाद जियो मनी मर्चेंट के टारगेट को पूरा करने के लिए कई बेरोजगारों को नौकरी का झांसा दिया गया और काम करवाने के बाद हटा दिया गया। दरभंगा जिले के पुअर होम चौक स्थित जियो कार्यालय के अधिकारी आशीष कुमार और प्रशांत कुमार दरभंगा शहर एवं आस-पास के ग्रामीण क्षेत्रों से बेरोजगार युवाओं को नौकरी का झांसा देकर काम करवाने के बाद कंपनी से अप्रूवल नहीं मिलने और पैसे देने की आवंटन नहीं आने को वजह बताते हुये निकाल देते है। जहाँ रिलायंस जियो की गिनती देश के बड़े कंपनियो में की जाती है वही रिलायंस के पास कर्मचारियों से काम करवाने के बाद पैसे देने के समय गरीबी छा जाती है । यहां तक बेरोजगारों को रोजगार मिलने पर वो लोग मोटरबाईक में पेट्रौल तक अपने अभिभावक से पैसे लेकर भराते हैं। फिर रूम किराया व रहन सहन का पूरा खर्च अभिभावक से ही लेते हैं। परंतु जब सैलरी मिलने के बजाय नौकरी से निकाल दिया जाता है तो जरा सोचिये कि उन पर क्या बीतती होगी। इतना ही नहीं बेरोजगार बच्चों को रोजगार मिलने की खुशी उनके परिजनों को बहुत होती है मगर कुछ ही दिन बाद वो खुशी को गम में बदलते देर नहीं लगती। रिलायंस जिओ के इस रूप को देखकर परिजनों की भावना को जितनी ठेस पहुंचती है उसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती। यह काफी दुर्भाग्यपूर्ण है कि जियो के प्रमुख जहाँ अच्छे समाज रोजगार जैसे जुमले सुनाते हैं वहीं समाज में भ्रष्टाचार पैदा करने का काम करते हैं। रिलायंस जियो पर यह मुहावरा खूब बैठता है कि नाम बड़े और दर्शन छोटे इन सारे घटनाओं की जानकारी शायद ही आला अधिकारियों को न हो मगर इन्हें इसकी सुध लेने की फुर्सत नहीं है । अगर ऐसा ही चलता रहा तो वो दिन दूर नहीं जब रिलायंस जियो विवादो से घिरा होगा और संभवतः रिलायंस जियो के प्रमुख अपने 100 मिलियन ग्राहकों के बाद बड़े विवादों की घोषणा करेंगे ।

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