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बिहार :: क्या मज़लूम शहज़ादी को मिल पाएगा इंसाफ?

बिहार, दरभंगा। (इम्तेयाज़ अहमद)
जाले थाना क्षेत्र के मुरैठा पंचायत गांव छोटी महुली निवासी शहज़ादी खातून पति मो0 दाऊद पिछले करीब साढ़े तीन महीनों से अपने दो मासूम बच्चे और बूढ़े बीमार पिता समीद नदाफ के साथ इस ठंड के मौसम में बेघर और बेसहारा जिन्दगी जीने पर मजबूर है।
शहज़ादी के अनुसार जिनलोगों के कारण उनके परिवार के सर से छत छिन गई, पुरे सर्दी के मौसम में दर दर की ठोकरें खानी पड़ रही है, वह कोई और नहीं बल्कि कानून के रखवाले और समाज के ठेकेदार कहे जाने वाले लोग ही हैं।
शहज़ादी ने इलज़ाम लगाया है के जाले थाना पुलिस ने गांव के ही कुछ असामाजिक तत्वों के साथ मिल कर उसके घर को उजाड़ दिया और थाना प्रभारी दुआरा उसके बूढ़े पिता को मारा भी गया। इस घटना के सम्बन्ध में शहज़ादी तब से लेकर आज तक न्याय की आस में सरकारी कार्यालयों की खाक छान रही है, मगर बकौल शहज़ादी अभी तक निराशा ही हाँथ लगी है।

दिनांक 7/2/17 को इसी मामले को लेकर अनुमंडल लोक शिकायत निवारण दरभंगा कार्यालय में शहज़ादी की शिकायत पर सुनवाई की तारीख़ थी, जहां से परिवादी शहज़ादी खातून को बिना सुनवाई के ही मायूस खाली हाँथ लौटना पड़ा, और अगर कुछ मिला तो वह थी अगली तारीख़, वो भी ये कहते हुए के इस घटना से सम्बंधित जिम्मेदार पदाधिकारी आज की तारीख में उपस्थित नहीं हो सके। सुनवाई की अगली तारीख़ 28 फरवरी की थी लेकिन 28 फरवरी को भी पीड़ित शहज़ादी को अगर कुछ मिला तो वही अगली तारीख़। एक तरफ वो गरीब बेसहारा परिवार है जो पिछले तीन महीनों से बिना घर के दर दर की ठोकरें खा रहा है, वहीँ दूसरी तरफ सूट बूट वाले सरकारी बाबू हैं कि जिन्हें तारीख़ पर आने की शायद फुर्सत नहीं मिलती?

 

आइये अब पूरे मामले को जरा विस्तार से समझते हैं।
पीड़ित के आवेदन अनुसार गत वर्ष दिनांक 28/10/16 की शाम करीब 5 बजे जाले थाना पुलिस शहज़ादी के घर पर आई और उसके पिता समीद नदाफ के साथ दुर्व्यवहार करते हुए ये कहा के तुमने सरकारी जमीन पर अपना घर बना रखा है, जिस कारण यहाँ के तालाब में छठ पूजा मनाने वाले लोगों को कठिनाई होती है इसलिए ये जगह तुम्हें खाली करनी पड़ेगी। इस पर समीद ने थाना प्रभारी से कहा के ये जमीन मेरी है मैं घर छोड़ कर क्यों जाऊं? फिर क्या था थाना प्रभारी इतनी सी बात पर आग बगुला हो उठे और समीद के गाल पर कई थप्पड़ रसीद कर दिया, और जाते जाते धमकी भी दे डाला के दो तीन दिनों में घर खाली करके यहाँ से चले जाओ वरना मैं खुद तुम्हें यहाँ से उजाड़ दूंगा।
समीद नदाफ को अपने ही हक़ के लिए आवाज़ उठाना भारी पड़ गया। दो दिन बाद 31/10/16 की शाम करीब 6 बजे जब दोबारा जाले थाना पुलिस समीद के घर पर आई और देखा के घर अभी तक खाली नहीं हुआ है तो पुलिस वाले आक्रोशित हो गए और अपने कहे अनुसार पीड़ित के घर की छप्पड़ को तोड़ना शुरू कर दिया और घर में रखे समान को भी इधर उधर फैंक दिया इस बीच पीड़ित शहज़ादी का परिवार डर के मारे चीखता और चिल्लाता रहा मगर किसी को उसपर तरस नहीं आया। यहाँ तक के पीड़ित का आधा से ज्यादा घर उजाड़ दिया गया, उसके बाद पुलिस दुआरा समीद और उसके परिवार को दोबारा धमकाते हुए आदेश दिया के अभी भी वक़्त है चुप चाप घर खाली करके चले जाओ वरना अंजाम इससे भी बुरा होगा।

