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DMCH में कर्मचारियों का बवाल, अधीक्षक पर लगाए गंभीर आरोप

दरभंगा मेडिकल कॉलेज अस्पताल (डीएमसीएच), लहेरियासराय कर्मचारी संघ की एक महत्वपूर्ण बैठक संघ के अध्यक्ष अनिल कुमार सिन्हा की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में अस्पताल की वर्तमान व्यवस्था, कर्मचारियों एवं नर्सों की लंबित मांगों, प्रशासनिक कार्यशैली तथा महिला कर्मियों के साथ कथित दुर्व्यवहार जैसे विभिन्न मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की गई। बैठक में उपस्थित कर्मचारियों ने अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर असंतोष व्यक्त करते हुए कई गंभीर आरोप लगाए और एक सप्ताह के भीतर मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में आंदोलनात्मक कार्यक्रम शुरू करने की चेतावनी दी।

 

 

बैठक को संबोधित करते हुए कर्मचारी संघ के अध्यक्ष अनिल कुमार सिन्हा ने कहा कि डीएमसीएच की व्यवस्था लगातार चरमराती जा रही है और इसका प्रतिकूल प्रभाव मरीजों के इलाज तथा अस्पताल की कार्यप्रणाली पर पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान अस्पताल अधीक्षक डॉ. जगदीश चंद्र अपने लगभग पांच माह के कार्यकाल में अस्पताल की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने में विफल रहे हैं। उन्होंने कहा कि अस्पताल में संसाधनों की उपलब्धता के बावजूद आवश्यक कार्यों का निष्पादन नहीं किया जा रहा है, जिसके कारण मरीजों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

श्री सिन्हा ने कहा कि अस्पताल में एक्स-रे फिल्म, सीटी स्कैन फिल्म, पैथोलॉजिकल जांच के लिए आवश्यक केमिकल, दवाओं की खरीद, मशीनों की मरम्मत तथा अन्य जरूरी सामग्रियों की समय पर व्यवस्था नहीं हो पा रही है। इसके अलावा कर्मचारियों के एसीपी एवं एमएसीपी लाभ से संबंधित मामलों का भी निष्पादन लंबित है। उन्होंने कहा कि इन समस्याओं के कारण अस्पताल की छवि प्रभावित हो रही है और मरीजों के उपचार में बाधाएं उत्पन्न हो रही हैं।

 

संघ अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि अस्पताल अधीक्षक कार्यालय में आने के बाद भी प्रशासनिक कार्यों के निष्पादन में अपेक्षित रुचि नहीं लेते हैं। उन्होंने कहा कि विभिन्न विभागों से आने वाली संचिकाएं लंबे समय तक लंबित रखी जाती हैं, जिससे प्रशासनिक कार्य प्रभावित होते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि स्पष्ट आदेश देने के बजाय संचिकाओं को अनावश्यक रूप से रोके रखा जाता है, जिससे कर्मचारियों एवं विभागों को परेशानी होती है।

बैठक में आउटसोर्सिंग एजेंसी के माध्यम से कार्यरत कर्मचारियों की समस्याओं पर भी चर्चा हुई। संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि इन कर्मियों को कई महीनों से मानदेय का भुगतान नहीं किया गया है। समय पर वेतन नहीं मिलने से कर्मचारियों के समक्ष आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया है। संघ ने मांग की कि आउटसोर्स कर्मियों के लंबित मानदेय का अविलंब भुगतान सुनिश्चित किया जाए।

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बैठक में प्रभारी उपाधीक्षक डॉ. सुरेंद्र कुमार के विरुद्ध भी कर्मचारियों ने नाराजगी व्यक्त की। संघ अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि प्रभारी उपाधीक्षक द्वारा महिला कर्मियों के साथ असभ्य एवं अमर्यादित व्यवहार किया गया है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में आर्थो सीओटी की प्रभारी महापरिचारिका संगीता कुमारी-2 ने उच्च अधिकारियों को लिखित आवेदन देकर शिकायत की है। संघ ने मांग की कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने पर उचित कार्रवाई की जाए।

श्री सिन्हा ने कहा कि महिला कर्मियों के सम्मान और सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। यदि शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई नहीं हुई तो कर्मचारी संघ इस मुद्दे को लेकर व्यापक आंदोलन चलाने को बाध्य होगा। उन्होंने राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग से मांग की कि मामले की गंभीरता को देखते हुए आवश्यक कदम उठाए जाएं।

संघ की बैठक में अस्पताल अधीक्षक डॉ. जगदीश चंद्र को पद से हटाने की भी मांग की गई। संघ ने कहा कि अस्पताल के बेहतर संचालन के लिए राज्य स्तरीय वरीयता प्राप्त किसी नियमित प्राध्यापक को अधीक्षक के पद पर नियुक्त किया जाना चाहिए। साथ ही प्रभारी उपाधीक्षक डॉ. सुरेंद्र कुमार को अतिरिक्त प्रभार से मुक्त करने और उनके विरुद्ध लगाए गए आरोपों की जांच कराने की मांग भी उठाई गई।

