बेनीपट्टी/मधुबनी/आकिल हुसैन -संवाददाता।
लघु सिंचाई विभाग के अधिकारियों की उदासीनता किसानों पर भारी पड़ रही है। विभाग के उदासीनता के कारण किसानों के खेत में लगे गेंहू की फसल समेत दलहन व तेलहन की फसल पटवन के अभाव में सूख रहे है।
वहीं आर्थिक रुप से सबल किसान भारी समस्याओं के बीच निजी बोरिंग से पटवन करा रहे है। जिसमें काफी क्षति हो रही है। पटवन के अभाव में गेंहू की फसल बर्बाद हो रही है।
किसानों की माने तो धूप उगने के कारण अब खेत से नमी गायब हो रही है। गेंहू की फसल को सबसे अधिक पटवन की आवष्यकता पड़ रही है। लेकिन पटवन की व्यवस्था नहंी होने के कारण किसान अधिक परेशान है। वहीं दूसरी ओर अधवारा समूह के अधिकांश सहायक नदियों में पटवन योग्य पानी नहीं होने के कारण उद्वह सिंचाई योजना पूरी तरह से नाकाम साबित हो रही है।
सरिसब के बछराजा नदी पर वर्शों पूर्व अधिष्ठापित उद्वह सिंचाई के तहत लगाए गये मशीन का पाईप नदी के उपरी भागों में होने के कारण पानी नहीं आ रहा है। वहीं पाली के धौंस नदी में अधिष्ठापित उद्वह सिंचाई भी नाकाम साबित हो रही है। प्रखंड क्षेत्र के इक्का-दुक्का राजकीय नलकूप को छोड़ कर कई नलकूप यांत्रिकी गड़बड़ी के कारण बंद पड़े हुए है। जिन्हें दुरुस्त करने में विभाग अब तक नाकाम साबित हो रही है।
बेहटा के राजकीय नलकूप के नाला निर्माण में हुई व्यापक अनियमितता के कारण नाला निर्माण के साथ ही क्षतिग्रस्त होना प्रारंभ हो गया। वहीं नवकरही के राजकीय नलकूप के नाला निर्माण में भारी अनियमितता की गयी। किसान पानी के लिए तरस रहे है। नवकरही के ओमप्रकाश चैधरी समेत ग्रामीणों ने नाला निर्माण में हुई अनियमितता की शिकायत विभागीय मंत्री समेत कई अधिकारियों को की है।
बावजूद स्थिति जस के तस बनी हुई है। वहीं पाली के पूर्व मुखिया राजेन्द्र मिश्रा ने भी उद्वह सिंचाई योजना के सार्थकता पर सवाल उठाते हुए विभाग से पुनः दुरुस्त कराने की मांग की है। गौरतलब है कि रबी फसल के पकने से पूर्व ही पटवन की समस्या एक बार फिर जागृत हो गयी है।
क्या कहते है एसडीओ
अनुमंडल पदाधिकारी मुकेश रंजन ने बताया कि किसानों की समस्या के निदान के लिए विभाग को पत्राचार किया जाएगा।
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