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अलविदा 2018: माया-अखिलेश को यूपी में गठबंधन की ताकत का हुआ एहसास

राज प्रताप सिंह(उत्तर-प्रदेश राज्य प्रमुख)

राजधानी। उपचुनाव में मिली सफलता के बाद समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव और बसपा सुप्रीमो मायावती ने आगामी लोकसभा चुनाव एक साथ लड़ने का ऐलान कर दिया।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में साल 2018 सूबे में सियासत के दो धुरंधरों बसपा सुप्रीमो मायावती और सपा मुखिया अखिलेश यादव को गठबंधन की ताकत का ऐहसास करा गया।साल 2017 के विधानसभा चुनाव और फिर नगर निकाय चुनाव में मिली हार के बाद दोनों ही दलों ने इस साल मार्च में गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा चुनाव में एक साथ लड़ा और दोनों ही जगह बीजेपी को करारी हार का सामना करना पड़ा।इसके बाद बारी थी कैराना लोकसभा और नूरपुर विधानसभा उपचुनाव की।यहां भी सपा-बसपा और रालोद की जुगलबंदी काम आई।दोनों ही जगहों पर जीत विपक्षी उम्मीदवार की हुई।

उपचुनाव में मिली सफलता के बाद समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव और बसपा सुप्रीमो मायावती ने आगामी लोकसभा चुनाव एक साथ लड़ने का ऐलान कर दिया।दोनों ही दलों को यह बात समझ में आ गई कि बीजेपी से अकेले मुकाबला नहीं किया जा सकता।लिहाजा कभी धुर विरोधी रहे सपा और बसपा एक साथ आ गए।

हालांकि रिटर्न गिफ्ट नहीं दे सके अखिलेश

उपचुनाव में तीन लोकसभा सीटों और एक विधानसभा सीट पर जीत के बदले सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव मायावती को राज्य सभा चुनाव में रिटर्न गिफ्ट नहीं दे सके। उपचुनावों में हार का बदला बीजेपी ने सभी 11 राज्य सभा सदस्यों को जीताकर लिया। क्रॉस वोटिंग और विधायकों के पाला बदलने की वजह से बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार भीमराव आंबेडकर सीधे निर्वाचन के लिए जरूरी 37 वोट नहीं जुटा पाए।उन्हें पहली वरीयता के 33 वोट ही मिले।वहीं पहली वरीयता के 22 वोट हासिल करने वाले बीजेपी उम्मीदवार अनिल अग्रवाल दूसरी वरीयता के वोटों के आधार पर निर्वाचित घोषित किए गए।

यादव कुनबे में रार, शिवपाल ने बना ली अलग पार्टी

2017 विधानसभा चुनाव से पहले शुरू हुआ यादव कुनबे रार साल 2018 में भी जारी रहा। हालांकि पूरी महाभारत का पटाक्षेप शिवपाल यादव के अलग पार्टी बनाने के साथ ही खत्म हुआ। शिवपाल यादव ने प्रगतिशील समाजवादी पार्टी बनाकर लोकसभा की सभी सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया। 9 दिसंबर को लखनऊ में जनाक्रोश रैली में भीड़ जुटाकर शिवपाल ने अखिलेश को अपनी ताकत का एहसास भी कराया।

निर्दलीय राजनीति करने वाले राजा भैया ने बनायी नई पार्टी

25 साल तक निर्दलीय राजनीति करने वाले प्रतापगढ़ के कुंडा से बाहुबली विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया ने दलीय राजनीति में पदार्पण किया। उन्होंने अपने समर्थकों की राय पर नई जनसत्ता पार्टी बना ली।30 नवंबर को लखनऊ में विशाल रैली कर अपनी शक्ति का अहसास भी कराया। रजा भैया सवर्णों की आवाज बुलंद करने के लिए इस पार्टी का गठन किया है।

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