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50 साल में सरकार जो नहीं कर सकी उसे 50 घंटे में लोगों ने कर दिया

लोहरदगा (रांची ब्यूरो) : दो गाँव को जोड़ने के लिए एक पुलिया का सहारा चाहिए था। दोनों गाँव के ग्रामीणो ने सरकार से लेकर मुखिया तक गुहार लगाई थी। 50 साल के इंतजार के बाद ग्रामीणो ने खुद पुलिया बनाने के लिए जुगाड़ तकनीक का सहारा लिया। 50 घंटे के समय मे ही 50 साल का इंतजार खत्म हो गया| बांस की पुलिया तैयार हो गई। बरसात मे लोग इसी पुलिया के सहारे अपने जीवन को रफ्तार देना शुरू कर दिया है। पहले बरसात मे दोनों गाँव की जिंदगियाँ 3 महीने तक ठहर जाती थी| बच्चे भी स्कूल नहीं जा पाते थे और कई बच्चो की पढ़ाई भी इसी वजह से पूरी तरह छुट गई। बीमार लोगों को समय पर अस्पताल पहुंचाना काफी मुश्किल हो जाता था। इस पर कई बार धरना-प्रदर्शन हुआ। लोग मंत्री, विधायक, सांसद से मिले, पर किसी ने नहीं सुनी। पर सिस्टम से निराश होने की बजाय लोग एकजुट हुए और मात्र 50 घंटे में 30 फीट लंबी और 6 फीट चौड़ी लकड़ी कि पुलिया बना डाली। अब इस पुलिया से एक हजार से अधिक लोगों को राहत मिलेगी। पुलिया को तैयार करने में बल्ली और बीम के रूप में पांच पेड़ की लकड़ियां लगीं| 40 बांस की तख्ती लगाई गयी ।

लोगों ने बताया कि हम लोगों के खेत नहर पार दूसरे गांव में भी हैं। उसकी दूरी मुश्किल से 500 मीटर है, लेकिन खेतों तक ट्रैक्टर, खाद, बीज और सिंचाई मशीन आदि ले जाने के लिए 15 किमी दूर घुमकर सेन्हा ब्लॉक ऑफिस होते हुए वहां जाना पड़ता था। इससे खर्च के साथ साथ समय भी अधिक जाया होता था। अब पुलिया बन जाने से ट्रैक्टर को छोड़ सभी काम आसान हो गए सात गांवों के बीच की दूरी भी 8 किमी कम हो गई।

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