झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले में जंगली हाथी का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। गोइलकेरा और आसपास के इलाकों में एक बेकाबू हाथी ने बीते तीन दिनों में पांच लोगों की जान ले ली है, जिससे पूरे क्षेत्र में डर और अफरा-तफरी का माहौल बना हुआ
है।

चाईबासा के जंगलों से निकलकर आबादी वाले इलाकों में पहुंचे इस हाथी ने रात के समय अचानक हमले कर लोगों की नींद छीन ली है। हालात ऐसे हैं कि कई गांवों के लोग रात में घरों में सोने से भी डर रहे हैं और सुरक्षित स्थानों की तलाश कर रहे हैं।
🕯️ सबसे दर्दनाक घटना
सोमवार देर रात गोइलकेरा क्षेत्र में हाथी ने एक घर पर हमला कर दिया, जहां पूरा परिवार गहरी नींद में सो रहा था। हाथी ने घर को तोड़ना शुरू किया, जिससे घबराकर परिवार के सदस्य बाहर की ओर भागे, लेकिन दुर्भाग्यवश तीन लोग उसकी चपेट में आ गए।
मृतकों की पहचान कुंद्रा बहदा, उनके बेटे कोडमा बहदा और बेटी सामू बहदा के रूप में हुई है। तीनों की मौके पर ही मौत हो गई। इसी घटना में परिवार की एक बच्ची जिंगी बहदा गंभीर रूप से घायल हो गई, जिसे पहले स्थानीय इलाज दिया गया और बाद में हालत बिगड़ने पर ओडिशा के राउरकेला रेफर किया गया।
📌 पहले भी ले चुका है जान
इससे एक दिन पहले रविवार रात बीला कुंडुकोचा गांव में 56 वर्षीय महिला जोंगा कुई की हाथी के हमले में मौत हो गई थी। वह अपने घर में सो रही थीं, तभी हाथी ने घर तोड़कर उन्हें कुचल दिया। उनके पति किसी तरह जान बचाकर भागने में सफल रहे।
वहीं शुक्रवार रात को सैयतवा जंगली क्षेत्र में 13 साल का किशोर रेंगा काइयाम खलिहान में सो रहा था, जहां हाथियों के झुंड ने उसे कुचल दिया।
🌲 वन विभाग की कार्रवाई
वन विभाग ने हालात की गंभीरता को देखते हुए पश्चिम बंगाल से विशेषज्ञों की एक विशेष टीम बुलाई है। करीब 10 एक्सपर्ट्स की यह टीम हाथी की गतिविधियों पर नजर रख रही है और उसे सुरक्षित तरीके से जंगल की ओर वापस भेजने की कोशिश कर रही है।
अधिकारियों के मुताबिक, पिछले दो महीनों में पश्चिमी सिंहभूम जिले में हाथी हमलों में 13 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें से 6 मौतें केवल गोइलकेरा इलाके में हुई हैं।
⚠️ बढ़ता मानव-हाथी संघर्ष
विशेषज्ञों का मानना है कि जंगलों में अतिक्रमण और हाथियों के प्राकृतिक आवास के लगातार खत्म होने की वजह से यह संघर्ष बढ़ रहा है। वन्यजीव संस्थानों की रिपोर्ट के अनुसार, झारखंड में पिछले दो दशकों में हजारों हाथी हमलों की घटनाएं दर्ज की गई हैं, जिनमें बड़ी संख्या में लोगों की जान गई है।
🗣️ ग्रामीणों की मांग
लगातार हो रही मौतों से नाराज़ और डरे ग्रामीण प्रशासन से स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं। साथ ही मृतकों और घायलों के परिजनों को जल्द मुआवजा देने की अपील भी की जा रही है।
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