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वैशाली अस्पताल में नवजात को लेकर बवाल, बेटे की सूचना के बाद बेटी सौंपने का आरोप

बिहार के वैशाली जिले के सदर अस्पताल में एक नवजात को लेकर ऐसा विवाद खड़ा हो गया, जिसने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी। प्रसव के बाद परिजनों को पहले बेटे के जन्म की जानकारी दी गई, लेकिन कुछ ही देर बाद जब नवजात को कपड़े में लपेटकर सौंपा गया तो वह बच्ची निकली। इसके बाद अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा हुआ। परिजनों ने आरोप लगाया कि अस्पताल के अंदर उनके बच्चे की अदला-बदली की गई है। घटना के बाद डॉक्टर और नर्स के मौके से गायब होने की बात भी सामने आई है, जिससे मामले ने और तूल पकड़ लिया।

मिली जानकारी के अनुसार, गोरौल थाना क्षेत्र के इस्लामपुर निवासी धीरज कुमार की पत्नी गुंजन देवी को प्रसव पीड़ा होने पर वैशाली सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। गुरुवार को करीब 12 बजे डॉक्टरों ने ऑपरेशन के जरिए प्रसव कराया। ऑपरेशन के बाद परिवार को अस्पताल कर्मियों की ओर से बताया गया कि गुंजन ने बेटे को जन्म दिया है। यह सुनते ही परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई। परिजन मिठाई बांटने की तैयारी में जुट गए और इसी बीच परिवार ने यह सोचकर कि अब परिवार पूरा हो गया है, नसबंदी कराने की सहमति भी दे दी।

परिजनों का कहना है कि उनकी पहले से चार साल की एक बेटी है और बेटे के जन्म की सूचना मिलने के बाद उन्होंने भविष्य की योजना बनाते हुए स्थायी परिवार नियोजन का निर्णय लिया। आरोप है कि अस्पताल स्टाफ ने भी उन्हें इसी आधार पर नसबंदी के लिए तैयार किया। हालांकि करीब एक घंटे बाद जब नवजात को कपड़े में लपेटकर मां के पास लाया गया और परिजनों को दिखाया गया, तो सभी हैरान रह गए। परिजनों के अनुसार, नवजात बच्ची थी, जबकि उन्हें पहले बेटे के जन्म की जानकारी दी गई थी।

इस घटना के बाद परिवार का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनके साथ धोखा किया गया है। उनका दावा है कि जानबूझकर गलत सूचना देकर उन्हें नसबंदी के लिए राजी कराया गया और बाद में बच्चा बदल दिया गया। देखते ही देखते अस्पताल परिसर में लोगों की भीड़ जुट गई और माहौल तनावपूर्ण हो गया। परिजनों और उनके समर्थकों ने अस्पताल में जमकर हंगामा किया।

हंगामे के बीच यह भी आरोप लगाया गया कि मामले को बढ़ता देख संबंधित डॉक्टर और नर्स अस्पताल से चले गए। इससे परिजनों का शक और गहरा हो गया। सूचना मिलते ही नगर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और हालात को नियंत्रित किया। पुलिस ने परिजनों को शांत कराते हुए मामले की निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाया।

मामले की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल प्रशासन भी हरकत में आया। सदर अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. श्याम नंदन प्रसाद ने कहा कि अस्पताल के रिकॉर्ड के अनुसार प्रसूता ने बेटी को ही जन्म दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दस्तावेजों में कहीं भी बेटे के जन्म का उल्लेख नहीं है। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि यदि परिजनों को गलत सूचना दी गई है, तो यह गंभीर लापरवाही है और इसकी जांच आवश्यक है।

सिविल सर्जन ने बताया कि पूरे प्रकरण की जांच के लिए एक विशेष टीम गठित कर दी गई है। यह टीम ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टरों, नर्सों और अन्य कर्मचारियों से पूछताछ करेगी तथा ऑपरेशन थिएटर और वार्ड की गतिविधियों की समीक्षा करेगी। अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज की भी जांच की जाएगी ताकि यह स्पष्ट हो सके कि सूचना में गड़बड़ी कहां और कैसे हुई। उन्होंने भरोसा दिलाया कि यदि किसी कर्मचारी की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

दूसरी ओर, परिजनों का कहना है कि वे बिना निष्पक्ष जांच के संतुष्ट नहीं होंगे। उनका आरोप है कि उन्हें मानसिक रूप से आहत किया गया है। बेटे की खुशी में लिए गए फैसले के बाद अचानक सच्चाई बदल जाने से वे खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। परिवार ने डीएनए जांच की भी मांग की है ताकि पूरी तरह से सच्चाई सामने आ सके और किसी तरह का संदेह न रहे।

यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब सरकारी अस्पतालों की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता को लेकर पहले से ही सवाल उठते रहे हैं। नवजात की अदला-बदली जैसे आरोप बेहद संवेदनशील होते हैं और इससे आम लोगों का भरोसा डगमगा सकता है। हालांकि प्रशासन का कहना है कि बिना जांच के किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।

फिलहाल पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीम मामले की तह तक जाने में जुटी है। अस्पताल में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है और संबंधित स्टाफ से पूछताछ की जा रही है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि यह महज सूचना देने में हुई गलती थी या फिर वास्तव में कोई गंभीर साजिश रची गई।

इस पूरे घटनाक्रम ने न केवल अस्पताल प्रशासन को कठघरे में खड़ा कर दिया है, बल्कि परिवार नियोजन जैसे संवेदनशील निर्णयों में पारदर्शिता और जिम्मेदारी की आवश्यकता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सबकी निगाहें जांच के नतीजों पर टिकी हैं, जो इस रहस्यमय विवाद से पर्दा उठाएंगे।

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