पंजाब की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार के मंत्री संजीव अरोड़ा को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग के गंभीर आरोपों में गिरफ्तार कर लिया है। इस कार्रवाई के बाद राज्य की राजनीति में उथल-पुथल मच गई है और विपक्ष के साथ-साथ सत्ताधारी दल में भी हलचल तेज हो गई है। गिरफ्तारी चंडीगढ़ स्थित उनके आवास से की गई, जिसके बाद उन्हें पूछताछ के लिए दिल्ली ले जाया गया।

ईडी अधिकारियों के अनुसार, मंत्री संजीव अरोड़ा से जुड़े वित्तीय लेन-देन में कई अनियमितताएं सामने आई हैं। एजेंसी का आरोप है कि उन्होंने अपनी कंपनियों के माध्यम से फर्जी कारोबार दिखाकर करोड़ों रुपये का हेरफेर किया। जांच में यह बात सामने आई है कि मोबाइल खरीद-बिक्री के नाम पर करीब 157 करोड़ रुपये की फर्जी बिक्री दिखाई गई। इसके अलावा, निर्यात के नाम पर भी कागजी लेन-देन कर अवैध तरीके से धन को इधर-उधर किया गया।
गिरफ्तारी के बाद संजीव अरोड़ा को दिल्ली ले जाकर करीब 10 घंटे तक पूछताछ की गई। इस दौरान ईडी ने उनसे उनके कारोबारी नेटवर्क, कंपनियों के लेन-देन और विदेशी कनेक्शनों को लेकर कई सवाल किए। अधिकारियों का मानना है कि यह मामला केवल देश के भीतर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी धन के लेन-देन की आशंका है।
जांच के तहत ईडी ने दिल्ली और गुरुग्राम में स्थित मंत्री से जुड़े कई ठिकानों पर छापेमारी की। इन छापों के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, बैंक रिकॉर्ड और इलेक्ट्रॉनिक डाटा जब्त किए गए हैं। अधिकारियों के अनुसार, इन दस्तावेजों से पूरे नेटवर्क की जानकारी मिलने की उम्मीद है।
जब ईडी की टीम मंत्री को लेकर गुरुग्राम पहुंची, तब वहां भी उनके ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया गया। इसके बाद उन्हें स्थानीय अदालत में पेश किया गया। ईडी ने कोर्ट से 10 दिन की रिमांड की मांग की थी, लेकिन अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद 7 दिन की रिमांड मंजूर की। अदालत में इस मामले को लेकर करीब दो घंटे तक बहस चली, जिसके बाद फैसला सुनाया गया।
संजीव अरोड़ा के वकील ने अदालत में ईडी की कार्रवाई को चुनौती देते हुए कहा कि गिरफ्तारी जल्दबाजी में की गई है। उन्होंने दलील दी कि 5 मई को केस दर्ज हुआ और मात्र चार दिन बाद ही गिरफ्तारी कर ली गई, जो उचित प्रक्रिया का पालन नहीं दर्शाता। बचाव पक्ष ने इस पूरे मामले को राजनीतिक साजिश बताया और कहा कि मंत्री को जानबूझकर फंसाया जा रहा है।
वकील ने यह भी दावा किया कि ईडी को छापेमारी के दौरान कोई ठोस सबूत नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि पहले भी जांच एजेंसी ने छापे मारे थे, लेकिन तब भी कोई महत्वपूर्ण चीज सामने नहीं आई थी। इस पर अदालत ने ईडी से सवाल किया कि क्या उन्होंने कस्टम विभाग से भी इस मामले में जांच कराई है या नहीं। कोर्ट ने निर्देश दिया कि रिमांड अवधि पूरी होने के बाद इस संबंध में रिपोर्ट पेश की जाए।
ईडी की जांच में यह भी सामने आया है कि इस पूरे मामले में शेल कंपनियों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया। इन कंपनियों के जरिए फर्जी बिल तैयार किए गए और उनके आधार पर इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) और जीएसटी रिफंड लिया गया। इससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचा।
एजेंसी का कहना है कि दुबई के जरिए पैसे की राउंड ट्रिपिंग की गई, यानी अवैध धन को विदेश भेजकर फिर वैध रूप में वापस भारत लाया गया। इसके लिए फर्जी निर्यात का सहारा लिया गया। जांच में यह भी पता चला है कि दिल्ली की कई गैर-मौजूद कंपनियों के नाम पर फर्जी जीएसटी बिल बनाए गए।
ईडी ने इस मामले में हैम्पटन स्काई रियल्टी लिमिटेड और उससे जुड़ी अन्य कंपनियों की संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच कर दिया है। इसमें बैंक खाते, डीमैट खाते और अचल संपत्तियां शामिल हैं। यह कार्रवाई विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) और आयकर अधिनियम के तहत की गई है। इन संपत्तियों को 180 दिनों के लिए अटैच किया गया है, ताकि जांच प्रभावित न हो।
इसके अलावा, गुरुग्राम के उद्योग विहार स्थित कंपनी के दफ्तर और अन्य संबंधित स्थानों पर भी तलाशी ली गई। जांच में यह संकेत मिले हैं कि कंपनी ने अपने कर्मचारियों और निदेशकों के साथ मिलकर फर्जी कारोबार का एक पूरा नेटवर्क तैयार किया था।
ईडी के अनुसार, कुल घोषित निर्यात का बड़ा हिस्सा यूएई की दो कंपनियों के माध्यम से किया गया। इन कंपनियों के आपसी संबंधों को लेकर भी संदेह जताया गया है। एजेंसी का मानना है कि इन विदेशी कंपनियों का उपयोग केवल धन के हेरफेर के लिए किया गया।
इस मामले में लुधियाना और मोहाली स्थित संपत्तियों को भी जांच के दायरे में लाया गया है। ईडी का कहना है कि आने वाले समय में और भी खुलासे हो सकते हैं, क्योंकि जांच अभी जारी है।
फिलहाल संजीव अरोड़ा ईडी की हिरासत में हैं और उनसे लगातार पूछताछ की जा रही है। इस पूरे घटनाक्रम ने पंजाब की राजनीति को गरमा दिया है और आने वाले दिनों में इसका असर और भी देखने को मिल सकता है। अब सभी की नजर 16 मई को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी है, जहां इस मामले में आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
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