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पैगम्बर हजरत मुहम्मद के बताए मार्ग पर चलकर जीवन को सार्थक बनाएं : उलेमा

हजरत मुहम्मद के जन्मदिवस पर आयोजित तीन दिवसीय जलसा सीरतुन्नबी का हुआ समापन

विभिन्न प्रदेशों से आए उलेमाओं ने नबी की सीरत पर डाला प्रकाश, उनके संदेश को जीवन में अपनाने का किया आह्वान

देर रात तक किलाघाट में सैकड़ों लोगों की रही उपस्थिति

 

सौरभ शेखर श्रीवास्तव की ब्यूरो रिपोर्ट दरभंगा। शहर के किलाघाट स्थित मदरसा हमीदिया मैदान में आयोजित तीन दिवसीय जलसा सीरतुन्नबी का शुक्रवार देर रात सफलतापूर्वक समापन हो गया। लगभग 80 वर्षों से आम अवाम की सेवा में समर्पित सामाजिक संस्था अंजुमन खुद्दाम-ए-मिल्लत द्वारा आयोजित इस धार्मिक एवं सामाजिक कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों से आए नामवर उलेमाओं ने अपने विचार व्यक्त किए।

जलसे में उलेमाओं की ज्ञानवर्धक तकरीरों से सैकड़ों लोगों ने प्रेरणा प्राप्त की। वहीं विभिन्न प्रांतों से तशरीफ लाए शायर-ए-इस्लाम और नातख्वानों ने अपने कलाम और नातिया प्रस्तुतियों से उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया।

 

बुधवार, बृहस्पतिवार और शुक्रवार की रात आयोजित जलसे में जहां बड़ी संख्या में पुरुषों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, वहीं शुक्रवार को दिन में महिलाओं के लिए विशेष जलसे का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लड़कियों और महिलाओं ने हिस्सा लिया।

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प्रसिद्ध इस्लामिक विद्वान एवं पीर हजरत सैयद शमशुल्लाह जान उर्फ बाबू हुजूर की सरपरस्ती तथा मुफ्ती हजरत गफ्फार शाकिब की अध्यक्षता में आयोजित इस जलसे में वरिष्ठ प्रवक्ता एवं इस्लामिक स्कॉलर मुफ्ती हाशिम अशरफी (कानपुर, उत्तर प्रदेश), मुफ्ती शाकिब कादरी (वाराणसी, उत्तर प्रदेश), मौलाना शफीकुल्लाह चतुर्वेदी (दिल्ली), मौलाना अख्तर काशिफ (गिरिडीह, झारखंड), शाकिर रजा (पटना, बिहार), शायर-ए-इस्लाम शकील एवं शादाब (कोलकाता, पश्चिम बंगाल) सहित अनेक विद्वानों ने अपने विचारों और उम्दा कलाम से कार्यक्रम को गौरवान्वित किया। इसके अलावा लगभग दो दर्जन स्थानीय उलेमाओं ने भी अपने संबोधन प्रस्तुत किए, जबकि आधा दर्जन से अधिक शायरों ने अपने कलाम सुनाकर खूब वाहवाही बटोरी।

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महिलाओं के विशेष जलसे की अध्यक्षता आलिमा शरबत फातिमा अमजदी ने की तथा संचालन की जिम्मेदारी आलिमा इफत सुब्हानी अमजदी ने सफलतापूर्वक निभाई। जलसे को संबोधित करने वाली प्रमुख आलिमाओं में आलिमा हिना कादरी अमजदी, आलिमा बहारे रहमत अमजदी तथा आलिमा खुशनुमा नूरानी के नाम उल्लेखनीय हैं।

 

आलिमाओं ने महिलाओं को संबोधित करते हुए इस्लाम में उन्हें प्राप्त अधिकारों, सम्मान और जिम्मेदारियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने आने वाली पीढ़ियों को शिक्षित करने, नैतिक मूल्यों से जोड़ने तथा इस्लामी तहजीब और संस्कारों को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।

 

