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सिस्टम की शह पर पनपा ‘असलम चमड़ा’: कैसे नगर निगम की छांव में चलता रहा गौकशी और करोड़ों का खेल

भोपाल।

राजधानी भोपाल का जिंसी स्लॉटर हाउस अब केवल एक सरकारी परिसर नहीं, बल्कि सिस्टम की नाकामी और अफसरशाही की सांठगांठ का प्रतीक बन चुका है। मृत मवेशियों का चमड़ा और हड्डियां बेचने वाला असलम कुरैशी उर्फ असलम चमड़ा आज करोड़ों की संपत्तियों का मालिक है। सवाल यह है कि आखिर नगर निगम की अनुमति और संरक्षण में वर्षों तक उसका यह साम्राज्य कैसे फलता-फूलता रहा?

मृत मवेशियों से करोड़ों तक का सफर

करीब 25–30 साल पहले पुराने भोपाल में असलम कुरैशी मृत मवेशियों को उठाने और उनसे चमड़ा-हड्डियां निकालने का काम करता था। नगर निगम ने जब मृत पशुओं को उठाने के लिए अपने कर्मचारी रखे, तब अधिकारियों के सामने खर्च निकालने की चुनौती खड़ी हुई। यहीं से असलम चमड़ा और निगम अधिकारियों के बीच अघोषित समझौते की शुरुआत हुई। मृत मवेशी असलम को सौंपे जाने लगे और उसका कारोबार फैलता गया।

स्लॉटर हाउस पर कब्जा और सत्ता से सांठगांठ

जब भोपाल नगर निगम मैन्युअली स्लॉटर हाउस संचालित करता था, तब भी ठेका असलम चमड़ा के हाथ में ही रहता था। स्लॉटर हाउस से निकलने वाला वेस्ट बेचकर भी वह मोटी कमाई करता रहा। समय के साथ उसने हर राजनीतिक दल के नेताओं और अफसरों से संबंध बना लिए और मांस सप्लाई के ठेके भी हासिल कर लिए।

गौमांस को भैंस का बताने का खेल

सबसे गंभीर आरोप यह है कि असलम चमड़ा ने नगर निगम के डॉक्टर की मदद से गौमांस को भैंस का मांस बताने का फर्जी सर्टिफिकेट बनवाया। इसी आधार पर मांस की सप्लाई मुंबई, हैदराबाद और विदेशों तक की जाती रही।

8 जनवरी को मथुरा लैब की रिपोर्ट ने इस फर्जीवाड़े की पोल खोल दी, जब कंटेनर में पाए गए मांस को गौमांस बताया गया, जबकि नगर निगम के डॉक्टर ने भैंस का सर्टिफिकेट दिया था।

रोहिंग्या और बांग्लादेशियों को काम पर लगाने का आरोप

पुलिस सूत्रों के अनुसार असलम चमड़ा पर रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों को स्लॉटर हाउस में काम पर लगाने की शिकायत राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग तक पहुंची थी। लेकिन भोपाल पुलिस ने असलम के बयान के आधार पर उसे निर्दोष मानते हुए फाइल बंद कर दी।

वन विहार से लेकर विदेशों तक सप्लाई

भोपाल के वन विहार नेशनल पार्क समेत कई टाइगर रिजर्व में मांसाहारी जानवरों को दिया जाने वाला कच्चा मांस भी असलम चमड़ा ही सप्लाई करता था। गौमांस कांड सामने आने के बाद वन विहार ने उसका ठेका निरस्त कर दिया है।

खुलासे के बाद हड़कंप

बजरंग दल द्वारा पकड़े गए एसी कंटेनर, 26 टन मांस की लैब रिपोर्ट और गौमांस की पुष्टि के बाद मामला तूल पकड़ गया। नगर निगम ने स्लॉटर हाउस को सील कर दिया और डॉक्टर बेनीप्रसाद गौर सहित 9 कर्मचारियों को निलंबित किया गया है।

राजनीतिक घमासान तेज

हिंदू संगठनों ने असलम चमड़ा पर गौकशी और एनएसए लगाने की मांग की है। कांग्रेस ने निगम अधिकारियों और नेताओं के नारको टेस्ट की मांग करते हुए भाजपा सरकार पर गौवध को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं।

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