बैठक की शुरुआत कर्मचारी संघ के मंत्री एवं प्रयोगशाला प्रावैधिक उदय शंकर सिंह के सम्मान समारोह से हुई। हाल ही में उनका स्थानांतरण डीएमसीएच, लहेरियासराय से राजकीय मेडिकल कॉलेज अस्पताल, सारण (छपरा) में हो गया है। इस अवसर पर उन्हें संघ की ओर से सम्मानित कर भावभीनी विदाई दी गई।

 

 

अपने संबोधन में कर्मचारियों ने कहा कि उदय शंकर सिंह ने डीएमसीएच में 28 वर्ष, 2 माह और 21 दिन तक अपनी सेवाएं दीं। इस दौरान उन्होंने न केवल अपने दायित्वों का ईमानदारीपूर्वक निर्वहन किया, बल्कि कर्मचारी हितों की लड़ाई में भी सक्रिय भूमिका निभाई। कर्मचारियों ने कहा कि उनके स्थानांतरण से संगठन को एक अनुभवी और समर्पित नेतृत्व की कमी महसूस होगी।

विदाई समारोह में उदय शंकर सिंह के योगदान की सराहना करते हुए उन्हें भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी गईं। इस अवसर पर संघ के मंत्री पद का दायित्व सर्वसम्मति से अजय कुमार साह को सौंपा गया। उपस्थित कर्मचारियों ने उनसे संगठन की मजबूती और कर्मचारी हितों की रक्षा के लिए सक्रिय भूमिका निभाने की अपेक्षा व्यक्त की।

बैठक में कई अन्य लंबित मांगों पर भी चर्चा की गई। इनमें शिखा राज को बकाया एसीपी एवं एमएसीपी लाभ प्रदान करने, अस्पताल अधीक्षक द्वारा संगीता कुमारी-2 के विरुद्ध जारी पत्र को वापस लेने, बीएससी नर्सिंग कॉलेज में उत्पन्न समस्याओं का समाधान करने तथा ब्लड बैंक में कथित अनियमितताओं एवं भ्रष्टाचार पर रोक लगाने की मांग प्रमुख रही।

संघ ने कहा कि इन सभी मुद्दों पर संबंधित अधिकारियों को पूर्व में भी अवगत कराया जा चुका है, लेकिन अब तक संतोषजनक कार्रवाई नहीं हुई है। कर्मचारियों का कहना था कि लगातार उपेक्षा के कारण उनमें असंतोष बढ़ रहा है। बैठक में निर्णय लिया गया कि यदि एक सप्ताह के भीतर मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं की गई तो कर्मचारी संघ चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा करेगा।

बैठक में उपस्थित कर्मचारियों ने कहा कि उनका उद्देश्य अस्पताल की व्यवस्था को बेहतर बनाना और कर्मचारियों की जायज मांगों का समाधान कराना है। उन्होंने प्रशासन से संवाद के माध्यम से समस्याओं का समाधान निकालने की अपील की, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि यदि उनकी मांगों की अनदेखी की गई तो आंदोलन का रास्ता अपनाया जाएगा।

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बैठक में मुख्य रूप से मो. जमील, मिथिलेश प्रसाद सिंह, लक्ष्मण झा, अजय कुमार साह, अमरेंद्र कुमार सिंह, समरेन्द्र मिश्र, रामानंद पासवान, प्रकाश कुमार सहनी, सुरेश कुमार साह, कंचन कुमारी, चंद्र नारायण, ज्योति कुमारी, जानकी कुमारी, जयंती कुमारी, सुनील कुमार, उदय शंकर सिंह, ललन शर्मा, संजय कुमार, सूर्यवंश यादव, विजय कुमार, बैजनाथ लाल देव, संगीता कुमारी-2, राजन मसीह, मधु महतो, संतोष कुमार सहनी, रामबालक यादव, बैजनाथ ठाकुर, रोहित कुमार, शिखा राज, जमुना कुमारी, मोहम्मद सदरे आलम, बसंत हरिजन, बैजनाथ राम, नवल किशोर साह, अली अहमद सहित कुल 94 कर्मचारियों ने भाग लिया और विभिन्न मुद्दों पर अपने विचार रखे।

बैठक के अंत में सर्वसम्मति से यह प्रस्ताव पारित किया गया कि कर्मचारियों एवं नर्सों की लंबित मांगों, अस्पताल की बदहाल व्यवस्था, महिला कर्मियों के सम्मान तथा मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए संघ संघर्ष जारी रखेगा। कर्मचारियों ने उम्मीद जताई कि स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल प्रशासन उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करेगा और शीघ्र समाधान की दिशा में कदम उठाएगा।

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