Bihar :: एसडीआरएफ टीम द्वारा आंगनबाड़ी सेविकाओं को आपदा से बचाव का गुर सिखाया गया।

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Report_ Ajit Kumar, Bhagalpur

एसडीआरएफ टीम द्वारा जिलाधिकारी के आदेशानुसार सबौर ब्लॉक के सभागार में आंगनबाड़ी के लगभग 300 सेविकाओं को आपदाओं से बचाव का गुरुर सिखाया गया . महिलाओं एवं पुरुषों को अग्नि सुरक्षा सप्ताह का कार्यक्रम इंस्पेक्टर गणेश जी ओझा के नेतृत्व में संपन्न हुआ. कार्यक्रम में B.D.O एवं प्रमुख मुखिया उपस्थित थे. अगलगी से बचाव कैसे किया जाए ,उपाय बतलाया गया. इंस्पेक्टर ओझा ने बताया कि बिहार राज्य भारत देश का एक ऐसा राज्य है जो की आपदाओं से घिरे रहता है. जैसे -भूकंप ,बाढ़ ,आगजनी ,सर्पदंश ,तूफान ,अधिक गर्मी ,अधिक ठंडा पड़ना इत्यादि . आपदा से बचाव का हुनर मालूम हो तो आने वाले विपत्ति से राहत पा सकते हैं और जान माल का भी कम नुकसान होगा. एसडीआरएफ इंस्पेक्टर बताते हैं कि अगर एक्सपाइरी गैस सिलेंडर लेते हैं तो उसका नुकसान क्या हो सकता है. गैस सिलेंडर लेते समय कुछ बातों का ध्यान में रखना चाहिए.

खान -पान का सामान हो या फिर दवाइयों के एक्सपायरी होने की बात तो आपने सुनी होगी, लेकिन आप की रसोई में इस्तेमाल हो रहा गैस सिलेंडर भी एक्सपायरी होता है .हर सिलेंडर पर एक एक्सपायरी डेट तिथि लिखी होती है .मगर इसके बारे में उपभोक्ताओं को कम ही जानकारी रहती है .अगर आप घर पर गैस सिलेंडर का उपयोग कर रहे हैं तो उसकी एक्सपायरी डेट जांच लें .इसका इस्तेमाल खतरनाक हो सकता है .गैस सिलेंडर बनाते समय प्लेटो पर एक्सपायरी डेट लिखी जाती . J.F.M /A.M.J /J.A.S /O.N.D इसमें J.F.M /A.M.J /J.A.S के निर्धारित सिलेंडर ले सकते हैं लेकिन वो O.N.D दर्शाए गए तारीख वाले सिलेंडर को नहीं लेना चाहिए,  यह A,B,C,D के रूप में लिखी होती है .अक्सर इस पर उपभोक्ता का ध्यान नहीं जाता .यह कोडवर्ड गैस एजेंसी या फिर कंपनी के अधिकारियों को पता होता है .यह साल के तीन महीनों को दर्शाते हैं ,इस कारण कई बार डेट निकलने के बावजूद ऐसे गैस सिलेंडर उपभोक्ताओं तक पहुंच जाते हैं .जानकारों की माने तो कई बार सिलेंडर फटने की घटना कारण एक्सपाइरी सिलेंडर का इस्तेमाल भी हो सकता है .एक समाप्ति तिथि जो सिलेंडरों के स्तंभों पर मुद्रित किया जाता है .घर में महिलाओं को इसके बारे में पता होना चाहिए . इंडेन गैस भरने वाले एजेंसी की लापरवाही की वजह से होता है .अंदर कुछ संख्या को देखा जा सकता है .ऐसा ही एक नंबर A-15 ,B- 12, C-13 और D-17 आदि जैसे निम्नलिखित श्रृंखला में लिखी होती है .यह आगे लिखा अंग्रेजी अक्षर A,B,C,D मतलब A- मार्च ,B- जून, C- सितंबर और D- दिसंबर. निंलिखित अंग्रेजी अक्षर के बाद वाला 2 अंक साल को दर्शाता है जो एक्सपायरी तारीख होता है .उदाहरण के लिए A-15 का अर्थ होता है सिलेंडर मार्च 2015 के बाद से इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए. C-13 मतलब सिलेंडर सितंबर 2013 , आदि इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए. किसी कारणवश एक्सपायरी गैस सिलेंडर में आग लग भी जाए तो घबराना नहीं चाहिए ,अपनी सूझ-बूझ से सिलेंडर को फटने से बचाया जा सकता है .इससे बचाव हेतु कुछ टिप्स बतलाया गया है. पानी भरा हुआ बाल्टी में बेड शीट को पूरी तरह गिला कर दे ,फिर उसे इस तरह ढकें कि सिलेंडर के नोजल से निकलने वाली ऑक्सीजन का आगमन बंद हो जाए और आग बुझाएगी .फिर चाबी को पुनः बंद कर दें .

