डॉ.एस.बी.एस.चौहान।
चकरनगर,इटावा।मौसम के मिजाज को देखते हुए कठबेरियों में वेर हर वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष फसल का माहौल बहुत ही सुहावना और खूबसूरत लग रहा है| बेर के शौकीन लोगों में और खासकर बिक्री करने वाले दुकानदारों में काफी खुशी नजर आ रही है| विकासखंड चकरनगर के अंतर्गत इस वर्ष कठवेरियों में आई फसलें बेहद खुशियों का नजारा बिखेर रहीं हैं इस वर्ष की फसल पर अगर गौर किया जाता है तो यह देखने में आया कि कठवेरियों में जो फसल इतनी बेतहाशा वृद्धि के साथ आए हुए हैं कि जिससे बेरियों की डालियां वजन की वजह से मानो झुककर फटी जा रही हों इस संबंध में मुन्नीलाल वेर दुकानदार बताते हैं कि हर वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष कठवेरियों में बेरों की फसल बहुत अच्छी है इससे व्यवसाय कुछ अच्छा ही चलने के चांस दिखाई दे रहे हैं| प्यारेलाल 55 वर्षीय बताते हैं कि जैसे बुजुर्गों की यह मिशाल थी कि जब फसल खराब हो तो कठवेरियों में वेर और झरवेरियों में वेर बहुत अच्छे आते हैं लेकिन इस मिसाल को चैलेंज प्रकृति ने करते हुए यह दिखाया है कि ऐसा नहीं हमारी फसलें गेहूं से लेकर और अरहरा और लाह तक की अच्छी फसलों के रूप में है उधर कठवेरियों में बेर भी बहुत अच्छी तरीके से लगे हुए हैं जिससे बोझा की वजह से उनकी डालें फटी जा रही हैं| पिछले दिवस महाशिवरात्रि के पर्व काल में भी लोगों ने इन कठबेरियों के फलों का व्रत में जहां एक तरफ भगवान शंकर के मंदिरों में जलाभिषेक के समय चढ़ाए तो वही खुद भी इस्तेमाल किए |नन्हे-मुन्ने बच्चों में प्रियंका 10 वर्ष बताती है कि मुझे दुकानों पर बिकने वाला खट्टा मीठा चूर्ण बहुत अच्छा लगता है मैं दिन में कई बार इसको खातीं हूं | 8 वर्षीय राजन बताता है कि यह खट्टा मीठा चूर्ण मुझे बहुत अच्छा लगता है |इस संबंध में जब दुकानदार अरुण सिंह से बात की गई तो उन्होंने बताया कि यह खट्टा मीठा चूर्ण जो खासकर जर बेरियों के बेर से और कठवेरियों के बेर को गुठली सहित पूरे फल को सुखाकर पीस कर उसमें टेस्टिड खाद्य सामग्री डालकर टेस्टी बनाकर पाउचों में पैक होकर आता है जो छोटे-छोटे बच्चे इसे बहुत ही लाइक करते हैं |जब इस संबंध में क्षेत्र का कुछ किसानों से बात की गई तो उन्होंने यह बताया कि कठबेरियों के बेर तो फसल की बात है, जो झरबेरियों में वेर लगते हैं इनका तो मौसम ही निकल गया है लेकिन उसके बावजूद भी झरवेरियों में आज भी वेर मौके पर लगे हुए हैं जो यह एक आश्चर्य की बात दिखाई देती है |इसका एक चित्र जो छोटी-छोटी झरवेरियाँ जिनकी ऊंचाई 6 इंच से लेकर अधिकतम 3 फुट तक होती है यह इन कठवेरियों से काफी पहले फसल आकर पहले की फसल खत्म हो जाती है लेकिन अब की बार ऐसा नहीं हुआ और इन कठवेरियों के बेर के समय भी झरवेरियों में फल कच्चे से लेकर पके तक लगे हुए हैं जो यह एक आश्चर्य चकित करती है।
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