नालंदा विश्वविद्यालय में आज से इंडिया थिंक टैंक फोरम (ITTF) का आठवां संस्करण शुरू हो गया। यह दो दिवसीय फोरम 12 और 13 जनवरी को आयोजित हो रहा है और इसका मुख्य उद्देश्य बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत की भूमिका और आंतरिक मजबूती पर विचार विमर्श करना है। इस वर्ष की थीम है, “बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत: आंतरिक दृढ़ता का निर्माण”, जो देश की सामरिक, आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों पर गहन दृष्टि प्रदान करती है।

फोरम का आयोजन नालंदा में करने का मकसद नीति विमर्श को राजधानी केंद्रित दृष्टिकोण से बाहर निकालकर ज्ञान के ऐतिहासिक केंद्र पर ले जाना है। नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सचिन चतुर्वेदी भी इस आयोजन में प्रमुख रूप से शामिल हैं, जो शैक्षणिक जगत और नीति निर्माण के बीच के सेतु को मजबूती प्रदान करते हैं।
इस फोरम में देशभर के 75 प्रमुख थिंक टैंकों के 80 से अधिक प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। इनमें ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ORF) के अध्यक्ष समीर सरन, उपाध्यक्ष हर्ष वी. पंत, नेशनल मैरीटाइम फाउंडेशन के प्रदीप चौहान, केरल इंटरनेशनल सेंटर के टी.पी. श्रीनिवासन और सेंटर फॉर सोशल एंड इकोनॉमिक प्रोग्रेस के लवीश भंडारी शामिल हैं। इसके अलावा, नीति और सुरक्षा विशेषज्ञ डी. धनुराज, आर.पी.एस. भदौरिया और रुही नियोग भी अपनी विशेषज्ञ राय साझा करेंगे।
फोरम के दौरान भू-राजनीति, अर्थव्यवस्था, सतत विकास, प्रौद्योगिकी और सामाजिक परिवर्तन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गहन चर्चा होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दशक में भारत की वैश्विक महत्वाकांक्षाओं को साकार करने के लिए नीतिगत मजबूती के साथ-साथ थिंक टैंकों का समन्वित और प्रभावी योगदान जरूरी है।
ITTF का उद्देश्य विचारों के आदान-प्रदान को बढ़ावा देना, घरेलू और वैश्विक बदलावों के आपसी संबंधों का विश्लेषण करना और नीति निर्माण में थिंक टैंकों की भूमिका को मजबूत करना है। ORF की यह वार्षिक पहल नीति अनुसंधान संस्थानों, शिक्षाविदों और नीति निर्माताओं को एक मंच पर लाकर देश के नीति संवाद को समृद्ध बनाती है।
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