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भागलपुर में काली मंदिर की जमीन पर फिर संकट, पुराने विवाद से लौटा तनाव, प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की मांग

भागलपुर में एक बार फिर धार्मिक स्थल से जुड़ा पुराना भूमि विवाद सतह पर आ गया है। उर्दू बाजार स्थित काली मंदिर की दान की गई जमीन को लेकर बढ़ते तनाव ने स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी है। बीते वर्षों में इस विवाद ने हिंसक रूप भी लिया था और अब उसी तरह की आशंकाएं दोबारा जन्म लेने लगी हैं। भूमाफियाओं की सक्रियता और कथित कब्जे की कोशिशों ने इलाके के माहौल को फिर से संवेदनशील बना दिया है।

वर्षों से चले आ रहे इस विवाद का केंद्र काली मंदिर की वह जमीन है, जिसे कंठी देवी ने दान स्वरूप मंदिर को सौंपा था। स्थानीय लोगों का कहना है कि मंदिर की यह कीमती जमीन लंबे समय से कुछ असामाजिक तत्वों की नजर में है। आरोप है कि जमीन पर अवैध कब्जा करने के लिए लगातार दबाव बनाया जा रहा है और विरोध करने वालों को धमकियां भी मिल रही हैं।

सोमवार को स्थिति उस समय और गंभीर हो गई, जब मुहल्ले के सैकड़ों लोग मंदिर की जमीन की सुरक्षा की मांग को लेकर तातारपुर थाना पहुंचे। लोगों ने पुलिस अधिकारियों से मुलाकात कर जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराने और विवाद का स्थायी समाधान निकालने की गुहार लगाई। उनका कहना था कि यदि समय रहते प्रशासन ने सख्त कदम नहीं उठाए, तो हालात बिगड़ सकते हैं।

इस विवाद का एक दर्दनाक पहलू भी रहा है। पूर्व में पूजा समिति के अध्यक्ष रहे धूरी यादव की हत्या को आज भी लोग नहीं भूले हैं। आरोप है कि मंदिर की जमीन बचाने की लड़ाई में उन्होंने अपनी जान गंवाई थी। स्थानीय लोगों का दावा है कि उस समय भी भूमाफियाओं ने जमीन हड़पने के इरादे से हिंसा का सहारा लिया था। अब एक बार फिर उसी तरह की परिस्थितियां बनती दिख रही हैं, जिससे मुहल्लेवासियों में भय और असुरक्षा का माहौल है।

चार दशक पूर्व के पूजा समिति अध्यक्ष और स्थानीय लोगों का कहना है कि मंदिर की लगभग डेढ़ कट्ठा जमीन को लेकर विवाद जानबूझकर खड़ा किया जा रहा है। जमीन पर कब्जे का विरोध करने पर लोगों को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकियां दी जा रही हैं। इससे न केवल सामाजिक सौहार्द प्रभावित हो रहा है, बल्कि कानून-व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

मामले की गंभीरता को देखते हुए मुहल्लेवासियों ने सामूहिक रूप से थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई है। प्रशासन की ओर से अंचल अधिकारी की मौजूदगी में अमीन से मंदिर की जमीन की मापी कराने का आश्वासन दिया गया है। हालांकि, लोगों का कहना है कि केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा, बल्कि जमीन को स्पष्ट रूप से चिन्हित कर उसे सुरक्षित करना जरूरी है।

फिलहाल काली मंदिर की दान की गई जमीन को लेकर विवाद फिर से गहराता नजर आ रहा है। स्थानीय लोगों को आशंका है कि यदि जल्द ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो यह मामला भविष्य में हिंसक रूप भी ले सकता है। ऐसे में प्रशासन के लिए यह जरूरी हो गया है कि वह निष्पक्ष जांच कर जमीन की स्थिति स्पष्ट करे और अवैध कब्जे की कोशिशों पर सख्ती से रोक लगाए।
कुल मिलाकर, यह विवाद अब केवल जमीन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आस्था, सुरक्षा और कानून-व्यवस्था से जुड़ा मुद्दा बन चुका है। समय रहते प्रशासनिक हस्तक्षेप ही इस तनावपूर्ण स्थिति को शांत कर सकता है और इलाके में शांति व विश्वास बहाल कर सकता है।

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