शहज़ादी के अनुसार दिनांक 1/11/16 को उसने SSP के कार्यालय में इस घटना की लिखित शिकायत दर्ज कराई, जिसकी खबर कुछ स्थानीय अख़बारों में भी छपी, जिसके बाद दिनांक 4/11/16 को एक बार फिर से पुलिस वाले अपने दल बल के साथ घटना स्थल पर पहुंचे, साथ ही जाले प्रखंड के अंचलाधिकारी,थाना प्रभारी,उप प्रमुख, मुखिया सरपंच और कुछ स्थानीय नेतागण भी मौके पर पहुँचे और ये सभी लोगों ने आपस में ही वार्तालाप किया और शायद इस नतीजे पर पहुँचे के समीद के आधे टूटे बचे घर को भी तोड़ के हटा दिया जाए, और फिर थोड़ी ही देर बाद इन सभों की मौजूदगी में समीद के बाकी बचे घर के हिस्से को भी तोड़ दिया गया।
उसके बाद बिना समीद नदाफ और उसकी पुत्री शहज़ादी को सम्मिलित किए हुए ही सरकारी बाबुओं और समाज के ठेकेदारों ने एक पंचनामा तैयार किया और जबरन उस पंचनामे पर समीद और शहज़ादी से अंगूठा लगवा लिया गया, वो भी पंचनामे में लिखी बातों को पढ़ कर सुनाए बग़ैर।
पंचनामे की प्रति भी शहज़ादी को दूसरे दिन मुखिया के माध्यम से मिली वो भी तब जब शहज़ादी खुद मुखिया से मिलकर पंचनामे की प्रति के बारे में सवाल किया, शहज़ादी ने मुखिया से पंचनामे में लिखे गए फैसले के बारे में पूछा तो मुखिया ने बताया के इसमें यही लिखा है के सरकार के दुआरा तुम्हें 18 धूर जमीन और साथ ही एक लाख पैंतीस हज़ार रुपया भी दिया जाएगा, इस पर शहज़ादी ने मुखिया से पूछी के क्या ये फैसला न्यायसंगत है? इस पर मुखिया का जवाब डराने वाला था मुखिया ने कहा के तुम क्या कर पाओगी वो लोग ताकतवर हैं तुम उनलोगों से जीत नहीं सकती।
जब शहज़ादी ने उस पंचनामे को गांव के किसी अन्य व्यक्ति से पढ़वाया तो पता चला के पंचनामे में ना तो 18 धूर जमीन और ना ही एक लाख पैंतीस हज़ार रुपये का कोई जिक्र है, और ना ही उस पंचनामे में किसी पंच का नाम लिखा था। बल्कि इसके उलट पंचनामे में लिखा था के समीद नदाफ ने अपनी मर्ज़ी से अपने घर को तोड़ कर हटा लिया है, जिस कारण तत्काल वो बेघर हो गए हैं इसलिए अविलम्भ समीद को मुखिया दुआरा इंद्रा आवास मुहैय्या कराया जाएगा।
शहज़ादी ने बताया के पिछले महीने 1 जनवरी को उसकी जमीन पर स्थानीय विधायक जीवेश कुमार दुआरा मन्दिर और घाट निर्माण कार्य का शिलानियास भी कर दिया गया है, साथ ही उक्त स्थान पर विधायकजी के नाम वाला शिलापट भी चमचमाने लगा है, और निर्माण कार्य की सामग्री भी स्थल पर गिरा दी गई है। जबके शहज़ादी ने दिनांक 11/11/16 को ही Email के जरिए इस पुरे घटना की शिकायत DGP, DIG, SSP और DM से भी कर चुकी थी मगर आज तक शहज़ादी की किसी ने खबर नहीं ली।
तो आज भी ये सवाल अपनी जगह कायम है कि क्या मज़लूम शहज़ादी को इंसाफ मिल पायेगा, क्या उनलोगों को वाक़ई सज़ा मिल पाएगी जिन्होंने शहज़ादी और उनके परिवार पर बेशुमार जुल्म ढाए हैं?
वहीँ दोसरी ओर इतनी सारी तकलीफें झेलने के बाद भी शहज़ादी का हौसला बुलंद दिखाई दिया, और यही कहती रही के चाहे जितना भी दौड़ना पड़े चाहे जहाँ भी जाना पड़े अपने साथ हुए अन्याय का हिसाब लेकर रहुंगी, मुझे मेरे मुल्क की न्याय व्यवस्था पर पूरा भरोसा है इसलिए मुझे न्याय जरूर मिलेगा।

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