फुलपरास/मधुबनी/आकिल हुसैन संवाददाता।
जब संसद में बैठकर कानून बनाने वाले ही कानून का पालन नही करे तो फिर आम लोगों पर उस कानून को थोपना कंहा तक उचित है। भारत सरकार के सड़क सुरक्षा एवं परिवहन मंत्रालय ने यात्री सुरक्षा के मद्देनजर 1 जनवरी 18 से सभी चार पहिया वाहन से बम्फर गार्ड खोलकर हटाने का आदेश जारी कर दिया है। नही हटाने और पकड़े जाने पर दंड का प्रावधान भी है। 1 जनवरी के बाद पुलिस उपरोक्त आदेशों का हवाला देकर चार पहिया वाहनों से बम्फर खोलकर हटाने के साथ दंड भी वसूल रहे है।

लेकिन ये कानून सिर्फ आम लोगो तक ही सीमित है। इस कानून का असर सांसद, विधायक एवं वरीय सरकारी अधिकारियों पर नही दिखाई देता है। जिसका उदहारण शुक्रवार को अनुमंडल कार्यालय में झंझारपुर के सांसद बीरेन्द्र कुमार चौधरी के द्वारा विकास कार्यो की समीक्षा के लिए अनुमंडल कार्यालय फुलपरास पहुचने पर देखने को मिला। सांसद श्री चौधरी के अलावे एसडीपीओ उमेश्वर चौधरी सहित फुलपरास , घोघरडीहा , लौकही एवं खुटौना प्रखंड के बीडीओ एवं सीओ के सरकारी वाहन में बम्फर के साथ बोर्ड भी लगा हुआ था। सांसद के वाहन चालक के अलावा सरकारी अधिकारियों के वाहन चालक को जब इस प्रतिनिधि ने कहा कि बम्फर लगाना गैरकानूनी है तो उसने बताया कि सरकारी वाहन पर ये नियम लागू नही होता है।
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