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देहरादून में मामूली विवाद ने ली जान, 15 युवकों ने मिलकर बीटेक छात्र को पीटा

देहरादून में एक छोटी सी बात से शुरू हुआ विवाद इतना खतरनाक रूप ले लेगा, यह शायद किसी ने नहीं सोचा था। कार में गाना बजाने को लेकर हुई कहासुनी ने धीरे-धीरे गहरी दुश्मनी का रूप ले लिया और अंत में बीटेक छात्र दिव्यांशु की बेरहमी से हत्या कर दी गई। इस घटना ने पूरे शहर को झकझोर दिया है और छात्रों के बीच बढ़ती हिंसा पर चिंता बढ़ा दी है।

दिव्यांशु एक विश्वविद्यालय में बीटेक कंप्यूटर साइंस का द्वितीय वर्ष का छात्र था और हॉस्टल में रहकर पढ़ाई कर रहा था। करीब दो महीने पहले एक घटना हुई थी, जिसने इस पूरे मामले की शुरुआत की। बताया जाता है कि दिव्यांशु के कुछ दोस्तों ने विश्वविद्यालय के गेट के बाहर कार में “छोरा जाट्टा” गाना बजाया था। इस बात को कुछ अन्य छात्रों ने अपनी इज्जत से जोड़ लिया और इसी को लेकर दोनों पक्षों के बीच तनाव पैदा हो गया।

शुरुआत में मामला केवल बहस तक सीमित था, लेकिन धीरे-धीरे दोनों गुटों के बीच टकराव बढ़ता गया। कई बार झड़प और मारपीट भी हुई, जिससे दोनों पक्षों के बीच दुश्मनी और गहरी होती गई। आरोप है कि एक गुट लगातार दिव्यांशु और उसके साथियों पर नजर रख रहा था और बदला लेने के लिए मौके की तलाश कर रहा था।

सोमवार की रात उन्हें वह मौका मिल गया। दिव्यांशु अपने दोस्तों के साथ प्रेमनगर बाजार में खाना खाने गया हुआ था। इसी दौरान आरोपी युवक वहां पहुंच गए। पहले दोनों पक्षों के बीच बहस हुई, लेकिन कुछ ही देर में मामला हिंसा में बदल गया।

चश्मदीदों के मुताबिक, करीब 15 हमलावरों ने दिव्यांशु को चारों तरफ से घेर लिया और लाठी-डंडों व अन्य हथियारों से उस पर हमला कर दिया। हमलावरों ने उसे इतनी बुरी तरह पीटा कि वह गंभीर रूप से घायल होकर जमीन पर गिर पड़ा। यह पूरी घटना बाजार में हुई, जहां आसपास काफी लोग मौजूद थे, लेकिन किसी ने बीच-बचाव करने की हिम्मत नहीं दिखाई।

घटना के बाद एक दंपत्ति ने घायल दिव्यांशु को अस्पताल पहुंचाने की कोशिश की। लेकिन रास्ते में एंबुलेंस खराब हो गई, जिससे और समय बर्बाद हुआ। बाद में पुलिस की गाड़ी से उसे अस्पताल ले जाया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी और डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

दिव्यांशु की मौत से उसके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। वह घर का बड़ा बेटा था और परिवार को उससे कई उम्मीदें थीं। उसके छोटे भाई ने हाल ही में 12वीं की परीक्षा दी है। बेटे की असमय मौत से माता-पिता गहरे सदमे में हैं।

परिजनों का कहना है कि यह घटना अचानक नहीं हुई, बल्कि लंबे समय से चल रहे विवाद का परिणाम है। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले भी कई बार झगड़े हुए थे और इसकी जानकारी पुलिस को दी गई थी। करीब 15 दिन पहले भी दिव्यांशु के एक साथी के साथ मारपीट की गई थी और उसकी बाइक को नुकसान पहुंचाया गया था। बावजूद इसके समय पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई।

घटना के बाद पुलिस ने सख्ती दिखानी शुरू कर दी है। इलाके में जांच और सत्यापन अभियान चलाया जा रहा है। पुलिस ने कई हॉस्टल संचालकों पर जुर्माना लगाया है, वाहनों का चालान किया है और कई लोगों के खिलाफ पुलिस एक्ट के तहत कार्रवाई की है।

जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी एक समूह से जुड़े थे, जो खुद को “बिहार डिफॉल्टर” नाम से पहचानता था। यह गुट कॉलेज परिसर में दबंगई करने और अन्य छात्रों को डराने के लिए जाना जाता था। बताया जा रहा है कि इस समूह में कुछ बाहरी लोग भी शामिल थे।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में शामिल सभी आरोपियों की पहचान की जा रही है और उन्हें जल्द गिरफ्तार किया जाएगा। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि भविष्य में इस तरह की घटनाएं दोबारा न हों।

यह घटना समाज के लिए एक बड़ा सबक है कि छोटी-छोटी बातों को नजरअंदाज करना कितना खतरनाक हो सकता है। अगर समय रहते विवाद को सुलझा लिया जाता, तो शायद एक मासूम जान बचाई जा सकती थी।

अब सवाल यह उठता है कि क्या कॉलेज प्रशासन और पुलिस को पहले ही सख्त कदम उठाने चाहिए थे? क्या छात्रों के बीच बढ़ती गुटबाजी पर समय रहते रोक लगाई जा सकती थी? ये ऐसे सवाल हैं, जिनका जवाब मिलना जरूरी है।

फिलहाल, दिव्यांशु की मौत ने सभी को झकझोर कर रख दिया है और यह मामला लंबे समय तक लोगों के जहन में बना रहेगा।

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