अग्नि के साथ-साथ भूकंप से बचाव का प्रशिक्षण भी दिया गया .ऑफिस या घर में पड़े कुर्सी को सर के ऊपर ढककर शांतिपूर्वक बाहर निकल जाना चाहिए .अगर घर के मलबे गिरेंगे तो इस तरीकों से शरीर को कम नुकसान पहुंचेगा और आसानी से हम घर से बाहर कहीं दूर जा सकते हैं . किसी कारणवश धरती की कंपन अगर कम हो तो इसी कुर्सी या टेबल के अंदर पौवे को पकड़ कर बैठ जाना चाहिए. इससे पहले आपदा विभाग वालों से तुरंत संपर्क करना चाहिए ताकि वह उचित समय पर आकर जान माल को बचा सके .आपदा इंस्पेक्टर ने बतलाया कि आग लगने पर यह ना करें .आग के पास खड़े ना हो, धुएं के अंदर नहीं चले ,किसी भी कारण से जलते हुए भवन में प्रवेश ना करें ,बच्चों को सिखाएं की आग बुझाने वाले कर्मियों से डरे नहीं और सामान इकट्ठा करने के लिए बिल्कुल नहीं रुकें.

सर्पदंश पर विशेष जानकारी देते हुए इंस्पेक्टर गणेश जी ओझा बताते हैं की आपदाओं में सांप भी आते हैं . यह जीव हर जगह मौजूद होते हैं ,अतः इसेसे भी बचाव जरूरी है. पुराने जमाने में सांप के काटने से ज्यादातर लोग बिना सही इलाज के ही मर जाते थे . लोगों को यह पता नहीं होता है कि सांप के काटने पर क्या करना चाहिए. अक्सर देखा जाता है कि जहरीले जीव के काटने से मनुष्य हतोत्साहित हो जाते हैं . उस समय अधूरी जानकारी होते हुए वह या तो मौलवी या झाड़ -फूंक करने वालों के पास लेकर चले जाते हैं और उस व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है .गणेश जी बताते हैं कि भारत में लगभग 500 से 600 किस्म के सांप पाए जाते हैं ,जिनमें बहुत कम ही जहरीले होते हैं .लेकिन आमतौर पर लोग सांप के काटने पर वह जहरीला है कि नहीं इसके बारे में बिना जाने ही डर से मर जाते हैं . शायद डर के मारे उन्हें दिल का दौरा पड़ जाता है. सांप का जहर दिल और मस्तिक तक पहुंचने या पूरे शरीर तक फैलने में लगभग 3 से 4 घंटे का समय लेता है. उसके बाद धीरे-धीरे विष का असर पूरे शरीर में होने लगता है ,लेकिन इन घंटों में अगर आप अपने दिमाग का सही प्रयोग करके डॉक्टर के पास ले जाने में सक्षम होते हैं तो सांप का काटा हुआ मरीज को बचाया जा सकता है .आपदा इंस्पेक्टर बताते हैं की ट्यूनिंग गांठ की मदद से शरीर में फैल रहे विषैले पदार्थ को कुछ घंटो तक रोका जा सकता है. यह ट्यूनिंग गांठ रुमाल से हल्का बांधकर और किसी लकड़ी या कलम के माध्यम से कसकर रखा जाता है ,जिससे डॉक्टर के पास मरीज को आसानी से ले जाया जा सकता है. सर्पदंश के दौरान मरीज को ना पानी पीने दे, ना खाना खाने दें इससे जहर का असर तीव्र हो जाता है .सर्पदंश के स्थानों पर पानी से धो दें ताकि जहर ज्यादा फैले नहीं और फफोले ना पड़े . ऑस्ट्रेलिया को छोड़कर सभी महाद्वीपों में जहरीले सांप पाए जाते हैं .सांप प्राय: अपने शिकार को मारने के लिए करते हैं किंतु, इसका उपयोग आत्मरक्षा के लिए भी करते हैं .कुछ सांप विषैले नहीं होते हैं ,वह शीघ्र नहीं काटते हैं .विषैले सांपो में नाग( कोबरा), काला नाग ,नागराज (किंग कोबरा ),करेत कोरल वाइपर ,रसेल वाइपर होते हैं .इन शक्लों से विषैले और विषहीन सांपो की कुछ सीमा तक पहचाना जा सकता है .विषैले सांप के सिर पर के शक्ल छोटे होते हैं और दूसरा सिर के बगल में एक गड्ढा होता है और तीसरा माथे के कुछ शक्ल बड़े होते हैं . विषहीन सांपो की पीठ और पेट के शक्ल समान विस्तार में होते हैं .दंश स्थान पर तीव्र जलन, अवसाद ,मिचली,  अनैच्छिक मल मूत्र त्याग, पलकों का गिरना ,किसी एक वस्तु को दो बार दिखाई देना प्रधान लक्षण पाया जाता है .प्रथम उपचार के बाद व्यक्ति को शीघ्र निकटतम अस्पताल के पास ले जाना चाहिए वहां और एंटीवेनम की सुई दिलवाना चाहिए इससे व्यक्ति को आराम मिलता है. मौके पर एसडीआरएफ कर्मी के जवान संजीव कुमार, मुस्तकीम ,सुरेंद्र मंडल ,रितेश सिंह ,दीपक कुमार ,कमलेश दास के साथ इंस्पेक्टर गणेश जी ओझा उपस्थित थे.