राज प्रताप सिंह,ब्यूरो लखनऊ
बीजेपी ने भी विपक्षी सियासी दिग्गजों को उनके ही गढ़ में तगड़ी चुनौती देने की तैयारी की है।हा जा रहा है कि इन सीटों पर बीजेपी वीआईपी कैंडीडेट उतारने की जुगत में है।
एक तरफ महागठबंधन 2019 के लोकसभा चुनावों में उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी को चारों खाने चित करने की कोशिश में लगा हुआ है।सपा, बसपा से लेकर कांग्रेस, रालोद सभी रणनीति बनाने में जुटे हुए हैं। वहीं बीजेपी ने भी विपक्षी सियासी दिग्गजों को उनके ही गढ़ में तगड़ी चुनौती देने की तैयारी की है।कहा जा रहा है कि इन सीटों पर बीजेपी वीआईपी कैंडीडेट उतारने की जुगत में है।
दरअसल अगले लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी से डिंपल यादव चुनाव नहीं लड़ेंगी।खुद सपा प्रमुख अखिलेश यादव इसका ऐलान कर चुके हैं, साथ ही बता चुके हैं कि कन्नौज से वह खुद मैदान में उतरेंगे। इसके अलावा मुलायम सिंह यादव मैनपुरी से लड़ेंगे।यादव परिवार के पास आजमगढ़, बदायूं और फिरोजाबाद की भी सीटें हैं।इसके अलावा कांग्रेस के पास अमेठी और रायबरेली की सीटें हैं।बीजेपी की नजर विपक्ष के इन्हीं 7 मजबूत गढ़ों पर है।इसमें सबसे ज्यादा ध्यान पार्टी कन्नौज और अमेठी पर लगाए हुए हैं।
इसकी अहम वजह भी है।दरअसल कन्नौज में डिंपल यादव 2014 के चुनाव में बीजेपी प्रत्याशी से काफी कम मार्जिन से जीती थीं। वहीं नगर निकाय चुनाव और 2017 के विधानसभा चुनाव में भी कन्नौज में सपा का प्रदर्शन खराब रहा था।बीजेपी अब इसी को भुनाने के लिए अखिलेश के खिलाफ वीआईपी कैंडीडेट उतारने की तैयारी कर रही है।वह जमीनी स्तर पर भी किलेबंदी मजबूत करने में लगी हुई है।
वहीं, अमेठी की बात करें तो राहुल गांधी से चुनाव हारने के बाद भी स्मृति ईरानी ने अमेठी का दामन थामे रखा है।भले ही केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी यूपी से नहीं हैं।लेकिन अमेठी में उनकी सक्रियता के चर्चे आम हैं।अभी पिछले दिनों ही स्मृति ईरानी ने अमेठी में डिजिटल गांव का उद्घाटन किया, वहीं कई अन्य योजनाओं को यहां लागू करने में अहम भूमिका निभाई है।अमेठी में करीब-करीब सभी का मानना है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में स्मृति ईरानी ही यहां से राहुल गांधी को चुनौती देंगीं।
उधर, बीजेपी की रणनीति के संबंध में पार्टी के प्रदेश मीडिया कोआॅर्डिनेटर राकेश त्रिपाठी कहते हैं कि 2014 के लोकसभा चुनाव में हम जिन 7 सीटों पर हारे थे।उनमें चाहे कन्नौज हो, मैनपुरी हो, आजमगढ़, अमेठी, रायबरेली हो या बदायूं और फिरोजाबाद हो, सभी के लिए पार्टी ने विशेष रणनीति तैयार कर रखी है।
इस रणनीति पर लगातार काम जारी रखा गया है।इस रणनीति में चाहे कैंडीडेट का चयन हो या अपनी खामियों को दुरस्त करने की कवायद, सभी पर काम हो रहा है।
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