बिहार :: पं वाचस्पति मिश्र ब्रह्मसिद्धि पर ब्रह्मतत्व समीक्षा भामती टीका लिख कर संसार के दार्शिनिको को दर्शन का महान ग्रन्थ प्रदान किया …

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मधुबनी :: (रमेश कर्ण) अंधराठाढी षडदर्शन टीकाकार पं वाचस्पति स्मृति पर्व समारोह गुरूवार को मनाया गया । समारोह ठाढी गांव स्थित भामती वाचस्पति उद्यान में रखा गया था। पंडित वाचस्पति मिश्र के प्रतिमा पर माल्यार्पण के बाद कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया । डॉ शशिनाथ झा की अध्यक्षता में आयोजित स्मृति पर्व समारोह  का शुभारंभ अनुग्रह नारायण सिन्हा इन्सीच्यूट पटना के निदेशक डॉ दिगम्बर मिश्र दिवाकर ने दीप प्रज्वलित कर किया। निदेशक ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि षडदर्शन टीकाकार पंडित वाचस्पति मिश्र अद्वैत वेदान्त ,ब्रह्मसिद्धि पर ब्रह्मतत्व समीक्षा विश्वविख्यात भामती टीका लिख कर संसार के दार्शिनिको को दर्शन का महान ग्रन्थ प्रदान किया । उन्होने कहा कि वैषेशिक दर्शन को छोड न्याय ,वेदान्त साख्य, योग, मिमांशा इन पॉच दर्शनो पर आठ पुस्तके लिखी । न्याय दर्शन पर न्याय सूत्र निवंध न्यायवर्तिका टीका साख्य दर्शन पर शाख्य तत्व कौमदी ,योगदर्शन पर तत्व वैसार्दी , मिमांशा दर्शन पर मंडन मिश्र रचित विधि विवेक की पुस्तक पर न्याय कनिका तथा तत्व विन्द  आदि ग्रन्थ है।  कामेश्वर सिंह संस्कृत विश्वविद्यालय व्याकरण विभागाध्यक्ष डॉ शशिनाथ झा ने संस्कृत शिक्षा के प्रति गिरते अभिरूचि पर क्षोभ  व्यक्त करते हुए कहा कि आज भी वाचस्पति  जैसे विद्वान हो सकते है। परन्तु बीच में ही शिक्षा को छोड देते है। उन्होने  विश्वविद्यालय से पंडित वाचस्पति मिश्र कई विधाओ में सोध कराने की वात कही। दर्शन  विभागाध्यक्ष डॉ वैआनन्द झा, डॉ विदेश्वर झा ,वेद विभागाध्यक्ष डॉ नन्द किशोर चौधरी  ,डॉ कालिकादत्त झा , डॉ दिलीप कुमार झा पूर्व विभागाध्यक्ष धर्मशास्त्र , आदि ने वाचस्पति मिश्र के कृति व भामति टीका पर विस्तार पुर्वक चर्चा किये। समारोह का संचालन रत्नेश्वर झा एवं राघवेन्द्र झा ने किया। मुख्य अतिथि विशिष्ट अतिथि व विशेषआमंतित्र आगन्तुको को पाग दुपटटा माला आदि देकर सम्मानित किया गया । संस्कृत शिक्षा के प्रोत्साहन वास्ते दर्जनो छात्र छात्राओ को मंच से सम्मानित किया गया ।  दो व्यक्तियो को विशिट योगदान के लिये सम्मानित किया गया । पंडीत सुशील झा को वर्ष1940 से अनवरत प्रभात संकीर्तन एकादश चर्तुजाम कराने को लेकर एवं पंडित राजेन्द्र झा को 2000 ई से अद्यतन तक गांव के दुर्गा स्थान में अठारहो पुरान के वाचन करने के लिए।  समारोह के द्वितीय सत्र में कविगोठी का आयोजन किया गया । इसमें नेपाल के डॉ सुमन पोखरैल ,विराट गौतम, डॉ भीमनाथ झा, उदय चन्द्र झा विनोद , डॉ चन्द्र मनि झा, अजीत आजाद, दिलीप कुमार झा,डॉ रानी झा, प्रवीण नारायण खैधरी, ऋषि वशिष्ट, शतीस साजन, आनन्द मोहन झा, प्रीतम निषद दयाशंकर मिथिलांचली, बंशीधर मिश्र, मैथिल प्रसांत सुभा स्नेही बोपाल झा अभिक , रामेश्वर निशात, मोहन यादव दीपनारायण विद्यार्थी,अंशुमन, अक्षय आनन्द चुन्नू जी आदि कवियो ने मनमोहक कविता पाठ से समारोह को गुद गुदाया और लोट लोट करते रहे । तीसरे सत्र में संगीत संध्या में रामबाबू झा ग्रूप रखा गया है।
पंडित वाचस्पति मिश्र के जन्म स्थली ठाढी गॉव में पूर्व से ही अपने पुरखो के याद में कई स्मरनीय कृत है। प्राचीन दुर्गा मंदिर परिसर के मुख्य प्रवेश द्वार को भामति द्वार के नाम से निर्मित है। अंधराठाढी में वाचस्पति संग्रहालय पंडित सहदेव झा जी के मूल कृत है। तत्कालीन रेल मंत्री स्व ललित नारायण मिश्र के द्वारा वाचस्पति नगर रेलवे स्टेशन है। पर्यटन  विभाग से 35 लाख रू की योजना र्वा पूर्व स्वीकृत हुआ था। उक्त राशि से पं वाचस्पति मिश्र स्मारक भवन का निर्माण ,घेरावंदी ,स्मारक तथा मिश्राईन पोखर में घाट निर्माण कार्य कराया गया । वाचस्पति मिश्र उद्यान एवं ग्रामीणो के प्रयास से स्मारक बनाया गया है। ।तत्कालीन सभापति पंडित स्व ताराकान्त झा ने इसकी आधर शिला रखी थी । निर्माण समिति ने उन्हे श्रद्धाजलि भी दिया । तत्कालीन मंत्री नीतिश मिश्रा , सुनील कुमार पिन्टू , सखदा पाण्डे आदि  के ग्रामीणो ने आभार व्यक्त किया ।
गांव में आज भी प्रथा प्रचलित है – मिश्राई पोखर के मिटटी से सरस्वती पूजा के दिन बच्चो को अक्षरारंभ कराया जाता है। स्मारक निर्माण समिति के अध्यक्ष रत्नेश्वर झा ,उपाध्यक्ष प्रो क्षमाधर झा , सचिव प्रो काशी नाथ झा ,कोाध्यक्ष गणेश झाआनन्द नारायण झा अधिवक्ता ,श्याराम झा,राजेन्द्र झा, महिकान्त झा, मिहीर झा,उदय मिश्र, , सत्य नारायण झा, नीशिकान्त झा,प्रां प्रकाश मिश्र, शिवेश झा समेंत दजर्नो लोग सामिल हुए थे।