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बिहार : मुखिया महासंघ की बैठक में कई अहम निर्णय पारित !

panchayatमधुबनी (अंधराठाढ़ी) : स्थानीय प्रशासन और मुखिया प्रतिनिधियों के बीच तनातनी बढ़ती जा रही है। विकास कार्य और जनकल्याणकारी योजनाओं में हो रही देरी और प्रशासनिक हस्तक्षेप मुखियाओं को अखरने लगी है। प्रखंड में चल रही सभी लाभकारी जनकल्याण की योजनाओं में शिथिलता व्याप्त है। प्रभावित जनता निराश और हताश है। इसी बात को लेकर स्थानीय कोशी निरिक्षण परिसर में शनिवार को मुखिया महासंघ की एक बैठक हुई। बैठक की अध्यक्षता संघ के अध्यक्ष अरविन्द चौधरी और सञ्चालन राजेश कुमार मिश्रा ने की। बैठक में पंचायत के विकास और उसमें लगातार आ रही रुकावटों के बारे में विस्तृत चर्चा की गयी। सभी उपस्थित मुखिया ने सरकार और प्रखंड प्रशासन के द्वारा मुखिया के विकास कार्यो में साजिश के तहत बाधा पहुँचाने का आरोप लगाया।

बैठक को संबोधित करते हुए अध्यक्ष अरविन्द चौधरी ने कहा सरकार पंचायती व्यवस्था और मुखिया के साथ दोहरा मापदंड अपना रही है। 14वें वित्त आयोग की राशि में मुखिया को पंचायत के विकास मद में केवल 20 प्रतिशत की भागीदारी दी गयी है। पंचायत की 80 फीसदी राशि मुख्यमंत्री की सात निश्चय योजनाओं में खर्च करने का निर्णय मुखिया के विकास कार्यो में बाधा पहुंचाने का प्रयास है। पंचायती राज व्यवस्था के तहत पंचायत का विकास मुखिया के जिम्मे है। संघ इस निर्णय की आलोचना करता है और इसके खिलाफ न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की सोच रहा है।

मुखिया महेंद्र राय ने कहा प्रखंड प्रशासन के मनमाने रबैया के कारण पंचायत का विकास अटका पड़ा है। प्रखंड प्रशासन विचौलियों से घिरा हुआ है। जनकल्याण की सारी योजनाएं बीडीओ की निष्क्रियता के कारण ठप्प है। पारिवारिक लाभ की राशि पिछले दिसंबर को ही आ चुका है। मगर लाभुक प्रखंड के बार बार चक्कर लगाने को विवस हैं।

मुखिया रामसागर यादव ने कहा कन्या विवाह योजना, कबीर अंत्येष्ठि योजना का लाभ सालों से लाभुकों को नहीं मिला है। गरीब और असहाय लोग हताश और निराश हैं।

मुखिया राजाराम यादव ने कहा वृद्धवस्था पेंसन के लिए प्रखंड में त्राहिमाम मचा है। लाभुक राशि के आभाव में दाने दाने के लिए मोहताज हैं। बुजुर्ग गरीब लाभुक दबा दारू के आभाव में तिल तिल कर मरने को मजबूर हैं। मगर प्रखंड प्रशासन और संबंधित अधिकारी कुम्भकर्ण की नींद सोये हैं। मुखिया राजेश कुमार मिश्रा ने कहा पिछले जनवरी से मनरेगा के मजदूरों का भुगतान नहीं हुआ है। मजदुर और उनका परिवार भूखों मरने को विवस हैं। सभी मुखियाओं ने एकस्वर में कहा 24 जून 2016 से शपथ लेने के बाद प्रखंड प्रशासन की मनमानी के कारण कोई भी जनहित का काम नहीं हुआ है। अगर जल्दी ही सरकार और प्रशासन ने उचित कदम नहीं उठाया तो मुखिया संघ जोरदार आंदोलन करेगा और अपने हकोहुकुक के लिए सड़क पर उतरने के लिए मजबूर हो जायेगा। बैठक में करीब करीब सभी पंचायत के मुखिया उपस्थित थे।

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