उलेमाओं ने अपने संबोधन में कहा कि हजरत मुहम्मद सम्पूर्ण मानवता के लिए आदर्श हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे हजरत मुहम्मद की सीरत का अध्ययन करें और उनके बताए हुए मार्ग पर चलें। उन्होंने कहा कि पैगम्बर के जीवन से हमें सत्य, ईमानदारी, करुणा, सहिष्णुता और मानव सेवा की प्रेरणा मिलती है। उनके आदर्शों को अपनाकर व्यक्ति अपने जीवन को सफल, सार्थक और समाजोपयोगी बना सकता है।

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उलेमाओं ने यह भी कहा कि इस्लाम का मूल संदेश प्रेम, न्याय, अधिकारों की रक्षा, शांति, समानता और सामाजिक सौहार्द को बढ़ावा देना है। उन्होंने समाज में आपसी भाईचारे, सद्भाव और इंसानियत के मूल्यों को मजबूत करने का आह्वान किया।

 

कार्यक्रम में देर रात तक बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति रही। जलसे के सफल आयोजन पर अंजुमन खुद्दाम-ए-मिल्लत के सचिव सैयद आफताब अशरफ ने आयोजन को सफल बनाने में सहयोग करने वाले सभी पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं, स्थानीय नागरिकों तथा प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि संस्था द्वारा प्रतिवर्ष हजरत मुहम्मद के जन्मदिवस के अवसर पर इस प्रकार के जलसे आयोजित करने का उद्देश्य लोगों को पैगम्बर-ए-इस्लाम की जिंदगी, उनके आदर्श चरित्र और उनकी शिक्षाओं से रूबरू कराना है, ताकि समाज में शांति, भाईचारा और इंसानियत के मूल्यों को बढ़ावा मिल सके।

महिलाओं के लिए आयोजित हुआ विशेष जलसा
तीन दिवसीय कार्यक्रम के दौरान शुक्रवार को दिन में महिलाओं और लड़कियों के लिए विशेष जलसे का आयोजन किया गया। इसमें बड़ी संख्या में महिलाओं एवं युवतियों ने हिस्सा लिया। महिलाओं के विशेष जलसे की अध्यक्षता आलिमा शरबत फातिमा अमजदी ने की, जबकि संचालन की जिम्मेदारी आलिमा इफत सुब्हानी अमजदी ने सफलतापूर्वक निभाई।

महिला जलसे को संबोधित करने वाली प्रमुख आलिमाओं में आलिमा हिना कादरी अमजदी, आलिमा बहारे रहमत अमजदी तथा आलिमा खुशनुमा नूरानी के नाम उल्लेखनीय हैं। आलिमाओं ने महिलाओं को संबोधित करते हुए इस्लाम में महिलाओं को प्राप्त अधिकारों, सम्मान और जिम्मेदारियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

उन्होंने कहा कि किसी भी परिवार और समाज के निर्माण में महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। महिलाओं को शिक्षित और जागरूक बनाकर ही एक बेहतर और संस्कारित समाज का निर्माण किया जा सकता है। उन्होंने महिलाओं से अपने बच्चों की शिक्षा, चरित्र निर्माण और नैतिक विकास पर विशेष ध्यान देने की अपील की।

आलिमाओं ने कहा कि आने वाली पीढ़ियों को केवल आधुनिक शिक्षा देना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें नैतिक मूल्यों, अनुशासन, संस्कार और इंसानियत से भी जोड़ना जरूरी है। उन्होंने महिलाओं से अपने परिवारों में शिक्षा और अच्छे संस्कार का वातावरण बनाने तथा समाज में सकारात्मक भूमिका निभाने का आह्वान किया।

