चकरनगर(इटावा)रिपोर्टर: डॉ.एस.बी.एस.चौहान।
मुसीबत के दिनों में महान आत्मा ही काम आती है बाकी के तो सब खिल्ली उड़ाने में नहीं चूकते कहा भी गया है कि धीरज धर्म मित्र और नारी…….. “गोस्वामी जी ने बिल्कुल सटीक लिखा है। इसमें कोई दो राय नहीं है। आज दैनिक जागरण बकेवर के अंशकालिक संवाददाता एक एक दाने को मोहताज श्री मंतोष तिवारी पुत्र विष्णुदत्त तिवारी उम्र 52 वर्ष निवासी पटेल नगर बकेवर। जिन्होंने विगत 30 वर्षों से समाचार पत्रों के लिए निष्पक्ष और निर्भीकता के तौर पर कार्य किया। बीते 11 मार्च सन 1916 में एक मार्ग दुर्घटना के दौरान श्री तिवारी जी मौत से बाल-बाल बच गए लेकिन शरीर अपाहिज हो गया आज वह जीवन और मौत के बीच में अखाड़ा लड़ रहे हैं। अखबार मालिक ने आज तक उन्हें किसी प्रकार की कोई सुविधा मुहैया नहीं कराई श्री तिवारी जी ने अपने घर का माल जेवर सब कुछ इलाज के खातिर लगा दिया लेकिन फिर भी वह चारपाई नहीं छोड़ पाऐ। डॉक्टरों ने मोटी रकम मांग कर इलाज करने का भरोसा दिलाया पर उस इलाज की व्यवस्था हेतु कोई संसाधन नहीं है इसी वजह से वह आपने जीवन और मौत के बीच में तमाशबीन बने हुए हैं श्री तिवारी जी आज चारों तरफ से यह निहार रहे हैं कि कोई 2 चून की रोटी घरवालों को दे दे और जब भयंकर दर्द कमर में उठता है तो डॉक्टर के इंजेक्शन लगाने के साथ कुछ दर्द निवारक दवा देदे। लेकिन भला इनके पास है क्या कौन जाने वाला है अपनी दुख और पीड़ा को बर्दाश्त करते हुए जीवन और मौत के बीच में संघर्ष कर रहे हैं उनके दो छोटे-छोटे बच्चे हैं धर्मपत्नी है आय का कोई भी साधन नहीं है इससे इलाज की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है। इन्होंने श्रद्धेय माता मंगला जी व श्रद्धा भोले जी फाउंडेशन की ओर अपनी कबूतर भरी नजर से निहारा और आश लगाई कि यह फाउंडेशन पैसे का कुछ इंतजाम करदे जिससे अचल पड़े से तिवारी चलने में सक्षम हो सकें और जीवन को शांतिप्रिय ढंग से व्यतीत कर सकें इसके लिए उन्होंने एक प्रार्थना पत्र फाउंडेशन को प्रेषित किया है जिसमें यह आशा लगाई जा रही है कि फाउंडेशन प्रभारी चलते मेहरबानी इलाज के लिए आर्थिक मदद कर दें जिससे तिवारी जी का जीवन दुख और मुसीबतों से उबरकर सामान्य जीवन बन जाए। श्री तिवारी जी नेता व धनाढ्य लोगों की तरफ से कुछ आशा और अभिलाषा की नजर से देखते हुए ऐसे देख रहे हैं मानो डूबते के लिए तिनके का सहारा आज श्री तिवारी जी का जीवन जैसे अथाह जल में समाहित हो रहा हो कहीं कोई किनारा दिखाई नहीं दे रहा है इसके लिए वह और उनका मन और उनके परिजन दर दर भटकते नजर आ रहे हैं। शीध्र स्वास्थ्य लाभ हो।
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