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बाबा नागार्जुन की कवितायें अब भी प्रासंगिक, जल जीवन हरियाली अभियान की व्याख्या करते बोले सीएम नीतीश कुमार

जनकवि नागार्जुन की धरती से सीएम नीतीश कुमार का संबोधन

दरभंगा : जनकवि नागार्जुन की धरती से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने नागार्जुन की कविताओं को उदृढ़ करते हुए जल जीवन हरियाली अभियान के औचित्य पर प्रकाश डालते हुए वे कहा कि जीवन के लिए जल और हरियाली आवश्यक है और इसके बिना जीवन संभव नहीं है।

मुर्तुजापुर में सार्वजनिक सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जल जीवन हरियाली अभियान शुरू करने की प्रेरणा मिथिला और खासकर दरभंगा से मिली। जब उन्हें जानकारी मिली कि दरभंगा जो कि तालाबों के लिए मसहूर है वहां भी भूगर्भीय जलस्तर काफी नीचे चला गया। तब उन्हें खतरे की घंटी महसूस हुई। तब 13 जुलाई को विधानमंडल सदस्यों की एक संयुक्त बैठक बुलायी। बैठक 8 घंटे तक चली और इसी बैठक में जल जीवन हरियाली अभियान चलाने का निर्णय लिया गया और इस अभियान के लिए 11 सूत्री कार्यक्रम का मिशन मोड में पूरा करने का निर्णय लिया, ताकि जलवायु परिवर्त्तन के कारण उत्पन्न संकट से लोगों को निजात दिलाया जा सके। उन्होंने कहा कि पहले बिहार में 15 जून से मानसून की शुरूआत हो जाती थी और औसतन 1200 से 1500 मिलीलीटर वर्षापात होती थी।

13 वर्षों के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि 901 मिलीलीटर वर्षा होती है और वह भी कब होगी इसका कोई अंदाजा नहीं है। उन्होंने कहा कि इस अभियान से जलवायु के अनुकुल कृषि कार्यक्रम को भी जोड़ा गया है और मौसम के अनुरूप फसल का चुनाव हो। इसके लिए 8 जिलों में कृषि विशेषज्ञों की मदद से अभियान चलाने का निर्णय लिया गया है और इस अभियान में आगे जाकर अन्य जिलों को भी शामिल किया जायेगा। उन्होंने कहा कि चार तरह के कृषि यंत्र पर सरकार ने 75 प्रतिशत सब्सिडी देने का निर्णय लिया है और एससी/एसटी को 80 प्रतिशत दिया जायेगा। क्योंकि पंजाब हरियाणा का देखा-देखी अब बिहार में भी फसल अवशेष जलाने की परम्परा शुरू हो गयी है। जिसे देखते हुए ऐसे मशीन खरीदने के लिए सरकार मदद दे रही है, ताकि फसल के कटाई के समय ही अवशेष का बंडल बना दिया जाय और वह चारा का उपयोग में आ जाय। मुख्यमंत्री ने कहा कि मैं मानता हूँ कि लोगों की बैलों पर निर्भरता कम हो गयी है। लेकिन गाय तो हैं। उन्होंने गायों की संख्या बढ़ाने को कहा और कहा कि सरकार भी सहायता देगी, ताकि फसल का अवशेष जलाया नहीं जा सके। उन्होंने कहा कि इससे खेतों की उर्वरा शक्ति भी घटती है और वातावरण पर प्रतिकुल असर पड़ता है।

मुख्यमंत्री ने जल जीवन हरियाली अभियान का विस्तृत व्याख्या करते हुए कहा कि नागार्जुन की कवितायें अब भी प्रासंगिक है। क्योंकि बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में 89 प्रतिशत लोग निवास करते हैं और 76 प्रतिशत लोग कृषि पर निर्भर है। उन्होंने कहा कि बिजली का वायदा तो उन्होंने पूरा किया और हर घर तक बिजली पहुंचा दी। वहीं घर-घर जल का नल का काम भी चल रहा है और चुनाव में आने से पहले यह कार्य पूरा कर लिया जायेगा, ताकि मेरा वायदा पूरा हो सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब पूरे देश में केन्द्र सरकार हर घर नल का जल और बिजली पहुंचाने का निर्णय लिया है। लेकिन बिहार यह काम पूरा कर चुका है। मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड से अलग होने के बाद बिहार में हरित आवरण मात्र 9 प्रतिशत ही रह गया था और वर्ष 2012 से हरियाली मिशन के तहत पूरे बिहार में 19 करोड़ पौधे लगाये गये। जिसके बाद बिहार का ग्रीन कवर एरिया बढ़कर 15 प्रतिशत पर पहुंच गया और अब जल जीवन हरियाली अभियान के तहत तीन वर्षों में 8 करोड़ पौधे लगवाये जायेंगे, ताकि हरित आवरण 17 प्रतिशत से अधिक हो सके।

मुख्यमंत्री ने नल के जल के शुद्धता पर भी चर्चा की और कहा कि यह शुद्ध जल है। इसलिए इसका दुरूपयोग नहीं करें। उन्होंने कहा कि हर घर नल का जल के साथ-साथ सभी चापाकल चालू रखा जायेगा। साथ ही जितने सरकारी तालाब हैं उनका अतिक्रमण मुक्त कर उसे जीर्णोद्धार किया जायेगा। मुख्यमंत्री ने बिजली का दुरूपयोग भी नहीं करने की सलाह दी और कहा कि बिजली तो घर-घर पहुंचा दिये हैं। लेकिन यह कोयला से बनता है। कोयला खत्म होते ही बिजली ठप हो जायेगा। इसलिए इसका दुरूपयोग नहीं करें और सौर्य ऊर्जा पर विशेष अभियान चलाया जायेगा और सौर्य ऊर्जा का उपयोग करें। मुख्यमंत्री ने 19 जनवरी को एक बार फिर मानव शृंखला बनाये जाने की बात की और इसमें सबों को भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए अनुरोध भी किया।

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