सीरत से सीखने की जरूरत
जलसे को संबोधित करते हुए उलेमाओं ने कहा कि हजरत मुहम्मद का पूरा जीवन मानवता के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने सत्य और ईमानदारी को जीवन का आधार बनाया तथा कमजोर, जरूरतमंद और वंचित लोगों के अधिकारों की रक्षा पर जोर दिया। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे नबी की सीरत को केवल सुनने तक सीमित न रखें, बल्कि उसके संदेश को अपने व्यवहार में भी उतारें।
वक्ताओं ने कहा कि आज समाज में बढ़ती दूरी, तनाव, अविश्वास और सामाजिक चुनौतियों के बीच पैगम्बर हजरत मुहम्मद की शिक्षाएं पहले से अधिक प्रासंगिक हैं। प्रेम, क्षमा, संयम, न्याय, सहिष्णुता और जरूरतमंदों की सहायता जैसे मानवीय मूल्यों को अपनाकर समाज को अधिक शांतिपूर्ण और बेहतर बनाया जा सकता है।
उन्होंने युवाओं से विशेष रूप से अपील की कि वे शिक्षा हासिल करें, अपने समय का सदुपयोग करें और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझें। युवाओं को नशे, हिंसा, आपराधिक गतिविधियों तथा अन्य सामाजिक बुराइयों से दूर रहने और सकारात्मक कार्यों में अपनी ऊर्जा लगाने की सलाह दी गई।

देर रात तक उमड़ी रही भीड़
किलाघाट स्थित मदरसा हमीदिया मैदान में आयोजित जलसे में तीनों दिनों बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। शुक्रवार की रात समापन कार्यक्रम के दौरान देर रात तक मैदान में लोगों की मौजूदगी बनी रही। श्रद्धालुओं और कार्यक्रम में शामिल लोगों ने उलेमाओं की तकरीरें सुनीं और नातिया कलाम का आनंद लिया।


आयोजकों के अनुसार कार्यक्रम का उद्देश्य किसी प्रकार का प्रदर्शन नहीं, बल्कि लोगों को पैगम्बर-ए-इस्लाम की जिंदगी और उनके आदर्श चरित्र से परिचित कराना तथा समाज में शांति, सद्भाव और इंसानियत के मूल्यों को मजबूत करना था।
जलसे के सफल आयोजन पर अंजुमन खुद्दाम-ए-मिल्लत के सचिव सैयद आफताब अशरफ ने सभी पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं, स्थानीय नागरिकों, उलेमाओं, आलिमाओं, शायरों, नातख्वानों तथा कार्यक्रम में शामिल तमाम लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया।

उन्होंने कहा कि अंजुमन खुद्दाम-ए-मिल्लत पिछले लगभग 80 वर्षों से आम अवाम की सेवा के लिए विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक गतिविधियों में अपनी भूमिका निभाती रही है। संस्था की कोशिश रहती है कि समाज में शिक्षा, सेवा, भाईचारा, सद्भाव और इंसानियत के मूल्यों को मजबूत किया जाए।
सैयद आफताब अशरफ ने कहा कि हजरत मुहम्मद के जन्मदिवस के अवसर पर प्रत्येक वर्ष सीरतुन्नबी का आयोजन करने का मुख्य उद्देश्य लोगों को पैगम्बर-ए-इस्लाम की जिंदगी, उनके आदर्श चरित्र और उनकी शिक्षाओं से रूबरू कराना है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में भी संस्था समाज के हित में ऐसे कार्यक्रमों को जारी रखेगी।

उन्होंने आयोजन को सफल बनाने में प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग करने वाले सभी लोगों का धन्यवाद करते हुए कहा कि समाज की एकजुटता और सहयोग से ही ऐसे बड़े कार्यक्रम सफल होते हैं। उन्होंने लोगों से आपसी प्रेम, भाईचारा और सद्भाव बनाए रखने तथा जरूरतमंदों की सहायता करने की अपील की।

जलसे के समापन के अवसर पर उपस्थित लोगों ने पैगम्बर हजरत मुहम्मद के जीवन एवं संदेश को अपने जीवन में अपनाने, समाज में शांति और भाईचारे को मजबूत करने तथा मानवता की सेवा के लिए सकारात्मक भूमिका निभाने का संकल्प व्यक्त किया।

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